सूरत: गुजरात का एक शहर, जहां नालियों में बहता है हीरा

भारत के हीरे और अन्य नगों के आभूषणों से होने वाला कुल कारोबार 2013 में 80 हजार करोड़ से ज्यादा था. तब इसका 80% कारोबार सूरत में ही होता था. इस शहर में कुछ लोग दुकानों की नालियों से हीरे के चूरे को बीनने का काम करते हैं, जिसे वे बेचकर कुछ पैसे कमा लेते हैं.

News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 12:08 PM IST
सूरत: गुजरात का एक शहर, जहां नालियों में बहता है हीरा
सूरत अपने हीरे और कपड़े के कारोबार के चलते चर्चित रहा है (सूरत की मुगलीसराय इमारत की फाइल फोटो)
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Updated: May 25, 2019, 12:08 PM IST
गुजरात स्थित सूरत के तक्षशिला कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 20 लोगों की मौत हो गई है. जब आग लगी तो कोचिंग सेंटर में क्लासेज चल रही थीं. आज सूरत भले ही इस आग कांड के चलते चर्चित हो लेकिन दुनिया भर में सूरत की असली प्रसिद्धि हीरे के व्यापार को लेकर है. यह शहर अरब सागर से करीब 20 किमी दूर है. 7657 वर्ग किमी में फैला यह शहर बहुत पुराना है. इतिहास में कई लेखकों ने अपने वर्णनों में सूरत का जिक्र किया है. पुर्तगालियों, डच और अंग्रेजों ने कभी यहां अपने व्यापार स्थापित कि थे. आज भारत के बड़े औद्योगिक शहरों में शामिल सूरत को 15वीं शताब्दी से ही उद्योगनगरी माना जाता है. ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1612 में प्रथम वेयरहाउस यहीं पर स्थापित किया था.

यह शहर भौगोलिक तौर पर भी संपन्न है. जहां इसके पास ही अरब सागर है तो वहीं तापी नदी इसके बीच से होकर गुजरती है. यह शहर लंबे वक्त से कपड़ा और डायमंड उद्योग के लिए दुनिया भर में ख्यात रहा है. कहा जाता है कि हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग के लिए आपको यहां एक से एक कारीगर मिल जाएंगे. इस शहर को सिल्क सिटी और डायमंड सिटी के नाम से भी जाना जाता है.

हीरे के कारोबार में पूरी दुनिया में सबसे आगे
अगर अनुपात की बात करें तो विश्व के 10 हीरों में से 8 की पॉलिशिंग यहीं पर होती है. जैसा कि पहले ही बताया गया कि जो हीरे-जवाहरात का कारोबार 2013 में दुनियाभर में 80 हज़ार करोड़ का था. उसका बहुत बड़ा हिस्सा, करीब 80% सूरत का होता था. सूरत में डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग में कुल 7 लाख कामगार हैं, जिनमें से ज्यादातर युवा हैं. पिछले कुछ वक्त में मुंबई का डायमंड उद्योग भी तेजी से सूरत शिफ्ट हुआ है.

भौगोलिक स्थिति भी कारोबार में मददगार
इस शहर को पहचान मिलनी शुरू हुई सन् 1400 के बाद. कहा जाता है कि इस शहर को किसी गोपी नाम के ब्राह्मण ने बसाया था. इस शहर के व्यापारिक उत्थान में शहर की भौगोलिक स्थिति ने भी बहुत योगदान दिया है. यही कारण रहा है कि यह शुरुआत से ही उद्योगों की शरण स्थली रहा. हालांकि सीमा के पास होने के चलते इसे कई बार विदेशी शक्तियों का सामना भी करना पड़ा. हालांकि सन् 1800 में ही इस पर अंग्रेजों का शासन हो गया था जो भारत की आजादी तक जारी रहा. हालांकि विदेशी शक्तियों के प्रभाव के चलते इस शहर को औद्योगिक तौर पर विकसित होने का अवसर भी मिला.

नाली से हीरे का पाउडर बीन कर कर लोग कर लेते हैं कमाई
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सूरत में जरी का काम भी सुंदर होता है. यहां का सूती, रेशमी, किमखाब (जरीदार) कपड़ा, और सोने-चांदी के आभूषण भी बहुत चर्चित हैं. इतना ही नहीं एक हिंदी दैनिक अख़बार दैनिक भास्कर के अनुसार जब हीरे की छंटाई और पॉलिशिंग के दौरान के दौरान हीरे के बहुत से छोटे-छोटे कण छिटककर गिर जाते हैं तो सवेरे सफाईकर्मी दुकानों की नालियों से बीन लेते हैं. वे इन कणों को फिर से दुकानों पर बेच देते हैं जिससे उन्हें ठीक-ठाक पैसा मिल जाता है. यही वजह है कि कहा जाता है कि इस शहर की नालियों में भी हीरे बहा करते थे. इस हीरे के पाउडर का प्रयोग कई औद्योगिक कामों और शीशे काटने के औजार बनाने में प्रयोग होता है.

सूरत की मुख्य फसलें धान, कपास, बाजरा, चावल और दलहन हैं. हाल ही में वहां गन्ना, अंगूर और केले जैसी फसलें उगाई जानी शुरू की गई हैं. सूरत जिले की कुल जनसंख्या करीब 50 लाख है.

सूरत को भी स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है. इस क्रम में यहां कई सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. इस शहर में कुल 5 हजार कैमरे लगाने की तैयारी थी. ये कैमरे यातायात नियंत्रित करने में भी मदद करने के लिए थे और कंट्रोल सेंटर से जुड़े हुए थे.

सूरत भारत के सबसे ज्यादा प्रति परिवार आय वाले शहरों में से एक है (सूरत की यूनिवर्सिटी रोड की फाइल फोटो)


औद्योगिक शहर होने के चलते इसकी बड़ी आबादी प्रवासी है और त्योहारों के वक्त यहां कई इलाकों में इसके चलते सन्नाटा पसर जाता है. प्रति परिवार आय की लिस्ट में यह शहर, भारत के शहरों में बहुत ऊपर आता है. 2013 में यह एक नंबर पर था और दूसरे नंबर पर चंडीगढ़ था.

अमेरिकन इतिहासकार रॉबिन मैक्सवेल ने अपनी किताब टेक्सटाइल ऑफ साउथ ईस्ट एशिया में लिखा है कि जटिल तरीके से सजाए गए भारतीय कपड़े कीमती माने जाते थे और दो या तीन सौ साल पुराने भारतीय कपड़ों को दक्षिण पूर्व एशिया में 20वीं सदी में भी संभाला सहेजा जाता था और खास अवसरों पर ही उन्हें पहना जाता था. ये वस्त्र फिलीपींस और मलेशिया जैसे देशों में भी बहुत चर्चित थे.

सूरत ने कई बार इतिहास में अपनी जीजीविषा का प्रदर्शन किया है. इसका एक नजारा 2006 में भी देखने को मिला था डब सूरत में भयंकर बाढ़ आई थी. इस आपदा के बाद विशेषज्ञों ने कहा था कि सूरत 25 साल पीछे चला गया है लेकिन कुछ ही दिनों में सूरत वासियों ने इस बात को गलत साबित कर दिया. मात्र 7 सालों में न केवल इस शहर ने वही रुतबा हासिल कर लिया बल्कि उससे आगे भी निकल गया.

बरदोली, दांडी, डूमा, हजीरा, उकई, उतरन और वेदछी यहां के लोकप्रिय एवं चर्चित स्थल हैं. मगडल्ला यहां का प्रमुख बंदरगाह है. बरदोली और वेदछी में महात्मा गांधी के आश्रम हैं.

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First published: May 25, 2019, 11:59 AM IST
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