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क्या बिग बैंग के फौरन बाद ही बनने लगे थे ब्लैक होल

क्या बिग बैंग के फौरन बाद ही बनने लगे थे ब्लैक होल

सुपरमासिव ब्लैक होल (Super Massive Black Hole) की उत्पत्ति ब्रह्माण्ड के एक बड़े रहस्यों में से एक है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सुपरमासिव ब्लैक होल (Super Massive Black Hole) की उत्पत्ति ब्रह्माण्ड के एक बड़े रहस्यों में से एक है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सुपरमासिव ब्लैक होल (Super Massive Black Hole) और डार्क मैटर (Dark Matter) के बारे में एक अध्ययन में कहा गया है कि इनका अस्तित्व बिगबैंग (Big Bang) के समय से ही रहे प्राइमर्डियल ब्लैक होल की वजह से हुआ था. यह दावा ब्रह्माण्ड की व्याख्या करने वाले परंपरागत माडल से हटकर है जिसमें बिगबैंग के बाद जहां इन ब्लैक को सुपरमासिव ब्लैक के लिए नींव बताया गया तो इन्हीं ब्लैक होल के ही डार्क मैटर होने की प्रबल संभावना बताया गया.

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    ब्रह्माण्ड के कई अनसुलझे रहस्यों में सुपरमासिव ब्लैक होल (Supermassive Black Hole) और डार्क मैटर (Dark Matter) भी शामिल हैं. ब्रह्माण की व्याख्या करने वाले परम्परागत मॉडल से हटकर एक मॉडल के तहत खगोलविदों की एक टीम ने यह प्रस्ताव दिया है कि दोनों ही रहस्यों की प्राइमर्डियल ब्लैक होल (primordial black holes) से व्याख्या की जा सकती है. अध्ययन में यह भी कहा गया है कि ब्लैक होल ब्रह्माण्ड की शुरुआत से ही मौजूद थे. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सब सिद्ध करने के लिए अलग से किसी नए कणों या नई भौ   तिकी की जरूरत नहीं पड़ेगी.

    डार्क मैटर और सुपरमासिव ब्लैक होल
    यह नया अध्यनय द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए स्वीकार हो गया है. जहां डार्क मैटर के अस्तित्व को ही अभी व्यवहारिक रूप से सिद्ध नहीं किया जा सका है, उसे कईखगोलीय घटनाओं परिघटनाओं को सिद्ध करने में उपयोग में लाया जाता है. वहीं सुपरमासिव ब्लैकहोल हमारी मिल्की वे सहित सभी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित विशालकाय ब्लैक होल हैं. लेकिन इनका बनना कब शुरू हुआ यह अब भी गहरा रहस्य है.

    बिग बैंग के समय से ही
    इसमें शामिल मियामी यूनिवर्सिट के निको कैपलुटी, यूरोपीय स्पेस एजेंसी के साइंस डायरेक्टर गंटर हैसिंजर और येल युनिवर्सिटी की प्रियंवदा नटराजन ने सुझाया है कि ब्लैक होल ब्रह्माण्ड की शुरुआत, यानि बिगबैंग के फौरन बाद से ही मौजूद थे. इसके साथ इन शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यही प्राइमर्डियल ब्लैक होल खुद ही डार्क मैटर हो सकते हैं.

    अतिविशाल से बहुत छोटे ब्लैक होल
    हैसिंजर ने बताया कि अलग-अलग आकर के ब्लैक होल अब भी रहस्य ही हैं. हम यह नहीं समझ पाए हैं कि ब्रह्माण्ड के अस्तित्व के बाद से इतने कम समय में इतने विशालकाय सुपरमासिव ब्लैक होल कैसे विकसित हो गए.” दूसरी तरफ, जैसा यूरोपीय स्पेस एजेंसी गाइया के अवलोकनों से संकेत मिलते हैं, बहुत छोटे ब्लैक होल भी हो सकते हैं. यदि इनका अस्तित्व होता है, तो वे इतने छोटे होते हैं कि मरते हुए तारों से बन ही नहीं सकते.

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    इस अध्ययन में दावा किया गया है कि बिग बैंग (Big Bang) के समय से ही ब्लैक होल का अस्तित्व था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    शुरुआत से ही विलय?
    निको कैपलुटी ने बताया, “हमारा अध्ययन दर्शाता है कि बिना नए कणों या नई भौतिकी की अवधारणा के आधुनिक खगोलविज्ञान के इन रहस्यों की सुलझाया जा सकता है. इसमें डार्क मैटर की प्रकृति लेकर सुपरमासिव ब्लैकहोल तक शामिल हैं.” यदि अधिकांश ब्लैकहोल बिग बैंग के फौरन बाद ही बने थे तो तभी से उनमें विलय होना शुरू हो गया होगा, जिससे वे समय के साथ और विशालकाय ब्लैक होल बनते गए होंगे.

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    मिल सकती है शुरुआती विलयों की जानकारी
    यदि प्राइमर्डियल ब्लैक होल का अस्तित्व होता है तो यूरोपीय स्पेस एजेंसी की भावी गुरुत्व तरंग अंतरिक्ष वेधशाला, लीजा (LISA) इनके विलय के संकेतों का शायद पकड़ सकती है. छोटे ब्लैक होल केवल प्राइमर्डियल ब्लैक होल ही रह गए होंगे जो अभी तक बड़े ब्लैक होल में नहीं मिल पाए होंगे.

    ब्लैक होल से भरा ब्रहाण्ड
    इस मॉडल के मुताबिक पूरा ब्रह्माण्ड ब्लैक होल से ही भरा रहा होगा. तारों का निर्माण डार्क मैटर के गुच्छों के आसपास बनना शुरू हुआ होगा जिससे अरबों सालों में सौरमंडल और गैलेक्सी बन गई होंगी. यदि पहले तारे वाकई में प्राइमर्डियल ब्लैक होल के आसपास बनने था, तो  ब्रह्माण्ड में उनकी उपस्थिति स्टैंडर्ड माडल के द्वारा अपेक्षित समय से बहुत पहले से ही रही होगी.

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    अध्ययन के मुताबिक ब्रह्माण्ड (universe) से ऐसे संकेत अब भी मिल सकते हैं जिनसे इन दावों की पुष्टि हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    ब्लैक होल के बीज
    प्रियंवदा नटराजन का कहना है किप्राइमर्डियल ब्लैक होल का यदि अस्तित्व है तो वे सभी ब्लैक होल की बीज रहे होंगे जिसमें से एक हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के केंद्र में मौजूद है. यूरोपीय स्पेस एजेंसी की यूक्लिड अभियान डार्क ब्रह्माण्ड का पहले की तुलना में कहीं विस्तार से अध्ययन करेगा और वह डार्क मैटर के पिंडों की खोज केसाथ प्राइमर्डियल ब्लैक होल की पहचान करने की पड़ताल में भूमिका अदा कर सकता है.

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    नासा, यूरोपीय स्पेस एजेंसी और कनाडा स्पेस एजेंसी का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप एक तरह की खगोलीय टाइम मशीन होगा जो पिछले 13 अरब साल पहले के ब्रह्माण्ड की जानकारी दे सकेगा और इस रहस्य पर और रोशनी डाल सकेगा. गुंटर का कहना है कि अगर शुरुआती तारे और गैलेक्सी पहले ही तथाकथित डार्क एजेस से बने थे, तो वेब टेलीस्कोप इनके प्रमाण हासिल कर सकता है.

    Tags: Big bang, Black hole, Research, Science, Space

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