लाइव टीवी

दिवाली बाजार से क्यों 80 प्रतिशत गायब हुआ मेड इन चाइना सामान?

News18Hindi
Updated: October 25, 2019, 7:22 PM IST
दिवाली बाजार से क्यों 80 प्रतिशत गायब हुआ मेड इन चाइना सामान?
दिल्ली के दिवाली बाजार से 80 प्रतिशत चीनी सामानों का बाजार घट गया है.

दिल्ली के दिवाली बाजार (Diwali Bazaar) में चीनी सामानों की कुल हिस्सेदारी अब मात्र 20 प्रतिशत ही रह गई है. चीन के सामान (China Made) विरोधी प्रदर्शनों का असर इस दिवाली में देखा जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2019, 7:22 PM IST
  • Share this:
पिछले 5-6 सालों से दिल्ली (Delhi) के दिवाली बाजार (Diwali Bazaar) में चीन के समानों की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है. दिल्ली व्यापार महासंघ (Delhi trade federation) की मानें तो मेड इन चाइना (Made in China) सामानों के आयात में 70 से 80 प्रतिशत की भारी गिरावट है. कैसे बदल रहा है दिवाली बाज़ार और क्यों चीनी चीज़ों ही हवा निकल रही है? इस सवाल के साथ यह जानना भी दिलचस्प है कि कैसे मेड इन इंडिया (Made in India) या स्वदेशी का बाज़ार बदलाव ला रहा है.

ये भी पढ़ें : धनतेरस पर बना ये शानदार विज्ञापन बदल सकता है सोच, आपके लिए है बेहद जरूरी

हाल के वर्षों में भारतीयों विनिर्माण उद्योग की कड़ी प्रतिस्पर्धा और चीनी सामानों की खराब गुणवत्ता (Quality) इस गिरावट के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में दिवाली बाजार में चीनी सामानों की कुल हिस्सेदारी अब मात्र 20 प्रतिशत की ही रह गई है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि चीन के सामान विरोधी प्रदर्शनों का असर इस दिवाली में देखा जा रहा है. दिल्ली में ज्यादातर व्यापारियों ने भारत में बनी मूर्तियों को तरजीह दी है. साथ ही लोगों में भारतीय उत्पादों (Indian Products) की मांग बढ़ी है. जिसके कारण भारत के विनिर्माण उद्योगों को बढ़ावा मिला है.

भारत में बनी दियों को तरजीह दी जा रही है.


देश में बनी मूर्तियों की मांग में तेजी
दिल्ली के व्यापारियों ने कहा कि बुरारी, पंखा रोड, गाजीपुर, और पुरानी दिल्ली की निर्माण इकाइयों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मेरठ में बनी मूर्तियों की मांग तेजी से बढ़ी हैं. दिल्ली के सदर बाजार में पिछले 30 सालों से गिफ्ट आइटम बेच रहे स्टैंडर्ड ट्रेडिंग के मालिक सुरेंद्र बजाज ने कहा कि चीनी मूर्तियों को बेचने वाले बहुत कम लोग रह गए हैं.

वहीं बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रमुख परमजीत सिंह ने कहा कि भारतीय उत्पाद चीन से काफी अच्छे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चीनी मूर्तियों घरेलू मूर्तियों की तुलना में कम से कम 30-40 प्रतिशत महंगे हैं. चीनी मूर्तियों की कीमत 8,000 रुपये से अधिक हो सकती है. मूर्तियां बनाने वाले मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि भारतीय मूर्तियां चीनी मूर्तियों की तुलना में कही ज्यादा मजबूत हैं.
Loading...

भारतीय सामान चीनियों की तुलना में कही ज्यादा मजबूत हैं.


चीनी उत्पादों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
दिल्ली के व्यापारियों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे राष्ट्रीय राजधानी में पिछले साल चीनी उत्पादों के खिलाफ हुए विरोधी प्रदर्शनों जिम्मेदार है. गौरतलब है कि कुछ वर्षों पहले तक चीन से आयातित सस्ते उत्पादों से दिल्ली में दीपावली के बाजार पटे रहते थे. लेकिन उपभोक्ता और दुकानदारों द्वारा स्वदेशी सामान को बढावा देने के चलते चीनी सामान की बाजार हिस्सेदारी घट गई है.

पिछले कुछ साल पहले चीन से हर साल हर दिवाली में दीपक, कंदील, फूल, रंगोली, रंग-बिरंगी लड़यिों, परदे, बंदनवार, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों तथा अन्य साजो-सामान पड़े पैमाने पर आयात किया जाता था. इस पर्व पर भी 'मेड इन चाइना’ का कब्जा रहा था और बाजार में चीन की लड़ियां, गिफ्ट आइटम, मूर्तियों, सजावटी सामान की धूम रहती थी.

दुकानदारों द्वारा स्वदेशी सामान को बढ़ावा दिया जा रहा है.


चीनी इलेक्ट्रॉनिक बाजार में गिरावट
भागीरथ पैलेस में दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव रविंदर कुमार गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक बाजार पर पहले पूरी तरह चीनी सामान हावी था, लेकिन सरकार ने गुणवत्ता को लेकर मानक सख्त कर दिए हैं. जिसके चलते इस बार इलेक्ट्रॉनिक बाजार में बिक्री 50 फीसदी घट गई है. देश में अब अधिकतर गिफ्ट आइटम की खरीदारी ऑनलाइन हो रही है.

हाल ही में इंडोनेशिया से आयातित माल भी बाजार में देखा जा रहा है लेकिन महंगा होने के चलते इसकी पकड़ कमजोर है. सदर बाजार में गिफ्ट आइटम बेचने वाली आकांक्षा बताती हैं कि उनकी बिक्री पिछले साल की तुलना में इस बार 60 फीसदी घट गयी है और इसी कारण वह अब अपनी दुकान में सजावटी सामान भी बेचने लगी हैं.

दिल्ली के बाजारों में बढ़ी राजस्थानी दीयों की मांग
महानगर के दुकानदारों का कहना है कि अब राजस्थान में बने दियों की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है. खासतौर से राजस्थान के अलवर में बनी दियों की बाजार में अच्छी खासी मांग चल रही है. साथ ही कोलकाता और लखनऊ से भी दीये और मूर्तियां मंगाई जा रही हैं.

ये भी पढ़ें:

इन 20 देशों में जाने के लिए भारतीयों को नहीं है वीजा की जरूरत

बोफोर्स के बाद अब भारतीय सेना इन तोपों से देगी दुश्मनों को करारा जवाब

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 25, 2019, 6:53 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...