क्यों दिख रही है ऑस्ट्रेलियाई जहरीले पेड़ों में दर्दनिवारक दवा की उम्मीद

शोधकर्ता खास तरह के जहीरले पौधों (Poisionous) में दर्द (Pain) के अहसास पैदा करने वाले पदार्थों की कार्य प्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
शोधकर्ता खास तरह के जहीरले पौधों (Poisionous) में दर्द (Pain) के अहसास पैदा करने वाले पदार्थों की कार्य प्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

ऑस्ट्रेलिया (Australia) के कुछ शोधकर्ताओं (researchers) को लगता है कि वहां के कुछ पेड़ पौधों (Plants) के जहर में दर्दनिवारक गुण (Painkilling Qualities) छिपे हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 6:57 PM IST
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जब भी जहर (Poison) की बात की जाती है तो हमारे जहन में सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जानवरों का ख्याल आता है. इन प्राणियों का जहर भी जहर का इलाज भी होता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया (Australia) के शोधकर्ताओं को लगता है कि वे एक जहर से दर्दनिवारक (Painkiller) दवा का निर्माण कर सकते हैं और यह जहर किसी जानवर का नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया के ही एक जहरीले पेड़ का है.

कमी नहीं है जहरीले जीवों की ऑस्ट्रेलिया में
ऑस्ट्रेलिया वैसे तो अपने खतरनाक वन्यजीवन के लिए मशहूर है, जिसमें से कई जीव बहुत ही जहरीले हैं. इनमं सांप, मकड़ी, मधुमक्खी, कनखजूरा और चींटियां भी शामिल हैं.  जैलीफिश जैसी कुछ समुद्री मछलियां हैं जो कम जहरीली नहीं हैं. इसके अलावा इस महाद्वीप में जहरीले पेड़ों की भी कमी नहीं है जिनमें ऑस्ट्रेलियान स्टिंजिंग ट्री भी शामिल है जिसपर शोधकर्ताओं का ध्यान गया है.

क्या है इस पेड़ का नाम
इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम डेंड्रोक्नाइड एक्सेल्सा (Dendrocnide excelsa) है यह विशाल स्टिंजिंग पेड़ अपने जहर के ले बहुत मशूहर है. इसी तर से एक और खतरनाक पौधा गिम्पी-गिम्पी (Gympie-Gympie)  जिसे डेंड्रोक्नाइड मोरोआइड्स (Dendrocnide moroides) कहते हैं. ये पेड़-पौधे बहुत ही जहरीले माने जाते हैं और इंसान को लंबे समय का दर्द दे देते हैं.



दर्द का रिश्ता
कुछ शोधकर्ताओं का विश्वास है कि इन पेड़-पौधों मे दर्दनिवारकता के रहस्य छिपे हुए है. ब्रिसबेन में क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने गिम्पी गिम्पी से निकलने वाले जहर का परीक्षण किया. उन्होंने इन पौधों में एक नया जहरीला पदार्थ खोजा. इस जहरीले पदार्थ का नाम भी उन्होंने इसके पौधे के नाम परजिम्पीटाइड रखा. ये पौधे ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स इलाके के उत्तरी नदी इलाके में पाए जाते हैं. ये केप यॉर्क प्रायद्वीप के कोने में भी पाए जाते हैं.

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शोधकर्ता इस तरह के जहर (Poison) का त्वचा (Skin) पर हुए असर का अध्ययन कर दर्द (pain) की प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


और ये रोमदार चीज
इन पौधों की सतह पर एक सुई जैसे चीज निकली होती है जो पूरे पौधे के ढंकती सी दिखाई देती है. इन नुकीले बाल नुमा रोमों को ट्राइक्रोम कहा जाता है. ट्राइक्रोम को छूने से इंसानी त्वचा में बहुत ही देर तक दर्द रहता है.  यह केवल कुछ दिन ही नहीं बल्कि हफ्तों तक असर दिखा सकता है.

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यह बड़ी संभावना
न्यूज मेडिकल कि रिपोर्ट के अनुसार ट्राइकोम छोट न्यूरोट्रांसमीटर वाले अणु और जलन का अहसास दिलाने वाले पदार्थ जुड़े हो सकते हैं. लेकिन यह केवल महसूस करके समझाया नहीं जा सकता . शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि  इनमें कुछ दर्द पैदा करने वाले पेप्टाइड्स अवश्य होने चाहिए.

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शोधकर्ताओं को लगता है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद उन्हें पेनकिलर दवा (Painkillers) बनाने में आसानी होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


यह मिली संरचना
शोधकर्ता सैद्धांतिक रूप से सही तब साबित हुए जब आणविक अन्वेषण करने से उन्हें एक त्रिआयामीय संचरना की उपस्थिति की जानाकरी मिली. इसे गठान के आकार के अणुओं की कड़ियां बनाती हैं. जिमपेप्टाइड्स का वैसा ही असर होता है जैसा कि मकड़ी के जहर का होता है.

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यह जहरीले पदार्थ तंत्रिका कोशिकाओं यानि नर्व सेल में आयान चैनल को प्रभावित करते हैं जिन्हें दर्द का बिचौलिया (Mediators) कहा जाता है. अब शोधकर्ता इस बात अपन ध्यान लगा रहे हैं कि यह पेप्टाइड दर्द का कारण कैसे बनता है. इस जानकारी से वे तंत्रिकाओं की दर्द महसूस करने के कार्य को समझ सकेंगे और इस जानकारी से दर्दनिवारक दवा भी बना सकेंगे.
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