क्या वियतनाम के हैकर्स ने कोरोना की जानकारी के लिए चीन पर किया साइबर हमला?

पुलिस ने साइबर तकनीक का प्रयोग कर सूचनाओं का संकलन करने के बाद आरोपी करण सिंह और सिमरन को गिरफ्तार कर लिया. (सांकेतिक फोटो)
पुलिस ने साइबर तकनीक का प्रयोग कर सूचनाओं का संकलन करने के बाद आरोपी करण सिंह और सिमरन को गिरफ्तार कर लिया. (सांकेतिक फोटो)

एक साइबर सिक्योरिटी फर्म FireEye ने दावा किया कि जनवरी से लेकर अप्रैल तक वियतनाम के हैकर्स ने चीन की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की.

  • Share this:
कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ाई को लेकर बीते दिनों में वियतनाम (Vietnam) की काफी तारीफ हुई है. वहां उठाए गए सख्त और समझदारी भरे कदमों ने देश में कोरोना वायरस को फैलने ही नहीं दिया. लेकिन अब उस पर साइबर अटैक से संबंधित गंभीर आरोप लग रहे हैं.

दरअसल बीते 22 अप्रैल को एक साइबर सिक्योरिटी FireEye फर्म ने दावा किया कि जनवरी से लेकर अप्रैल तक वियतनाम के हैकर्स ने चीन की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की. इस अटैक का कोडनेम APT32 बताया गया. इन हैकर्स का उद्देश्य कोरोना वायरस से संबंधित जानकारियां हासिल करना था.

इन हैकर्स के निशाने पर चीन का इमरजेंसी मैनेजमेंट मंत्रालय और वुहान मुनिसिपल कॉरपोरेशन था. लेकिन इस आरोप के ठीक एक दिन बाद वियतनाम के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ngo Toan Thang ने कहा कि ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं है. वियतनाम ने अपने यहां संस्थानों या किसी व्यक्ति पर साइबर अटैक पर बिल्कुल पाबंदी रखी है.



पीटीए ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान फ्रॉड करने वालों से सावधान रहने की चेतावनी जारी की है.
क्या है APT32
द डिप्लोमैट मैगजीन में प्रकाशित एक स्टोरी के मुताबिक APT32 का जिक्र साइबर अटैक को लेकर 2012 में पहली बार सामने आया था. तब भी इसका हमला चीन पर ही हुआ था. APT32 को OceanLotus Group या OceanBuffalo के नाम से भी जाना जाता है. साल 2016 में भी एक ग्लोबल कॉरपोरेशन पर तकरीबन साल भर तक लगातार इस ग्रुप की तरफ से साइबर अटैक किए गए थे.

तब Cybereason नाम की साइबर इंटेलिजेंस फर्म ने इसकी जांच की तो पता चला कि ये तो OceanLotus Group ही है. जब Cybereason की तरफ से इसे ब्लॉक करने की कोशिश की गई तो मालूम हुआ कि इसने तो पहले ही क्लाइंट्स के कंप्यूटर में ऐसा टूल बना रखा है जिससे दोबारा एंट्री की जा सकती है.

इसी तरह साल 2016 में FireEye ने कुछ साइबर अटैक मामलों की जांच की तो अंदेशे मिले कि ये OceanLotus Group वियतनाम सरकार के हितों के लिए काम करता दिखता है.

FireEye ने रिसर्च के दौरान पाया कि इस ग्रुप के भीतर बड़े स्तर पर साइबर अटैक करने और डेटा हासिल करने की क्षमता है. FireEye के डायरेक्टर Nick Carr का कहना है कि 2017 में इस ग्रुप पर की गई लंबी रिसर्च से पता चला कि इसने तीन सालों तक विदेशी संस्थाओं पर वियतनाम के हितों में हमले किए. इनका उद्देश्य मैन्यफैक्चरिंग, कंज्यूमर प्रोडक्ट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की अहम जानकारियां निकालना था.

2018 में भी साइबर एनालिस्ट कह चुके हैं इस ग्रुप ने वियतनाम के मैन्यूफैक्चरिंग गोल को पूरा करने के लिए कई साइबर हमले कर महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं.



कोरोना की जानकारी क्यों हासिल करनी चाही
कोरोना महामारी का सबसे पहले प्रभाव चीन के वुहान शहर पर पड़ा था. जनवरी से मार्च के आखिरी तक यहां पर कोरोना का भीषण प्रभाव था. साइबर अटैक भी इसी दौरान किए गए. इसकी कोरोना को काबू में करने के लिए जरूरी जानकारियां हासिल करना बताया जा रहा है.  चीन का इमजेंसी मैनेजमेंट मंत्रालय और वुहान का मुनिसिपल कॉरपोरेशन दोनों ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे.

गौरतलब है कि U.S. National Center for Medical Intelligence (NCMI) ने एक रिपोर्ट दी थी कि चीन के वुहान से निकली इस महामारी का स्वरूप बिगड़ा तो ये इस क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों में भी फैल सकती है.

माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद वियतनाम की तरफ से कोविड -19 की जानकारी हासिल करने के लिए कई आधिकारिक प्रयास भी किए गए. लेकिन चीन इसे लेकर जानकारियां नहीं दे रहा था. जनवरी तक चीन की तरफ कोरोना पर कोई जानकारी न दिए जाने के बाद संभव है कि ताइवान की तरफ से इस तरह के साइबर हमले के निर्देश दिए गए हों. हालांकि ताइवान के नेताओं ने इसे कोरी बकवास करार दिया है. लेकिन APT32 का इतिहास संदेहों को जन्म भी दे रहा है.
ये भी पढ़ें:

25 तलवारबाज और 5 घुड़सवार लेकर मुगलों के खिलाफ खड़ा हो गया था युवा छत्रसाल, बनाया बुंदेला साम्राज्य

देश में जून के आखिर में पीक पर होगा कोरोना - स्टडी

जो एक बार कोरोनाग्रस्त हो चुका, क्या वाकई उसे दोबारा नहीं हो सकता संक्रमण?

हर्ड इम्यूनिटी पर ​नई रिसर्च : कोविड 19 थमने में दो साल तो लगेंग
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज