क्या आप जानते हैं, दुनिया में कितने देशों में नहीं मनाया जाता क्रिसमस?

प्रतीकात्मक तस्वीर

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भारत समेत कुछ देशों में Covid-19 के चलते क्रिसमस धूमधाम से न मनाने की अपील है. लेकिन 40 से ज़्यादा देश हैं, जहां क्रिसमस की परंपरा ही नहीं है. कई जगह तो सज़ा मिलती है. जानिए किन देशों में क्रिसमस मनाना या तो मना है या जोखिम की बात.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 2:42 PM IST
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एक रिसर्च की मानें तो 2010 की जनगणना को ध्यान में रखते हुए दुनिया का सबसे ज़्यादा फैला हुआ धर्म ईसाईयत (Christianity Biggest Religion) है. दुनिया की तकरीबन 31 फीसदी आबादी यानी करीब 7 अरब में से 2.2 अरब लोग ईसाई हैं. इसका मतलब साफ है कि करीब 70 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो ईसाई नहीं हैं और धार्मिक तौर पर क्रिसमस नहीं मनाते (No Christmas Celebration) हैं. अब अगर आबादी के अलावा देशों के हिसाब से बात की जाए तो दुनिया के करीब 200 देशों में से 40 से ज़्यादा ऐसे देश हैं, जहां क्रिसमस कोई खास त्योहार (No Observance of Christmas) नहीं है.

गैर ईसाई देशों में करीब 43 ऐसे हैं, जहां 25 दिसंबर एक आम तारीख है. यानी यहां इस दिन सार्वजनिक अवकाश नहीं होता. लेकिन, इनमें से आधे से ज़्यादा देश ऐसे भी हैं, जहां किसी न किसी तौर पर क्रिसमस मनाया जाता है. यानी क्रिसमस वाली सजावट, तोहफे या धूमधाम किसी हिस्से या किसी तौर पर दिख जाती है. लेकिन करीब 18 देश ऐसे हैं, जहां के लोग क्रिसमस किसी तरह नहीं मनाते. पहले इन्हीं 18 देशों को जानते हैं.

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क्रिसमस मनाया तो सज़ा!
अफगानिस्तान में क्रिसमस मनाना जोखिम से कम नहीं है. चूंकि यहां 1990 के दशक से तालिबान की समानांतर हुकूमत है और ईसाई देशों के साथ यहां एक संघर्ष लगातार बना रहा है इसलिए अगर इस इस्लामी देश में कोई क्रिसमस मनाता है तो उसे सज़ा के तौर पर अत्याचार सहने का खतरा उठाना होता है. इसी तरह, कई इस्लामी देशों में क्रिसमस नहीं मनाया जाता है.

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अफगानिस्तान में क्रिसमस या कोई ईसाई त्यौहार मनाना खतरे से खाली नहीं है.


साल 1962 में फ्रांस से आज़ादी मिलने के बाद से मुस्लिम बहुल देश अल्जीरिया में औपचारिक तौर पर क्रिसमस मनाने की कोई पंरपरा नहीं रही. तेल के लिए मशहूर इस्लामी देश ब्रूनेई में सार्वजनिक तौर पर क्रिसमस न मनाने का कानून है और कानून तोड़ने की सज़ा पांच साल तक जेल या 20,000 डॉलर जुर्माना या दोनों है. यहां गैर मुस्लिम निजी तौर पर क्रिसमस मना सकते हैं.



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ईसाईयत के खिलाफ स्टैंड रखने वाले समुदी देश कोमोरोस में 98% आबादी सुन्नी मुस्लिमों की है. यहां ईसाई धर्म की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं और ईसाइयों पर अत्याचार होते हैं.

ये मुस्लिम देश भी नहीं मनाते क्रिसमस

पाकिस्तान में 25 दिसंबर सार्वजनिक अवकाश है, लेकिन देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती के रूप में. यहां क्रिसमस मनाने वाली बहुत छोटी सी आबादी खतरे में ही रहती है. पश्चिमी सहारा में स्थित सहरावी अरब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक में क्रिसमस जैसा कोई इवेंट नहीं होता, वहीं सऊदी अरब में दशकों से क्रिसमस के नाम पर कोई भी परंपरा निभाना प्रतिबंधित है.

साल 2009 में शरीआ कानून अपनाने वाले सोमालिया ने 2015 में क्रिसमस मनाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था. वहीं, मुस्लिम देश लीबिया में क्रिसमस से एक दिन पहले 24 दिसंबर को स्वाधीनता दिवस मनाया जाता है. युद्धग्रस्त यमन में भी कई दशकों से क्रिसमस नहीं मनाया जा रहा है.

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सऊदी अरब में क्रिसमस मनाने पर कुछ प्रतिबंध हैं.


इन देशों में इसलिए नहीं मनता क्रिसमस...

भूटान में ईसाइयों की आबादी करीब 10,000 है यानी देश की करीब 1 प्रतिशत, लेकिन बौद्ध धर्म वाले इस देश के कैलेंडर में क्रिसमस कोई त्यौहार नहीं है. वहीं, बौद्ध आबादी वाले मंगोलिया में क्रिसमस नहीं मनाया जाता, हालांकि यहां कुछ ईसाई आबादी ज़रूर है. वहीं थोड़ी ईसाई आबादी होने के दावे किए जाते रहे, लेकिन मॉरिटैनिया ने अपनी जनगणना के आधार पर 100 फीसदी आबादी का मुस्लिम होना बताया.

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ज़्यादातर सेक्युलर देश की छवि रखने वाले ताजिकिस्तान में क्रिसमस ट्री और तोहफे वगैरह को बैन किया गया. हालांकि ट्यूनीशिया में बैन नहीं है लेकिन क्रिसमस कोई छुट्टी भी नहीं है और एक आम दिन है. उत्सव भी कोई खास नहीं होता. उज़बेकिस्तान में परंपरागत और दकियानूसी ईसाइयों की आबादी करीब 10 फीसदी है, फिर भी यहां क्रिसमस नहीं मनाया जाता. लेकिन यहां नववर्ष के उत्सव में क्रिसमस मनाने की झलक दिखती है.

और कम्युनिस्टों की दुनिया में...

चीन में तो क्रिसमस सामान्य वर्किंग डे है. चीन एक समय में नास्तिक देश रहा इसलिए क्रिसमस यहां पूरी तरह प्रतिबंधित रहा है. इसी तरह, कम्युनिस्ट होने का दावा करने वाले, लेकिन आधिपत्यवादी तानाशाही के लिए चर्चित उत्तर कोरिया में क्रिसमस पूरी तरह से नियम कानून के खिलाफ है.

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गैर मुस्लिम देश भूटान में ​क्रिसमस मनाने की परंपरा नहीं है.


कुल मिलाकर ये है किस्सा

इन 18 देशों के साथ ही अब अगर उन तमाम देशों की बात करें, जहां क्रिसमस सार्वजनिक अवकाश नहीं है या कायदे से मनाया नहीं जाता या फिर परंपरागत/सार्वजनिक/औपचारिक तौर पर नहीं सेलिब्रेट होता, तो महाद्वीपों के हिसाब से यह लिस्ट आपको याद रखने में आसान रहेगी.

अफ्रीका में अल्जीरिया, चाड, कोंगो, मिस्र, एरिट्रिया, लीबिया, माली, मॉरिटैनिया, मोरक्को, सेनेगल, सोमालिया, सूडान और ट्यूनीशिया; एशिया में अज़रबैजान, बहरीन, भूटान, कंबोडिया, चीन, जापान, कज़ाकस्तान, कुवैत, लाओस, मंगोलिया, नेपाल, ओमान, ताजिकिस्तान, थाईलैंड, मालदीव, वियतनाम, उत्तर कोरिया; और मध्य पूर्व के देशों में अफगानिस्तान, ईरान, इज़रायल, कतर, सउदी अरब, तुर्कमेनिस्तान, तुर्की, यूएई, उज़बेकिस्तान और यमन... इन सभी देशों में आप क्रिसमस मनाने में या तो खुद को असहज पाएंगे या फिर खतरे में.
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