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800 बच्चे पैदा करने के बाद रिटायर हुआ 100 साल का डिएगो, बचा ली अपनी प्रजाति

सौ साल के डिएगो ने करीब 800 कछुओं की पैदाइश में योगदान देकर अपनी प्रजाति बचाई है.  (फोटो AFP)

सौ साल के डिएगो ने करीब 800 कछुओं की पैदाइश में योगदान देकर अपनी प्रजाति बचाई है. (फोटो AFP)

डिएगो की प्रजाति के केवल कुछ जीव ही बचे थे और विलुप्त (Extinct) होने की कगार पर थे. लेकिन उसने अपनी प्रजाति (Species) की संख्या बढ़ाने में अहम योगदान दिया.

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नई दिल्ली: उसका काम था अपने जैसों की जनसंख्या बढ़ाना. जी हां यही काम था उसका और आज 60 साल बाद वह रिटायर हो गया. जी हां आपने ठीक समझा, हम किसी इंसान की बात नहीं कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं एक खास कछुए की. डिएगो (Diego) नाम का इस कछुए (Tortoise) ने अपनी प्रजाति (Species) को बचाने का अनोखा लेकिन बेमिसाल काम कर दिखाया है. आज डिएगो चर्चा में है क्यों वह अपने काम से रिटायर हो रहा है.

क्या काम है डिएगो का
दरअसल डिएगो एक बड़ा गालापागोस कछुआ हैजिसने अपनी प्रजाति को लुप्त होने से बचाया है और अब आधिकारिक तौर पर रिटायर हो रहा है. डिएगो की कामप्रवृति ही उसकी प्रजाति बचाने में काम आई है. इस काम के लिए डिएगो सहित 14 अन्य नर कछुए जो सांताक्रूज द्वीप में ब्रीडिंग के लिए रखे गए थे जिससे उनकी प्रजातियों के कछुओं में प्रजनन बढ़े और वे विलुप्त होने से बच सकें.  अब डिएगो सहित ये सभी कछुए अपनी घर एक्वाडोर के गालापागोस द्वीपों में एक एस्पानोला लौट जाएंगे.  वैसे अब डिएगो की उम्र भी 100 साल की हो चुकी है. कहा जा सकता है कि वो अब काफी वृद्ध हो चुका है.

कब शुरू हुआ था यह कार्यक्रम
कछुओं की जनसंख्या बढ़ाने वाला यह ब्रीडिंग कार्यक्रम साल 1960 में शुरू हुआ था. इसके बाद से अब तक 2000 से ज्यादा कछुए पैदा हो चुके हैं. आज सौ साल के डिएगो, एक अनुमान के मुताबिक इन 2000 से ज्यादा कछुओं में से 40 प्रतिशत के पिता हैं.

अहम अध्याय की समाप्ति
इक्वाडोर के पर्यावरण मंत्री पाओलो प्रोआनो आंद्रेद ने सोमवार को ट्वीट कर कहा, “हम एक अहम अध्याय समाप्त कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि डिएगो और उसके साथी दशकों बाद अपनी प्रजातिको बचाने के बाद अपने घर लौट रहे हैं और एस्पानोला ने उनका खुली बाहों से स्वागत किया.



इन कछुओं का रखा जाएगा क्वारेंटीन में
अभी इन कछुओं का कुछ समय के लिए क्वरेंटीन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद ही ये एस्पानोला द्वीप पर लौटेंगे. एस्पालोना द्वीपों का गालापागोस के सबसे पुराने निर्जन द्वीपों में से एक है. ऐसा करने से वहां उन बीजों का गलती से भी पहुंचने से रोका जा सकेगा जो उस द्वीप के नहीं हैं.

पहले केवल 14 कछुए ही बचे थे द्वीप में
पचास साल पहले एस्पानोला द्वीप में डिएगो की प्रजाति के केवल दो ही नर और 12 मादा जिंदा बचे थे. डिएगो की प्रजाति को बचाने के लिए उसे कैलीफोर्निया के सैन डिएगो चिड़ियाघर में लाया गया था जिससे उसे प्रजनन (ब्रीडिंग) कार्यक्रम में शामिल किया जा सके.

एक वैज्ञानिक अभियान के तहत निकाला गया था इन्हें
गालापागोस नेशनल पार्क सर्विस को विश्वास है कि डिएगो को अपने एस्पानोला द्वीप से 20वीं सदी की शुरुआत में एक वैज्ञानिक अभियान के तहत निकाला गया था. कछुए आम तौर पर 80 किलो के होते हैं उनकी लंबाई 90 सेमी होती है और वे 1.5 मीटर ऊंचे होते हैं.





विशेषज्ञों का मानना है कि डिएगो की सफलता उसका व्यक्तित्व है. अपनी संसर्ग की आदतों में वह काफी उग्र, सक्रिय और शायद इसी लिए उसे इतनी तवज्जो मिली. लेकिन डिएगो अपने समूह में सबसे सफल नर कछुआ नहीं था. उससे आगे E5 कछुआ रहा जिसके बारे में माना जा रहा है कि बाकी 60 प्रतिशत जनसंख्या वृद्धि में उसी का योगदान था. इस समूह में एक तीसरा कछुआ भी था  जिसकी इस कार्यक्रम में कोई भूमिका नहीं हो सकी.

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