इसरो के PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल में क्या अंतर?

इसरो के PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल में क्या अंतर?
इसरो PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल के जरिए दुनिया के कई मुल्कों की सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि PSLV और GSLV में क्या अंतर होता है?

इसरो PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल के जरिए दुनिया के कई मुल्कों की सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि PSLV और GSLV में क्या अंतर होता है?

  • Last Updated: November 15, 2018, 11:37 AM IST
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16 सितंबर को इसरो ने पीएसएलवी के जरिए दो ब्रिटिश सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया. ऐसा इसरो ने पहली बार नहीं किया है. इसरो की कस्टमर लिस्ट में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जर्मनी, रिपब्लिक ऑफ कोरिया और सिंगापुर सहित कुल 28 मुल्क शामिल हैं.

अभी तक दूसरे मुल्कों की सैटेलाइट्स भेजने की बात करें तो इसरो कुल 239 सैटेलाइट्स सफलतापूर्वक भेज चुका है. इसरो इन सैटेलाइट्स को पीएसएलवी और जीएसएलवी के जरिए भेजता है. ये दोनों ही लॉन्च व्हीकल्स हैं, जो ऐसा करने में मदद करते हैं. जानिए दुनिया में नासा के बाद स्पेस रिसर्च में दूसरे नंबर पर आने वाले इसरो के ये दोनों लॉन्च व्हीकल PSLV और GSLV कितने जुदा हैं?





कितनी अलग PSLV और GSLV?
सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल पीएसएलवी और जीएसएलवी दोनों को ISRO ने विकसित किया है. पीएसलवी का पूरा नाम पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल और जीएसएलवी का पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है.

पीएसएलवी को धरती के ऑब्जरवेशन या रिमोट सेंसिंग सैटेलाइटों को धरती से 600 से 900 किमी की ऊंचाई पर स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है.

इसके जरिए 1750 किलोग्राम तक की सैटेलाइट स्थापित की जा सकती है. ये सैटेलाइट को समकालिक सूरज की सर्कुलर ध्रुवीय कक्षा (SSCPO) तक पहुंचाने में सक्षम है. SSCPO के अलावा पीएसएलवी का इस्तेमाल 1400 किग्रा वजन वाली सैटेलाइटों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाने का काम है.

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कितने स्टेजों में बंटा PSLV?
पीएसएलवी चार स्टेजों में बंटा हुआ रॉकेट है. इसकी पहली और तीसरी स्टेज में सॉलिड रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल हुआ है. जबकि दूसरी और चौथी स्टेज लिक्विड रॉकेट और इंजन से लैस है. पीएसएलवी में इनके अलावा स्ट्रैप्स का इस्तेमाल होता है, जो पहली स्टेज में रॉकेट को ऊंचाई तक ले जाने में ताकत देता है. पीएसएलवी को अलग-अलग वर्जन में विभाजित किया गया है. इनमें PSLV-CA, PSLV-G or PSLV-XL शामिल हैं.



क्या है GSLV?
इसरो ने जीएसएलवी को मुख्य तौर पर कम्युनिकेशन सैटेललाइट्स लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया है. इनमें वो सैटेलाइट शामिल हैं, जो जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) यानि 250x36000 किमी पर स्थापित की जाती है.

GTO के बाद सैटेलाइट्स को उसके फाइनल मुकाम तक पहुंचाया जाता है. इसमें मौजूद इंजन सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑर्बिट यानि GEO जो 36 हजार किमी ऊंचाई पर पहुंचाती है. अपनी जियो-सिंक्रोनस नेचर के चलते, सैटेलाइट अपनी ऑर्बिट में एक फिक्स पोजिशन में घूमती है. ये धरती से एक नियत स्थान पर दिखाई देती है.

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GSLV के कितने वर्जन?
इसरो ने जीएसएलवी को 2 वर्जन में विभाजित किया है. पहला वर्जन जीएसएलवी Mk-II है. ये 2500 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट GTO तक पहुंचाने में मदद करता है. ये तीन स्टेज पर आधारित लॉन्च व्हीकल है जिसके पहले स्टेज में सॉलिग रॉकेट मोटर, दूसरे स्टेज में लिक्विड फ्यूल और तीसरी स्टेज में क्रायोजेनिक इंजन मौजूद है.
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