लाइव टीवी

क्या होता है कोरोना का Mild और High संक्रमण

News18Hindi
Updated: March 25, 2020, 10:23 PM IST
क्या होता है कोरोना का Mild और High संक्रमण
कोरोना वायरस की टेस्टिंग के दौरान मरीजों को दो आधार पर बांटा जाता है

कोरोना वायरस की टेस्टिंग के दौरान शरीर में संक्रमण की स्थिति को दो भागों में बांटा गया है. ये होते हैं माइल्ड और हाई लोड इन्फेक्शन. आइए जानते हैं कि इन दोमों में क्या अंतर होता है

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2020, 10:23 PM IST
  • Share this:
गायक कनिका कपूर का कोरोना टेस्ट फिर से पॉजिटिव आया है. यानी उन्हें अभी कोरोना इन्फेक्शन बना हुआ है. कनिका कपूर की रिपोर्ट में जिक्र आया कि उन्हें हाई लोड इन्फेक्शन है. इससे पहले भी खबरें आई थीं कि लोगों के कोरोना इन्फेक्शन हाई लोड पाए गए. जैसे कश्मीर में दो महिलाओं को हुए कोरोना संक्रमण को हाई लोड की श्रेणी में रखा गया था. आखिर ये हाई लोड इन्फेक्शन क्या है? क्या कोरोना का संक्रमण भी कई प्रकार का होता है?

क्या होता है अंतर
लैंसेट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के नानचैंग यूनिवर्सिटी से जुड़े अस्पताल में 21 जनवरी से 6 फरवरी के बीच 76 लोगों को कोरोना इन्फेक्शन की वजह से भर्ती कराया गया था. इन सभी की जांच की गई और इनमें मिले लक्षणों की तीव्रता के आधार पर मरीजों को हाई लोड या फिर गंभीर इन्फेक्शन की श्रेणी में रखा गया. यह लक्षण कुछ इस तरह से हैं-

1-सांस लेने में तकलीफ (एक मिनट में 30 से कम बार सांस लेना) - ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे फेफडों में लिक्विंड यानी कफ भर जाता है. हमारे फेफड़ों को दूसरे अंगों को ऑक्सीजन सप्लाई करने में दिक्कत आने लगती है... ये दिक्कतें उम्रदराज लोगों में सबसे ज्यादा मिलीं.



2-शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का असंतुलन.

3-श्वसन तंत्र काम करना ठप कर देता है. यानी सांस लेने के लिए कृत्रिम उपकरण (वेंटिलेटर) की जरूरत पड़ती है.



सभी संक्रमितों में से 46 को ऊपर लिखे लक्षण मिले तो लेकिन बहुत कम मात्रा में. इस वजह से उन्हें माइल्ड केस में रखा गया. 30 संक्रमितों में ऊपर दिए गए लक्षणों में एक न एक लक्षण गंभीर रूप से मिला. यही वजह रही जिसकी वजह इन्हें हाई वायरल लोड संक्रमण की श्रेणी में रखा गया. हाई वायरल लोड वाले मरीजों में संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इमें यह सभी लक्षण माइल्ड केसेस के मुकाबले 60 गुना ज्यादा थे.

माइल्ड इन्फेक्शन और हाई लोड इन्फेक्शन में एक और अंतर है. माइल्ड इन्फेक्शन में शुरुआती 10-12 दिनों के बाद रिकवरी होने लगती है जबकि हाईलोड इन्फेक्शन में 12 दिनों के बाद लक्षण और उभरने लगते हैं. 90 प्रतिशत मामलों में माइल्ड केस 10-12 दिनों के बाद ही निगेटिव आने शुरू हो जाते हैं जबकि दूसरी तरफ हाई लोड केस में उसके बाद भी लगातार पॉजिटिव आते रहते हैं.

सार्स से समानता
कोविड 19 के लक्षणों को सार्स के करीब पाया गया है. सार्स की टेस्टिंग के दौरान भी संक्रमितों को माइल्ड और हाईलोड केसों में बांटा गया था. सार्स का संक्रमण भी इंसानी श्वसन तंत्र पर गंभीर हमला करता था. यही वजह है कि सार्स पर की गई सभी स्टडी को कोविड 19 पर शोध का भी आधार बनाया जा रहा है.

ज्यादातर मामले माइल्ड इन्फेक्शन के
चीन के वुहान से मिले आंकड़ों के मुताबिक सभी संक्रमित लोगों में से 80 प्रतिशत को मामूली बीमारी हुई थी. 15 प्रतिशत लोगों को थोड़ी-बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा था जैसे खांसी, कफ, बुखार और सांस लेने में तकलीफ. सिर्फ 5 प्रतिशत ही लोग ऐसे थे जिन्हें गंभीर इलाज की आवश्यकता पड़ी.

सामान्य फ्लू से इतर कोरोना वायरस के लक्षणों की शुरुआत थकान, दर्द और गले में खराश या दर्द के साथ शुरू होती है. इसके लक्षण दिखने में 2 से 14 दिनों का वक्त लगता है. औसतन ये लक्षण पांच दिन में दिखाई देते हैं. इसके बाद रिकवरी शुरू हो जाती है. लेकिन रिकवरी पहले स्वस्थ लोगों की ही शुरू होती है. जिन लोगों में पहले से कोई गंभीर बीमारी है या फिर वो उम्रदराज हैं तो फिर इसके लक्षण और गहराते जाते हैं.



क्या है वर्तमान स्थिति
वर्तमान में दुनियाभर में 445,815 कंफर्म कोरोना के केस हैं. इनमें से 300,045 केस यानी तकरीबन 96 प्रतिशत माइल्ड केस हैं. जबकि गंभीर केस की संख्या 13,557 यानी चार प्रतिशत ही है. अभई तक कुल 1,12,017 लोग इस बीमारी को परास्त कर ठीक हो चुके हैं.
ये भी पढ़ें:-

Coronavirus का खौफ: वेंटिलेटर खरीद कर घर में रख रहे हैं रूस के रईस लोग
धर्मस्थलों के पास अकूत संपत्ति, क्या कोरोना से लड़ाई में सरकार लेगी उनसे धन
देश के 30 राज्यों में लॉकडाउन, जानिए जनता को इस दौरान क्या करने की आजादी?
इटली और अमेरिका के हालात खतरनाक, महीनेभर में आंकड़ा दहाई से हजारों में

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 25, 2020, 9:56 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर