जानिए 6 करोड़ साल पहले कैसे रहता था तोते जैसे बिना दांतों का डायनासोर

पहली बार डायनासोर (Dinosaur) की ऐसी प्रजाति (Species) मिली है जिसकी चोंच (Beak) तोते (Parrot) के जैसी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
पहली बार डायनासोर (Dinosaur) की ऐसी प्रजाति (Species) मिली है जिसकी चोंच (Beak) तोते (Parrot) के जैसी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

जीवाश्मविज्ञानियों (Palaeontologist) ने बिना दांत वाला तोते की चोंच वाले डायनासोर (Dinosaur) के करोड़ों साल पुराने जीवाश्म (Fossils) खोजे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 6:27 PM IST
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करोड़ों साल पहले रहने वाले डायनासोर (Dinosaur) जैसे जीव की कई तरह की प्रजातियों (Species)  के बारे में नई जानकारी मिलती रहती है. हाल ही में जीवाश्म विज्ञानियों (Palaentologists) को एक बिना दातों का, दो उंगलियों वाले ऐसे डायनासोर का जीवाश्म (Fossil) मिला है जो 6.8 करोड़ साल पहले तोते (Parrot) के जैसा था, लेकिन उसमें हालातों के मुताबिक ढलने की गजब की क्षमता थी.

कितना बड़ा होता था यह डायनासोर
पंखों वाले इस सर्वभक्षी डायनासोर की ओक्सोको अवार्सन नाम की प्रजाति के बहुत सारे हड्डी के ढांचे वैज्ञानिकों को मिले हैं. इस 2 मीटर लंबा डायनासोर का जीवाश्म मंगोलिया के गोबी रेगिस्तान में पाया है. इसे यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के शोधकर्ताओं ने खोजा है.

तोतों के जैसी चोंच
इस जीवाश्म का अध्ययन कर शोधकर्ताओं ने पाया कि इसके चोंच तो बड़ी थी, लेकिन इसके दांत नहीं हुआ करते थे. इसकी चोंच आज के तोतों की चोंच से मिलती जुलती है.  उसकी भुजाओं में केवल दो ही उंगलियां थी. जबकि उसके निकटतम प्रजाति के डायनोसोर में केवल तीन उंगलियां हुआ करती थीं. यह पहली बार है कि वैज्ञानिकों ने किसी ओविरेप्टर्स नाम के तीन उंगली के डायनासोर के परिवार में किसी प्रजाति की एक ऊंगली गायब देखी है.



क्या मतलब हुआ उंगली के कम हो जाने का
शोधकर्ताओं के बयान के मुताबिक एक उंगली का गायब होना इस बात का इशारा करता है कि इन डायनासोर ने अपनी लाइफस्टाइल और खाने की आदतें बदल दी होंगी. उन्होंने यह बदलाव अपनी संख्या को बढ़ाने और बदलते हालातों में ढलने के लिए किया होगा.

Dinosaur, Oviraptor fossil
आमतौर पर ओविरेप्टर्स (Oviraptors) की तीन उंगलियां (fingers) होती हैं, लेकिन इस जीवाश्म (Fossil) में दो ही पाई गईं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


एक साथ मिले कई जीवाश्म
शोधकर्ता ग्रेगरी फन्स्टन का मानना है कि उन्होंने जो हड्डियों के ढांचे मिले हैं वे एक साथ आराम कर रहे होंगे. इनका सभी का एक साथ पाया जाना यह बताता कि ओक्सोको अवार्सन समूह में घूमा करते होंगे. यह शोद ग्रेगरी की अगुआई में ही किया गया जो एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता है.

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दो उंगलियों से मिलेंगे कई जवाब
फन्स्टन ने अपने बयान में कहा, “इससे भी अहम यह है कि इनकी दो उंगलियों ने हमें यह देखने के लिए प्रेरित किया कि ओविरेप्टर्स की हाथ और भुजाओं में समय के साथ बदलाव कैसे आया होगा. अब तक इनका अध्ययन नहीं किया गया था. इससे कुछ अप्रत्याशित बातों का पता चलता है जो इस पहेली की हल खोजने में अहम भूमिका निभाते हैं कि ओविरेप्टर्स डायनासोर के विलुप्त होने से पहले इतने व्यापक क्यों थे.

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वैज्ञानिकों को जीवाश्म (Fossil) के जरिए ही डायनासोर के बारे में जानकारियां मिलती हैं. . (प्रतीकात्मक तस्वीर)


दूसरे इलकों में फैले ये जीव
टीम ने पाया कि ओविरेप्टर्स की भुजाएं और हाथ तेजी से विकसित हुए और बदले, खास तौर पर जब वे उत्तरी अमेरिका और गोबी रेगिस्तान के इलाकों में आने लगे. यग अध्ययन हाल ही में रॉयल सोसइटी  ओपन साइंसेस में प्रकाशित हुआ है.

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ओविरेप्टर्स से संबंधित एक और खास खोज साल 2014 में हुई थी जब जीवाश्म विज्ञानियों ने ओविरेप्टर्स की एक प्रजाति का पता लगाकर उसे ‘नर्क से आने वाली’ मुर्गी कहा था. वह उत्तरी अमेरिका ओविरेप्टर्स की सबसे बड़ी प्रजाति थी.
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