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चंद्रमा पर हुई ऐसी गतिविधि जिसने वैज्ञानिकों की बदल दी धारणा, जानिए क्या है वह

चंद्रमा पर हुई ऐसी गतिविधि जिसने वैज्ञानिकों की बदल दी धारणा, जानिए क्या है वह

चीन के चांद के पिछले हिस्से पर भेजे रोवर की तस्वीरों से इस पदार्थ का पता चला था.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन के चांद के पिछले हिस्से पर भेजे रोवर की तस्वीरों से इस पदार्थ का पता चला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने चांद (Moon) की सतह पर ऐसी गतिविधि देखी है जिससे उनकी यह धारणा टूटी है कि चांद एक मृत खगोलीय पिंड (Dead celestial body) है.

नई दिल्ली: चंद्रमा (Moon) शुरू से ही इंसान के लिए कौतूहल का विषय रहा है. हाल में चांद को लेकर हो रहे शोधों में तेजी से इजाफा हुआ है. अब चांद के बारे में हमारी कुछ पुरानी धारणाएं भी बदल सकती है. चांद पर हो रहे इतने शोध  में वैज्ञानिकों ने चांद पर चौंकाने वाली गतिविधि का होना पाया है. उन्हें चांद की सतह पर टेक्टोनिक गतिविधि (Tectonic Acitivity) के प्रमाण मिले हैं.

चांद की सतह पर रखे गए थे यंत्र
अभी तक लंबे समय से यही माना जाता रहा है कि चांद एक मृत खगोलीय पिंड है और उसमें कोई भूगर्भीय गतिविधि नहीं होती. पिछले कुछ दशको में चंद्रमा की सतह पर सीस्मोमीटर यानि भूकंपमापी यंत्र रखे गए हैं. ये यंत्र अमेरिका के अपोलो अभियानों के दौरान रखे गए थे. इनका उद्देश्य चांद पर होने वाले भूकंपों के बारे में पता करना था.

तो क्या चांद पर आते हैं भूकंप
अभी तक अपोलो के स्थापित किए भूकंपमापी यंत्रों ने कुछ हलके भूकंप के झटके महसूस किए, लेकिन वैज्ञानिकों ने इससे यह तो माना कि चांद अब भी भूगर्भीय रूप से सक्रिय है, लेकिन भूकंप का कारण उन्हें चांद के लंबे समय से ठंडे होने को माना. उन्हें लगता था कि इस वजह से चांद की सतह सिकुड़ती जा रही है और उसी वजह से ये भूकंप आ रहे हैं.

क्या पाया गया ताजा शोध में
हाल ही में ब्राउन यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि चंद्रमा की सतह पर कुछ पहाड़ों की चोटियों में गतिविधि हो रही है. अपोलो अभियानों से प्राप्त कुछ तस्वीरों से पता चला था कि चांद का ज्यादातर हिस्सा रेगोलिथ से ढंका है जो एक प्रकार की धूल है. लेकिन ताजा अध्ययन से पता चला है कि चंद्रमा की सतह पर कुछ जगहों पर बड़े पत्थर हैं जो यह बताते हैं कि वहां कुछ दरारें बनी हैं.

चांद के बारे में यह खेज पुरानी धारणा बदलने वाली है.


चांद के अंदर है कायम है सक्रियता
शोध के सहलेखक पीटर शुल्ट्ज ने कहा, “पहले माना जाता था कि चांद बहुत पहले से एक मृत पिंड है. लेकिन हमें लगातार पता चल रहा है कि ऐसा नहीं है. ऐसा लगता है कि चांद की सतह अभी फट रही है और इसके सबूत हमें इसकी पहाड़ों की चोटियों पर दिख रहे हैं.“

क्या दिखाई दिया इस अध्ययन में
इसके लिए शोधकर्ताओं  नासा के लूनार सेकनायसेंस ऑर्बिटर  (LRO) से आंकड़े जुटाए, जिनसे चांद के हालिया टेक्टोनिक गतिविधियों के बारे में पता चला. इनमें से कुछ पहाड़ी चोटियां (Ridges) ज्वालामुखियों के ऊपर बनी हैं, जो अब भी ऊपर उठ रही हैं. इससे उसके आसपास की रेगोलिथ (चांद की धूल) उन दरारों में जमा होने लगी और पत्थर दिखाई देने लगे.

हाल ही में हुई हैं इस तरह की गतिविधि
शोधकर्तों ने पाया कि यह सब कुछ जल्दी तो हुआ लेकिन अब भी कुछ चोटियों पर धूल नहीं जमी. शोधकर्ताओं ने इसे एक्टिव नियरसाइड टेक्टोनिक सिस्टम (ANTS) नाम दिया. चांद पर रेगोलिथ धूल का बनती ही रहती है. जो हिस्से ऊपर दिखे उनसे भी धूल निकल कर उन्हें ढक लेती है. इसी लिए कुछ इलाकों में चोटियों का साफ दिखाई देना यह इशारा करता है कि वे हाल ही में बनी होंगी.

एक जगह नहीं मिले ऐसे हाल
शोधकर्ताओं ने ऐसे 500 इलाके पाए जहां ये हालात थे. गौरतलब है कि चांद पर हवा नहीं चलती है. ऐसे में इन इलाकों में वहां से धूल जल्दी हट नहीं सकती. लेकिन धूल वहीं बन कर जम जाती है.  इन तमाम बातों से वैज्ञानिकों में यह मत मजबूत हो रहा है कि चंद्रमा पर टेक्टेनिक गतिविधि अब भी सक्रिय है. यह इस धारणा को तोड़ रहा है कि चंद्रमा एक मृत खगोलीय पिंड है.

आने वाले दिनों में चंद्रमा को लेकर जिस तरह से अभियान तैयार हो रहे है. हमें चांद के बारे में ज्यादा ठोस जानकारी मिलने की उम्मीद है और हो सकता है हमें अपने उपग्रह को लेकर और भी धारणाएं बदलनी पड़ें.

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Tags: Mission Moon, Research, Science, Space

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