डायनासोर ने तैरकर पार किया था महासागर, जानिए कैसे इस नतीजे पर पहुंचे वैज्ञानिक

इस शाकाहारी डायनासोर (Dinosaur) का जीवाश्म (Fossil) अफ्रीका (Africa) के मोरक्को में मिला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
इस शाकाहारी डायनासोर (Dinosaur) का जीवाश्म (Fossil) अफ्रीका (Africa) के मोरक्को में मिला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

अफ्रीका (Africa) में मिले डायनासोर (Dinosaur) के नए जीवाश्म (Fossil) ने वैज्ञानिकों को यह नतीजा निकालने पर मजबूर किया कि वह वहां तैर (Swimming) कर पहुंचा होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 12:54 PM IST
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vजीवाश्म (Fossils) और जीवाश्मविज्ञान (Palaeontology) कई बार चौंकाने वाली जानकारी देते हैं. केवल जीवाश्मों का अध्ययन कर उन्होंने डायनासोर (Dinosaurs) और उनके समय के संसार के बारे में काफी कुछ पता लगा लिया है. लेकिन क्या केवल किसी जानवर के एक जीवाश्म  का अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि उसने मरने से पहले कम से कम एक बार महासागर (Ocean) तैर (Swimming) कर पार किया होगा? हाल ही में हुआ शोध ऐसा ही कुछ कह रहा है. इसके मुताबिक अफ्रीका (Africa) में एक डायनोसोर का जीवाश्म मिला है जिसने तैर कर महासागर पार किया होगा.

तैरकर पहंचा होगा
अफ्रीका में जीवाश्मविज्ञानियों को डकबिल डायनासोर (duckbill dinosaur) का जीवाश्म मिलने से उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस प्रजाति के डायनासोर ने सैंकड़ों किलोमीटर का महासगार तैर कर पार किया होगा, जिससे यह अफ्रीका पहुंच सका होगा. शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके अलावा उस डायनासोर के अफ्रीका में पाए जाने की और कोई वजह नहीं हैं.

कौन सा डायनासोर है ये
यह डायनासोर एजनाबिया ओडिसेयस (Ajnabia odysseus) जो पौधे खाने वाले डकबिल डायनासोर परिवार का सदस्य है. इसका जीवाश्म मोरक्को की एक खान में मिला है. यह जीवाश्म करीब 6.6 करोड़ साल पुराना है जो क्रिटेशियस काल के अंत का समय था.  कई डकबिल डायनासोर 15 मीटर लंबे होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एजनाबिया तुलनात्मक तौर पर छोटा था और इसकी लंबाई केवल तीन मीटर थी.



तो अफ्रीका में कैसे
डकबिल डायनासोर उत्तरी अमेरिका में पाए जाते थे. बाद में वे दक्षिण अमेरिका, यूरोप और एशिया भी पहुंच गए. इसीलिए विशेषज्ञों को सबसे ज्यादा हैरानी इसी बात की थी कि यह डायनासोर अफ्रिका तक कैसे पहुंच गया. उस जमाने में अफ्रीका महाद्वीप और दक्षिण अमेरिका काफी पहले से अलग हो चुके थे, लेकिन हां उनके बीच की दूरी आज की तरह भी नहीं थी. फिर भी यह दूरी कम भी नहीं थी. उस समय अफ्रीका चारों ओर से गहरे समुद्र से घिरा हुआ था.

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तीन मीटर लंबा यह डायनासोर (Dinosaur) पूंछ (Tail) और अपने मजबूत पैरों की सहायता से महासागर तैर गया होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कुछ ज्यादा ही अनोखी बात
बाथ यूनिवर्सिटी के मिल्नर सेंटर फॉर एवॉल्यूशन के वरिष्ठ व्याख्याता और इस अध्ययन की अगुआई करने वाले निकोलस लॉन्गरिच ने इस जीवाश्म की खोजे के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि यह इस मामले में यह शायद संसार की आखिरी बात होगी जिसकी उम्मीद की जाए. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक लॉन्गरिच ने बयान में कहा, “यह बिलकुल ही अलग और चौंकाने वाली बात है. यह ऐसा जैसे स्कॉटलैंड में कंगारू का मिलना जब अफ्रीका पूरी तरह से समुद्र से अलग था तो ये डायासोर अफ्रीका कैसे पहुंचे.”

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उत्तरी अमेरिका का डायनासोर
एजनाबिया के जीवाश्म के दातों और जबड़े की हड्डियों का अध्ययन करने पर विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे कि ये लैम्ब्योसॉरिने उपपरिवार से है. विशेषज्ञों का कहना है कि लैम्ब्योसॉर उत्तरी अमेरिका में विकसित हुए थे, फिर जमीन से जुड़े एशिया में और यूरोप में बढ़े. अंत में ये अफ्रीका में पहुंचे जो चारों ओर से गहरे समुद्र से घिरा था.

कैसे तैरा होगा यह
क्रिटेशियस रिसर्च जर्नल में प्रकाशित इस शोध में शामिल विशेषज्ञों का मानना है कि डकबिल अपने विशाल पूंछ और शक्तिशाली पैरों की वजह से सैंकड़ों किलोमीटर के समुद्र को पार कर अफ्रीका महाद्वीप पहुंचे होंगे. या तो वे तैर कर, या फिर किसी बड़ी चीज के साथ बहकर आए होंगे.

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ऐसे डायनासोर (Dinosaur) के अफ्रीका (Africa) में पाए जाने की शोधकर्ताओं को बिलुकल उम्मीद नहीं थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


शेरलॉक होम्स का तर्क
लॉन्गरिच ने कहा, “शेरलॉक होम्स का कहना है की एक बार आप असंभवों को खारिज कर दें तो जो भी बचेगा, भले ही वह कितना विचित्र हो, सही ही होगा. अफ्रीका तक चलना असंभव है. ये डायानसोर कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट के काफी समय बाद विकसित हुए थे. और हमारे पास किसी पुल के होने के कोई भी प्रमाण नहीं हैं. जियोलॉजी कहती है कि अफ्रीका समुद्रों के द्वारा अलग थलग था. यदि यह सब सच है तो वहां तक पहुंचने का एक ही रास्ता है. वह है पानी के जरिए.

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अध्ययन पहले भी बता चुके हैं कई स्तनपायी जीव जैसे कि बंदर और कुतरने वाले जानवर लंबे और कठिन महासागरों को पार कर एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचे हैं. बाथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम जिसमें स्पेन, अमेरिका, फ्रांस और मोरक्को के शोधकर्ता शामिल हैं, का मानना है कि यह पहली बार है कि डायनासोर को महासागर पार करने की बात समाने आई है.
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