क्या खत्म हो चुकी है चीन से गरीबी? जानिए जिनपिंग के दावे का सच

कोरोना के कहर के बीच चीन खुद को गरीबी-मुक्त बता रहा है- सांकेतिक फोटो

कोरोना के कहर के बीच चीन खुद को गरीबी-मुक्त बता रहा है- सांकेतिक फोटो

कोरोना के कहर के बीच चीन खुद को गरीबी-मुक्त (China claims the nation poverty-free) बता रहा है. हालांकि खुद पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के मुख्य नेता ने इसपर सवाल खड़े कर दिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 11:32 AM IST
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दुनियाभर को कोरोना महामारी के दौर में झोंकने के आरोपों से घिरा चीन खुद को पाक-साफ बताने की खूब कोशिश कर रहा है. इसी कड़ी में उसने दावा किया कि दुनिया भले ही उसे कुछ भी कहे, वो लगातार गरीबी हटाने के अभियान में जुटा हुआ है. उसकी पॉलिसी के चलते ही उसके यहां 9 जिलों से गरीबी पूरी तरह से दूर हो गई.

चीन के सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने इस तरह का दावा किया है. जिन जिलों से गरीबी हटाने का दावा हो रहा है, वे सारे ही जिले दक्षिण-पश्चिम चीन के Guizhou प्रांत में हैं और अरसे से भुखमरी का शिकार रहे हैं. शिन्हुआ के मुताबिक चीन ने अपने यहां से गरीबी पूरी तरह से खत्म करने का टारगेट रखा था, जो इसी साल का है, साल 2019 के अंत में देश के कुल 52 जिले गरीबी रेखा से नीचे गुजारा कर रहे थे.

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इसी बीच नवंबर महीने की शुरुआत में ही लगभग सारे जिलों ने खुद को गरीबी-मुक्त घोषित कर दिया. चीनी सरकार का डाटा भी इसे पक्का करता है. इसके अनुसार सरकारी कोशिशों के कारण 850 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकल सके. इस कारण वैश्विक हंगर में 70% से ज्यादा कमी आई, जो अकेले चीन के कारण रही.

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किसी देश से गरीबी हट गई है, इसका एक पैमाना खाने को पूरा मिलना है- सांकेतिक फोटो (pxfuel)

बकौल चीन उसके ग्रामीण इलाकों में गरीबी की दर में 10.2% से सीधे 0.6% की गिरावट आई. इसी के बाद आत्मलविश्वास से भरे हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली की 75वीं बैठक में कहा कि वे साल 2030 तक देश से गरीबी पूरी तरह से खत्म कर देंगे.

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इस बीच ये समझते हैं कि किसी देश से गरीबी हट गई है, ये दावा किस आधार पर किया जाता है! इसके लिए 3 मानक हैं. पहला तो है आय यानी इन्कम. लोगों के पास देश की आर्थिक खरीदी औसत के लायक पर्याप्त पैसे होने चाहिए. चीन के मुताबिक वहां ग्रामीण इलाकों में किसानों की सालाना आय 4000 युवान हो चुकी है.

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गरीबी खत्म होने का दूसरा पैमाना है चिंतामुक्त होना. यानी परिवार के पास खाने और पहनने की कोई चिंता न हो. वहीं तीसरा और आखिरी पैमाना है गारंटी. इसके तहत ये गारंटी आती है कि बच्चों को औसत शिक्षा हर हाल में मिलेगी. हर किसी को बेसिक मेडिकल सुविधा मिल सकेगी और हाउसिंग सिक्योरिटी भी होगी.

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चीन में अनाज की भारी कमी के कारण भुखमरी के हालात बन चुके हैं- सांकेतिक फोटो (pxhere)

चीन के लगभग गरीबी-मुक्त हो जाने के दावे पर हालांकि लगातार सवाल उठते रहे हैं. साल 2019 की मई में इसपर काफी बात हुई थी, जब खुद चीन की पार्टी पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइन के नेता Li Keqiang ने इसके उलट बयान दे दिया था. उन्होंने कहा था कि 600 मिलियन चीनियों की मासिक आय 100 युवान यानी 10000 रुपए है. ली ने खुद आगे आते हुए इसपर चिंता जताते हुए कहा कि इतनी कम आय में चीन के मध्यम आकार वाले शहर में घर लेना या किराया देना असंभव है.

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जिनपिंग के देश को गरीबी-मुक्त करने के दावे की हवा फिलहाल कोरोना के दौरान भी निकल गई. इस दौरान चीन के आर्थिक तौर खुद को मजबूत बताने के दावे के बीच भी खबर आई कि चीन में अनाज की भारी कमी के कारण भुखमरी के हालात बन चुके हैं. अनाज की कमी के कारण ही चीन अपने यहां से अनाज निर्यात करने संबंधी सारे एग्रीमेंट रद्द कर चुका है. यहां तक वो अनाज की खरीदी में लग गया है.

साथ ही साथ अन्न की मांग और सप्लाई में फर्क कम करने के लिए चीन दूसरे देशों में खेती लायक जमीन लीज पर लेने की शुरुआत कर चुका है. चीन ने विदेशों में कृषि भूमि खरीदने के लिए लगभग 94 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं. इसमें अफ्रीकी देशों के दक्षिण अमेरिकी देश भी हैं.

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