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धर्मेंद्र प्रधान, जिन्होंने लाखों लोगों को गैस पर सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित किया

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान- फाइल फोटो
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान- फाइल फोटो

'गिव-इट-अप स्कीम' केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेहद अहम और लोकप्रिय योजना मानी गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2018, 10:29 AM IST
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उड़ीसा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी इसकी तैयारी में लगी हुई है. पार्टी ने तय परिपाटी को तोड़ते हुए बहुत पहले ही मुख्यमंत्री के तौर पर अपना चेहरा तय कर दिया है. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पार्टी से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रधान को सीएम पद की उम्मीदवारी देने के पीछे राज्य से गैर ओडिशा नौकरशाहों का शासन खत्म करना भी है. केंद्र सरकार में बेहद अहम पद संभाल रहे धर्मेंद्र प्रधान के बारे में कम ही लोग जानते हैं. कौन है ये चेहरा, जिसे एक महत्वपूर्ण राज्य में सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है.

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26 जून 1969 को उड़ीसा के तालचेर में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान के पिता देबेंद्र प्रधान भाजपा के भूतपूर्व सांसद रह चुके हैं. घर में शुरू से ही राजनैतिक माहौल रहा, जिसका असर जल्द ही सक्रिय राजनीति में उनकी पैठ से दिखाई देने लगा. इसका असर हालांकि उनकी शिक्षा पर नहीं पड़ा और उन्होंने उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी यानी मानव विज्ञान जैसे गूढ़ तकनीकी विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान वे एबीवीपी के नेशनल सेक्रेटरी के पद पर रहे.



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उच्च शिक्षा के तुरंत बाद ही वे राजनीति से पूरी तरह से जुड़ गए. उड़ीसा से भाजपा का मुख्य चेहरा बन चुके प्रधान आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित हैं. वे भाजपा के थिंक टैंक अमित शाह के विश्वासी माने जाते हैं और साल 2014 में बिहार के लोकसभा चुनावों में पार्टी की जीत में उनका काफी अहम योगदान माना जाता है. साथ ही अलग-अलग राज्यों जैसे बिहार और छत्तीसगढ़ में वे पार्टी का चेहरा मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. कई अहम पद संभाल चुके प्रधान फिलहाल केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं.

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उनके नेतृत्व में पेट्रोलियम विभाग कई बदलावों से गुजरा. इसमें सबसे महत्वपूर्ण एलपीजी यानी घरेलू गैस की गिव-इट-अप स्कीम रही. यानी ऐसे घर जहां की आर्थिक स्थिति बेहतर है, वे गैस पर अपनी सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ दें ताकि इसका लाभ उन्हें मिल सके जो अपेक्षाकृत कमजोर आर्थिक हालातों से गुजर रहे हैं. इस स्कीम के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने स्वेच्छा से अपनी सब्सिडी छोड़ दी. पेट्रोल के लगभग रोजाना घटती-बढ़ती कीमतों के बीच भी प्रधान अपने गृह-प्रदेश का एक बेहद लोकप्रिय चेहरा हैं और कयास लगाया जा रहा है कि उनकी यही छवि आने वाले चुनावों में गैर-भाजपाई प्रदेश में पार्टी की जड़ें मजबूत कर सकती है.
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