मुंबई में बिजली गुल क्या चीन का हमला था? जानिए कितना बड़ा है ये खतरा

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सीमा पर तनाव (Border Tension) के बीच प्रॉक्सी वॉर भी चल रहा है. भारत के नंबर एक दुश्मन बन चुके चीन ने सिर्फ सीमा ही नहीं, बल्कि भारत के सिस्टम में भी सेंध लगाने के मंसूबे बांधे हैं, साइबर हमलों (Cyber Attacks) की बड़ी साज़िशें हो रही हैं.

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अक्टूबर 2020 में भारत की आर्थिक राजधानी (Financial Capital of India) में घंटों के लिए बिजली गुल (Mumbai Power Outage) हो गई थी. मुंबई की धड़कन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें रुक गई थीं, स्टॉक एक्सचेंज ठप पड़ा और कोरोना से जूझ रहे महानगर में अस्पताल तक बंद हो गए थे. इतने बड़े स्तर पर बिजली अचानक गुल हो जाने के पीछे कारण क्या था? अगर आप याद करें तो यह वही वक्त था, जब भारत और चीन के बीच सीमा पर संघर्ष (India-China Clash) को करीब पांच महीने हो चुके थे और तनाव चरम पर था. तो क्या यह चीन का ही साइबर अटैक था, जिसके चलते मुंबई ठप हो गई थी?

यह कोई नामुमकिन बात नहीं है. अमेरिका बेस्ड एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर की ताज़ा स्टडी की मानें तो यह साफ तौर पर चीन की साइबर साज़िश थी, जो गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों की जान लेने के बाद भड़के तनाव के बीच भारत पर चोरी छिपे हमले के मकसद से रची गई थी. जानिए कि यह साज़िश क्या थी और खतरा आगे के लिए भी कितना बड़ा है.

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देश भर में चीनी मैलवेयर का खतरा
स्टडी बताती है कि उस वक्त पूरे भारत में पावर सप्लाई के सिस्टम में चीनी मैलवेयर देखे गए. उस वक्त पावर मिनिस्ट्री ने हालांकि कहा था कि इससे कोई खतरा नहीं था. 12 फरवरी को भारत के नेशनल क्रिटिकल इनफर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर ने मंत्रालय को चेतावनी दी कि चीनी सरकार द्वारा प्रायोजित हैकरों से पावर सिस्टम को खतरा है.

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2020 में पावर सिस्टम में मैलवेयर पाए जाने की रिपोर्ट आई थी.


क्या है RedEcho और Shadow Pad?
भारत में प्रमुख पावर प्लांटों में मैलवेयर किसने डाला? इस सवाल के जवाब में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी स्टडी बताती है कि चीनी लिंक रखने वाले एक एक्टिविटी ग्रुप RedEcho की यह करतूत थी. स्टडी में कहा गया कि मुंबई में बत्ती गुल होना इस बात का भी सबूत है कि भारतीय लोड डिस्पैच सेंटरों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया था.

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साल 2020 के जून से ही, मैसेचुसैट्स बेस्ड रिकॉर्डेड फ्यूचर ने खुलासा किया था कि AXIOMATICASYMPTOTE कोड से ट्रैक किए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल बढ़ रहा था, जिसमें ShadowPad कमांड और सर्वरों को कंट्रोल करने का कारनामा शामिल था, जिससे भारत के पावर सेक्टर को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा सके. यानी ShadowPad मैलवेयर का नाम है और Red Echo ग्रुप है.

कितना भयानक है ये खतरा?
चीन के इस तरह के साइबर हमले का खतरा कितना बड़ा है, इस बारे में स्टडी इशारा देती है कि भारत के सबसे संवेदनशील इन्फ्रास्ट्रक्चरों पर इस तरह के हमले किए जा सकने की आशंकाएं बहुत ज़्यादा हैं और चीनी हैकर सिस्टम में वायरसों को बड़ी चतुराई से प्लांट करने की ताक में लगे हैं. 2020 के मध्य में रिकॉर्डेड फ्यूचर ने भारत के पावर सेक्टर में रीजनल लोड और पावर ग्रिड संचालन करने वाली 10 रीजनल संस्थाओं को खतरे का ज़िक्र किया था.

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पावर सेक्टर ही नहीं, पोर्ट और वैक्सीन प्लांट भी चीनी हैकिंग के निशाने पर हैं.


इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पावर सेक्टर के अलावा, भारत के दो समुद्री पोर्ट भी चीनी हैकरों के इसी तरह हमले के शिकार बन सकते हैं. थ्रेट इंटेलिजेंस की महारथी संस्था रिकॉर्डेड फ्यूचर के मुताबिक भारतीय संस्थाओं पर साइबर अटैक्स में एक खास तरह का पैटर्न दिखता है, जो संकेत है कि हैकर किस तरह सक्रिय हैं. यह भी कहा गया कि 12 पावर सेक्टरों से जुड़े कुल 21 आईपी एड्रेस क्रिटिकल हैं, जिन्हें टारगेट किया जा सकता था.

वैक्सीनों को भी है खतरा!
सीमा पर संघर्ष के साथ ही भारत में कोरोना के खिलाफ वैक्सीन डेवलपमेंट और उत्पादन भी चल रहा था और जारी है. चीन की नज़र इसे भी नष्ट करने पर रही है. एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट कहती है कि चीनी सरकार प्रायोजित एक और हैकिंग ग्रुप ने पिछले दिनों ही भारत बायोटेक और सिरम इंस्टिट्यूट के आईटी सिस्टम को हैक करने की कोशिश की.

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गौरतलब है कि भारत में जिन दो वैक्सीनों को अप्रूवल मिला और फिलहाल जो दो वैक्सीनें लगाई जा रही हैं, उन दोनों का उत्पादन इन्हीं दो संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है. यानी चीनी हैकिंग का खतरा भारत के सामने बेहद गंभीर और संवेदनशील हो चुका है.

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जांच कमेटी ने साइबर अटैक को कारण बताया.


कितनी सच मानी जाए ये थ्योरी?
यह बात सही है कि रिकॉर्डेड फ्यूचर को भारत के सिस्टम का एक्सेस सीधे तौर पर नहीं मिला और उसने अपने स्तर पर जुटाए गए डेटा के विश्लेषण को लेकर ही चीनी साइबर अटैक की थ्योरी दी है, लेकिन इससे पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता. यह भी गौरतलब है कि सरकार ने इस रिपोर्ट के बारे में कहा कि उसे पहले ही चीन के इन नापाक इरादों की खबर रही है और सतर्कता बरती गई है.

दूसरी तरफ, इस थ्योरी को मज़बूती इसलिए मिलती है क्योंकि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने हालिया बयान में कह दिया है कि मुंबई के बिजली गुल होने के कारणों की जांच के लिए जो कमेटी बनाई गई थी, उसने जो प्राथमिक रिपोर्ट पेश की है, उसमें साइबर अटैक को ही प्रमुख कारण माना है. ऐसे में, यह साफ है कि भारत के सामने चीनी हैकरों और साइबर अटैक का खतरा कितना खतरनाक है.
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