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जमीन-आसमान ही नहीं, पानी में भी पाए जाते थे खतरनाक डायनासोर- शोध

वैज्ञानिकों को ऐसे डानासोर (Dinosaurs) के जीवाश्म (Fossils) मिले हैं जो पानी में भी आसानी से तैर सकते थे और उसमें शिकार किया करते थे.

वैज्ञानिकों को ऐसे डानासोर (Dinosaurs) के जीवाश्म (Fossils) मिले हैं जो पानी में भी आसानी से तैर सकते थे और उसमें शिकार किया करते थे.

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नई दिल्ली: डायनासोर (Dinosaurs) को दुनिया में अब तक का सबसे खतरनाक जीव माना जाता है. करोड़ों साल पहले ये पृथ्वी के धरती और आकाश दोनों पर राज किया करते थे. लेकिन ताजा शोध से पता चला है कि उनका खौफ जमीन आसामान ही नहीं बल्कि पानी में भी था.

पानी में भी पाए जाते थे डायनासोर
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ताजा शोध से पता चलता है कि डायनासोर अपने जमाने में पानी में भी पाए जाते थे. 14.5 करोड़ साल रहले से 6.6 करोड़ साल पहले तक ये खतरनाक जीव पानी में पाए जाते थे. हार्वर्ड के ऑर्गेनिज्मिक एंड इवोल्यूशनरी बायोलॉजी के प्रोफेसर स्टीफाइन पियर्स और जॉर्ज वी लॉदेर ने हाल ही में जीवाश्मों के प्रमाण और रोबोटिक मॉडल्स के आधार पर यह पता लगाया है.

बड़े मांसाहारी डायनासोर की प्रजाति थी यह
जीवाश्म प्रमाणों से पता चला है कि स्पिनोसॉरस एयजिपटिकस पानी में रहने वाला डायनासोर था. यह प्रजाति के सबसे बड़े मांसाहारी डायनासोर में से एक है. इसकी बहुत बड़ी फिन टेल और उसकी गुरुत्वाकर्षण का केंद्र उसे तैरने के लिए बहुत उपयुक्त बनाता था.

लचकदार फिन वाली पूंछ थी स्पिनोसॉरस की
इस अध्ययन में पाया गया कि डायनासोर की लंबी लचकदार फिन टेल (पूंछ) डायनासोर में बहुत अलग और खास है. इसकी वजह से डायनासोर उतनी ही आसानी से पानी में तैर सकते हैं जैसे सैलामेंडर या फिर मगरमच्छ तैर पाते हैं.

dinosaurs
डायनासोर की कई प्रजातियां बहुत ही खतरनाक मानी जाती हैं स्पिनोसॉरस उनमे शामिल है.


बहुत मुश्किल से मिले स्पिनोसॉरस के जीवाश्म
इस शोध की लेखिका पियर्स का कहना है कि नए जीवाश्म का मिलना उनके के लिए बहुत अहम है. क्योंकि डायनासोर के बहुत से जीवाश्म द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नष्ट कर दिए गए थे. अध्ययन के प्रमुख लेखक डेट्रॉइट यूनिवर्सिटी के जीवाश्म विज्ञानी निजार इब्राहिम डायनासोर प्रजाति के और जानने के लिए साल 2014 मोरक्कों में मिले अवशेषों के बारे में पता किया. उन्होंने साल 2018 में स्पिनोसॉरस के बहुत से अवेशेषों का उत्खनन करने में सफलता पाई.

पूंछ से उठे सवाल
इन अवशेषों में  एक मीटर लंबी रीढ़ मिली, जिसमें पूंछ भी शामिल है. इससे इस पूंछ के उद्देश्य पर भी सवाल उठे. इसमें सबसे अहम बात यही थी कि डायनासोर उस पूंछ का प्रयोग तैरने के लिए करते थे. पियर्स से इब्राहिम और उनकी टीम ने संपर्क किया. पियर्स भी पांच मीटर से लंबी पूंछ के बारे में जानने को उत्सुक थीं.

फिन जैसी संरचना ने खींचा ध्यान
पियर्स ने कहा कि इस प्रजाति में बहुत से ध्यान खींचने वाली बात थी जिनमें फिन जैसी संरचना शामिल थी. गौरतलब है कि फिन जलीय जीवों का वह हिस्सा है जो उनके पानी में तैरने की क्षमता को नियंत्रित करता है. यह फिन दूसरे डायनासोर में नहीं पाई जाती है. पियर्स ने बायोमेकैनिस्ट लॉदेर के साथ काम किया और डायनासोर की पूंछ का मॉडल बनाया.

स्पिनोसॉरस की पूंछ का मॉडल बनाकर देखा
जब शोधकर्ताओं ने स्पिनोसॉरस की पूंछ का मॉडल बनाकर देखा तो उन्होंने पाया कि स्पिनोसॉरस की तैरने में मददगार पूंछ अन्य डायनासोर के पूंछों के मुकाबले बहुत अलग थी. इससे पहले भी कुछ जीवाश्म विज्ञानियों का भी मानना था कि स्पिनोसॉरस तैर सकते हैं. लेकिन उस समय अन्य वैज्ञानिकों ने इसे महत्व नहीं दिया.

अब स्पिनोसॉरस का तैरना कल्पना नहीं
पियर्स का मानना है कि पहले कुछ लोगों ने यह सिद्ध करने की कोशिश की कि स्पिनोसॉरस तैर ही नहीं सकते, लेकिन अब फिन का मिलना कल्पना नहीं हैं. वहीं उनके गुरुत्वाकर्षण का केंद्र कि स्थिति भी उन्हें धरती पर रहने वाले जैसे डायनासोर होने के लिए उपयुक्त साबित नहीं करता.

ये दो प्रमाण और भी मिले
इसके अलावा दो और प्रमाण हैं जो यह साबित करते हैं कि स्पिनोसॉरस पानी के जीव हो सकते हैं.  इब्राहिम को दो जीवाश्म मिले थे, वे जलीय अवसाद (freshwater sediment) में पाए गए थे. दूसरी बात यह कि उस जीवाश्म के साथ ही जल मे पाए जाने वाले अन्य जीवों के जीवाश्म भी मिले थे जो उसी काल हैं.

किस गति से तैर सकते थे स्पिनोसॉरस
पियर्स के मुताबिक अब इस बहस का अंत हो जाना चाहिए कि क्या स्पिनोसॉरस पानी की जीव थे या नहीं. लॉडेर का कहना है यह प्रजाति अतिविशालकाय थी. पाया गया स्पिनोसॉरस का अवेशष छोटा था, फिर भी वह करीब 10 मीटर का था. लेकिन इस प्रजाति के जीवों की तैरने की गति ढाई मीटर प्रति सेकेंड थी.

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