RBI ने IDBI को सरकारी से बनाया प्राइवेट, जानें सरकारी और प्राइवेट बैंक में अंतर

सरकारी बैंकों में 50% से ज्यादा शेयर सरकार के होते हैं. प्राइवेट बैंकों के शेयर्स में 50% से ज्यादा हिस्सा प्राइवेट शेयर होल्डर्स का होता है.

News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 6:47 PM IST
RBI ने IDBI को सरकारी से बनाया प्राइवेट, जानें सरकारी और प्राइवेट बैंक में अंतर
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Updated: March 15, 2019, 6:47 PM IST
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से जारी नए सर्कुलर में आईडीबीआई बैंक (IDBI) की कैटेगिरी बदल दी गई है. अब वह सरकारी नहीं, ब्लकि प्राइवेट बैंक हो गया है. सर्कुलर में कहा गया है, आईडीबीआई में मालिकाना हक सरकार की जगह एलआईसी के हाथों जाने के बाद बैंक अब निजी क्षेत्र का उपक्रम हो गया है. जानें सरकारी और प्राइवेट बैंक में क्या अंतर होता है.

सरकारी (पब्लिक) और प्राइवेट बैंक में फर्क

सरकारी बैंक की परिभाषा
नियमों के मुताबिक, जिस बैंक के 50% से ज्यादा शेयर सरकार के होते हैं. उसे सरकारी बैंक घोषित किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए आरबीआई और अन्य रेग्युलेटर से मंजूरी लेनी होती है.

प्राइवेट बैंक में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी सरकार के पास नहीं होकर बल्कि किसी संस्था या फिर कंपनी के पास होती है. इन शेयर्स का मालिक व्यक्तिगत भी होता है और कॉर्पोरेशन भी होते हैं.



बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को दो श्रेणियों में बांटा गया है.
1. राष्ट्रीयकृत बैंक
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2. स्टेट बैंक और उसके सहयोगी.
राष्ट्रीयकृत बैंकों में बैंकिंग इकाई और कामकाज पर सरकारी नियंत्रण होता है.

2 ब्याज दर
-सरकारी और प्राइवेट बैंक की तरफ से बैंक में जमा पैसे पर दिए जाने वाले ब्याज की दर लगभग बराबर होती है. हालांकि नए बैंक जैसे बंधन बैंक, एयरटेल बैंक बाकी बैंकों की तुलना में मामूली बेहतर ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं.

-लोन के मामले में सरकारी बैंक की ब्याज दरें, प्राइवेट की तुलना में थोड़ी कम हैं. जैसे कि SBI ने महिला ग्राहकों के लिए कम ब्याज दरों में होम लोन का ऑफर दिया है. जिसमें 30 लाख तक के लोन पर 8.35% की ब्याद दर है.

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3 फीस और सर्विस
-प्राइवेट बैंकों के लिए कहा जाता है कि वे बेहतर सेवा देते हैं, लेकिन वे प्रदान की गई अतिरिक्त सेवाओं के लिए चार्ज भी करते हैं.

- सरकारी बैंकों की फीस और चार्ज प्राइवेट की तुलना में कम होती है. बहुत सारे प्राइवेट बैंक अपनी सेवाओं का ऑफर देते रहते हैं.

4 कस्टमर बेस
-सरकारी बैंकों में ज्यादातर खाते सरकारी कर्मचारियों के वेतन, फिक्स डिपोजिट्स और लॉकर वगेरह के लिए खोले जाते हैं. प्राइवेट बैंकों की तुलना में उनका कस्टमर बेस बड़ा ज्यादा होता है.

-भारत में ज्यादातर प्राइवेट बैंक कंपनी इंप्लॉईज को टारगेट करते हैं. जिसमें वे उनका सैलरी अकाउंट, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग का हिसाब-किताब रखते हैं.

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5 जॉब सिक्योरिटी और बाकी फायदे
सरकारी क्षेत्र के बैंक कम अवसर प्रदान करते हैं, लेकिन नौकरी के नज़रिए से यहां काफी संभावनाएं होती हैं. जैसे कि यहां जॉब सिक्योरिटी, प्राइवेट की तुलना में बेहतर है.

- जॉब सिक्योरिटी में रिटायरमेंट के बाद की सुविधाएं भी शामिल होती हैं. जिसमें पेंशन के फायदे भी शामिल है.

- प्राइवेट बैंक भी अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद सुविधाएं देते हैं. उनकी सुविधाओं में पेंशन की जगह ग्रेच्युटी शामिल होती है.

बैंकों की संख्या की बात करें तो सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक हैं. प्राइवेट क्षेत्र के बैंकों की संख्या 22 है.

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सरकारी से क्यों प्राइवेट हुआ IDBI बैंक
आईडीबीआई बैंक में LIC का मालिकाना हक है. भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम से IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए प्रस्ताव मांगा है. एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में नियंत्रक हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था.

जून 2018 में बीमा नियामक ने एलआईसी को कर्ज के बोझ से दबे आईडीबीआई बैंक में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी थी. एलआईसी ने इस अधिग्रहण के तहत 28 दिसंबर को आईडीबीआई बैंक में 14,500 करोड़ रुपये डाले थे. उसके बाद 21 जनवरी को उसने बैंक में 5,030 करोड़ रुपये और डाले.

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