संत घोषित की जाने वाली भारत की सिस्टर मरियम के बारे में क्या जानते हैं आप?

पहले ही संत घोषित की जा चुकीं मदर टेरेसा की तरह सिस्टर मरियम भी दीन हीनों के प्रति बेहद संवेदनशील थीं. जानें क्यों सिस्टर मरियम को घोषित किया जा रहा है संत और कैसी थी उनके जीवन की तपस्या.

News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 7:18 PM IST
संत घोषित की जाने वाली भारत की सिस्टर मरियम के बारे में क्या जानते हैं आप?
विकिपीडिया के अनुसार केरल में लगा सिस्टर मरियम का स्टैच्यू.
News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 7:18 PM IST
भारत को एक और महिला संत जल्द मिलने वाली है. पोप फ्रांसिस ने वेटिकन सिटी में ये निर्णय ले चुके थे और अब केरल के ​कोच्चि में ये घोषणा की गई है कि पोप आगामी 13 अक्टूबर को होने वाले उपाधि सम्मेलन में भारत में नन रहीं सिस्टर मरियम थ्रेसिया को संत की उपाधि औपचारिक तौर पर देंगे. केरल में सामाजिक उत्थान के कामों के लिए जीवन समर्पित करने वाली सिस्टर मरियम को क्यों मदर टेरेसा की तरह माना जाता है और कौन थीं सिस्टर मरियम? इन सवालों के जवाब में एक दिलचस्प कहानी जानें.

पढ़ें : गांधी परिवार के कितने खास रहे वोरा?

संत की उपाधि देने की घोषणा से पहले 1999 में सिस्टर मरियम को सम्माननीय एवं पूज्यनीय घोषित किया गया था और साल 2000 में उन्हें धन्य आत्मा भी कहा गया था. ये दोनों ही घोषणाएं पोप जॉन पॉल द्वितीय ने की थीं. केरल में जन्मीं सिस्टर मरियम को मृत्योपरांत संत घोषित किया जाएगा और यही एक बात है जो उन्हें मदर टेरेसा से अलग करती है. मदर टेरेसा के साथ उनमें कई समानताएं भी रहीं.

गरीबों के लिए दयाभाव

केरल के धार्मिक लोग सिस्टर मरियम को उनके सामाजिक कामों के लिए याद करते हैं और बताते हैं कि वो गरीब या दीन हीन तबके के लिए बेहद संवेदनशील थीं. इस दयाभाव के कारण उनकी तुलना मदर टेरेसा के साथ अक्सर की जाती है. 26 अप्रैल 1876 को केरल के त्रिशूर जिले में जन्मीं सिस्टर मरियम 50 साल की उम्र में 8 जून 1926 को दुनिया को छोड़ गई थीं लेकिन उनके किए काम आज भी याद किए जाते हैं और उनकी बनाई संस्था आज भी चल रही है.

ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी

सिस्टर मरियम के बारे में बताया जाता है कि वो पूरा दिन ध्यान और प्रार्थना में बिताने के साथ ही, चर्च की बलिवेदी की सफाई और सजावट में बिताया करती थीं. इसके साथ ही वो जीवन के अंतिम दिन तक समाज के हर तबके के गरीबों और बीमारों की सेवा भी करती रहीं. बिशप जोसेफ के मार्गदर्शन में उन्होंने ईसाई धर्म के जादू टोने भी सीखे थे और काफी समय तक उन्होंने इसका प्रयोग भी किया.
Loading...

kerala nun, kerala church, saint mother teressa, kerala women saints, indian women saints, केरल नन, केरल चर्च, संत मदर टेरेसा, केरल की महिला संत, भारत की महिला संत
केरल में संत की स​माधि पर श्रद्धांजलि देते श्रद्धालु.


लड़कियों की शिक्षा के लिए समर्पण
सिस्टर मरियम ने होली फैमिली की एक धर्मसभा की स्थापना की थी. वेटिकन के एक दस्तावेज़ में उल्लेख है कि इस सभा के तत्वावधान में उन्होंने स्कूल, हॉस्टल, अध्ययन कक्ष, अनाथालय और कॉन्वेंट बनवाए और संचालित किए. चर्च के दस्तावेज़ कहते हैं कि लड़कियों की शिक्षा के लिए उनका विचार था कि इसी कर्म से उदारीकरण का शास्त्र बनाया जा सकता था.

कई नौजवान लड़कियां उनकी सादगी, दयाभाव और पवित्रता को देखकर आकर्षित होती थीं. सिस्टर मरियम के दिवंगत होने के समय तक उनकी स्थापित की गई संस्था में 55 युवतियां सिस्टर बन चुकी थीं. साथ ही, 30 हॉस्टलर और 10 अनाथों की देखभाल का ज़िम्मा तब तक उनका था. 1914 में सिस्टर मरियम की स्थापित संस्था में अब 2 हज़ार से ज़्यादा नन और 200 नवदीक्षित हैं. ये संस्था अब भी स्कूलों, अस्पतालों, नर्सिंग स्कूलों, हॉस्टलों, मानसिक रोगियों के लिए देखरेख कक्षों, सामाजिक केंद्रों और होमियोपैथिक क्लीनिकों का संचालन कर रही है.

जीवन एक तपस्या था
कहा जाता है कि सिस्टर मरियम की जीवन पवित्रता, प्रार्थना और उपवास के इर्द गिर्द ही बीता. 10 साल की उम्र में उनके माता पिता उनकी शादी करना चाहते थे लेकिन उनके जीवन में एक दिव्य ज्ञान था इसलिए वो घर के बगीचे में इसलिए सोया करती थीं क्योंकि उनका मानना था कि 'जब जीसस सूली पर टंगे हुए हैं, तो मैं आराम से कैसे सो सकती हूं'. उन्होंने 12 साल की उम्र में अपने परिवार को छोड़कर अपना जीवन दुखियों की सेवा के लिए समर्पित करने का निश्चय कर लिया था. 1909 में वो बिशप बन चुकी थीं.

ये भी पढ़ें:

कहीं बाढ़, कहीं सूखा... जानें क्यों देश में जुदा जुदा है मौसम का मिज़ाज

गांधी परिवार के कितने खास रहे वोरा और क्यों बनाए जा सकते हैं कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष?

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 3, 2019, 7:18 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...