कोरोना ही नहीं, मांसाहारी खाने से फैलती है ये गंभीर बीमारियां

कोरोना ही नहीं, मांसाहारी खाने से फैलती है ये गंभीर बीमारियां
मांसाहार की वजह से दिल की बीमारियों का खतरा 7 प्रतिशत तक बढ़ जाता है

मांस खाने की वजह से दिल की बीमारियों (heart diseases) का खतरा लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 14, 2020, 1:51 PM IST
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कोरोना वायरस के मरीजों का आंकड़ा 145,698 पार हो चुका है. माना जा रहा है कि चीन के वुहान शहर से फैला ये वायरस सी-फूड और गोश्त विक्रेताओं के जरिए खरीदारों से होता हुआ फैला. इसके बाद ये सांस और बलगम की वजह से एक से दूसरे में फैल रहा है. हालांकि अब तक वैज्ञानिकों को इस बारे में कोई प्रमाण नहीं मिला है लेकिन कोरोना वायरस के महामारी बनने के साथ एक बार फिर ये बहस छिड़ गई है कि मांसाहार कितना सुरक्षित है.

अलग-अलग रिसर्च में ये निकलकर आता रहा है कि मांसाहार से कई बीमारियों का खतरा है. अक्सर कई परजीवी जानवरों की आंतों में पलते रहते हैं और कच्चा या अधपका या संक्रमित मांस खाने पर ये परजीवी इंसानों में भी पहुंच जाते हैं. खाना अगर अनहाइजीनिक तरीके से बना हो, जैसे मीट ठीक से साफ न हो या फिर खाना पकाते हुए हाथ साफ-सुथरे न हों तो संक्रमण का खतरा कई गुना हो जाता है.

ये बीमारियां हो सकती हैं
हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया कि प्रोसेस्ड मीट या फिर चिकन खाने से कार्डियोवस्कुलर बीमारियों (cardiovascular disease) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इस बारे में Northwestern University Feinberg School of Medicine के प्रोफेसर Norrina Allen बताते हैं कि इसकी वजह से दिल की बीमारियों का खतरा लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. इनमें हाई बीपी और स्ट्रोक से लेकर दिल की जन्मजात बीमारियां भी शामिल हैं, जो गर्भवती से बच्चे में पहुंचती हैं. अलावा कई गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर (cancer) का खतरा भी गोश्त खाने वालों को ज्यादा रहता है.



संक्रमित मांस खाने पर ये परजीवी इंसानों में भी पहुंच जाते हैं (सांकेतिक तस्वीर)




U.S. Dietary Guidelines Advisory committee की सदस्य Linda Van Horn कहती हैं, मांसाहार की बजाए हमें प्लांट-बेस्ड डायट लेनी चाहिए. जैसे सूखे मेवे, मूंगफली, चना, बीन्स और मटर जैसी चीजें मांस से मिलने वाले प्रोटीन की तरह ही शरीर को पूरा पोषण दे सकती हैं.

बढ़े हैं शाकाहारी
पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर भरोसा करें तो दुनिया में शाकाहारियों की तादाद बढ़ी है. लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं. ये आंदोलन का रूप ले रहा है, जिसे काफी पसंद भी किया जा रहा है. यहां तक कि वीनग डायट के प्रति भी रुझान बढ़ा है. यानी मीट के अलावा दूध या इससे बने उत्पाद न खाने वाले लोगों की भी एक बिरादरी बन रही है, जो शाहाकार से भी एक कदम आगे हैं. इसे vegan movement कहते हैं. गूगल ट्रेंड्स का सर्च डाटा कहता है कि साल 2014 से 2018 के बीच दुनियाभर में असरदार तरीके से शाकाहार की ओर लोगों का रुझान बढा है. इजराइल, आस्ट्रेलिया, आस्ट्रिया, कनाडा और न्यूजीलैंड में शाकाहारी बढ़ रहे हैं.

भारत सबसे आगे
दुनियाभर के शाकाहारी देशों में भारत 38% के साथ सबसे ऊपर है. माना जाता है कि ईसापूर्व छठवीं शताब्दी में बौद्ध और जैन धर्म के प्रसार के बाद से शाकाहार को मानने वाले बढ़े. यहां पर शाकाहारी में Lacto-vegetarianism को मानने वालों की बहुतायत है यानी वे लोग जो प्लांट-बेस्ड डाइट और दूध के उत्पाद तो खाते हैं लेकिन अंडे नहीं लेते. वहीं 13% के साथ शाकाहार के मामले में इजराइल दूसरे नंबर पर है. Judaism को मानने वाले लोग पशुओं पर हिंसा को खराब मानते हैं और शाकाहार अपना लेते हैं. यहां पर वेगन डाइट लेने वाले भी काफी हैं. यहां तक कि साल 2014 में यहां पर दुनिया का सबसे बड़ा वेगन फेस्टिवल मनाया गया, जिसमें 15,000 लोग शामिल हुए.

दुनिया में शाकाहारियों की तादाद बढ़ रही है (सांकेतिक तस्वीर)


Friends Of Earth नामक संस्था के मुताबिक दुनियाभर में 50 करोड़ लोग ऐसे हैं जो पूरी तरह से शाकाहारी हैं लेकिन तादाद बढ़ रही है. माना जा रहा है कि वर्ष 2018 में शाकाहार के प्रति सबसे ज्यादा ट्रेंड देखा गया है लिहाजा साल 2020 में शाकाहारियों की तादाद भी और बढ़ी हुई मानी जा सकती है.

कौन खाता है ज्यादा मांस
मीट-ईटर देशोंकी बात करें तो मार्केट रिसर्च फर्म Euromonitor International की रपट में सबसे ऊपर नाइजीरिया है. इस अफ्रीकन देश में इसी साल पहला पूरी तरह से वेजिटेरियन रेस्त्रां खुला है जिसका नाम है वेजी विक्टरी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस देश में शाकाहार का कंसेप्ट कितना नया है. यहां तक कि पहले शाकाहार को "White people food" माना जाता रहा. ऐसे में एकदम से पूरा का पूरा देश शाकाहार की तरफ क्यों बढ़ने लगा! इसके पीछे पर्यावरण और खासकर क्लाइमेट चेंज पर लगातार हो रही चर्चाओं को देखा जा रहा है. कई ब्लॉगर्स इसपर लिख, बोल रहे हैं और नई पीढ़ी तेजी से इस तरफ बढ़ी है.

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