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Coronavirus: इस महिला डॉक्‍टर ने दक्षिण कोरिया में संक्रमण फैलने पर लगाए ब्रेक

डॉ. जेऑन्‍ग की रणनीति के कारण ही दक्षिण कोरिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में दो कदम आगे वल रहा है.

डॉ. जेऑन्‍ग की रणनीति के कारण ही दक्षिण कोरिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में दो कदम आगे वल रहा है.

कोरियाई सेंटर्स फॉर डिजीज एंड पब्लिक कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (KCDC) की हेड डॉ. जेऑन्‍ग कियोंग की रणनीति के तहत दक्षिण कोरिया (South Korea) में कोरोना वायरस (coronavirus) की मेडिकल जांच के लिए टेलीफोन बूथ के आकार के छोटे-छोटे टेस्टिंग सेंटर्स बनाए गए.

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    चीन से बाहर निकलने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) ने दक्षिण कोरिया को भी अपनी चपेट में ले लिया. दक्षिण कोरिया (South Korea) में पहला कोरोना पॉजिटिव केस 4 फरवरी को सामने आया. इसके बाद 10 दिन के भीतर यहां संक्रमित मरीजों की संख्‍या में तीन गुनी वृद्धि हो गई. ऐसा लगा कि ये वायरस चीन के बाद दक्षिण कोरिया में सबसे ज्‍यादा तबाही मचाएगा. हर दिन मरीजों की तादाद बढती जा रही थी. फिर फैमली डॉक्‍टर का काम कर चुकीं डॉ. जेऑन्‍ग कियोंग कोरोना वायरस और दक्षिण कोरिया के बीच ढाल की तरह सामने आईं. उन्‍होंने अपनी जबरदस्‍त रणनीति से दक्षिण कोरिया को इस वैश्विक महामारी (Pandemic) की चपेट से बाहर निकाल लिया. अब देश में रोज सामने आने वाले नए मामलों की संख्‍या घट गई है, जबकि मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं.

    शुरू में ही संदिग्‍धों को पहचान कर कोरोना टेस्‍ट कराया गया
    दक्षिण कोरिया में बीते 50 दिन में 9,037 संक्रमण के पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. इनमें 120 लोगों की मौत हो चुकी है. कुल 3,507 मरीज स्‍वस्‍थ होकर अपने घरों को लौट चुके हैं. दरअसल, दक्षिण कोरिया में एक धार्मिक आयोजन से कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत हुई थी. इसके बाद डॉ. जेऑन्‍ग ने उस आयोजन में शामिल हुए 2.12 लाख लोगों की पहचान और व्‍यक्तिगत जानकारियां जुटाने का आदेश दिया. इसके बाद हर व्‍यक्ति का मेडिकल टेस्‍ट किया गया. 25 फरवरी के बाद से अब तक दक्षिण कोरिया में 3 लाख से ज्‍यादा संदिग्‍ध लोगों का कोरोना टेस्‍ट हो चुका है. दक्षिण कोरिया ने संक्रमण को फैलने से रोकने में मेडिकल टेस्‍ट को ही सबसे कारगर हथियार माना.

    डॉ. जेऑन्‍ग ने पूरे देश में बनवाए टेलीफोन बूथ जैसे सेंटर्स
    डॉ. जेऑन्‍ग की रणनीति के तहत 27 फरवरी तक देश की चार कंपनियां टेस्टिंग किट बना रही थीं. वहां आज भी हर दिन 20,000 लोगों का कोरोना टेस्‍ट किया जा रहा है. डॉ. जेऑन्‍ग की टीम इस पर लगातार नजर रख रही है. दक्षिण कोरिया में जगह-जगह टेलीफोन बूथ के आकार के टेस्टिंग स्टेशन बनाए गए हैं. डॉ. जेऑन्‍ग सोल में फैमिली डॉक्‍टर के तौर पर काम करती थीं. इसके बाद 1995 में वह नेशनल हेल्थ मिनिस्ट्री में नियुक्‍त हुईं. स्‍वाइन फ्लू संक्रमण के दौरान 2009 में उन्हें पदोन्नत कर इमरजेंसी केयर डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी दी गई. एच1एन1 वायरस से दक्षिण कोरिया में 7.5 लाख लोग संक्रमित हुए थे. मर्स वायरस से निपटने में असफल रहने पर सीडीसी की काफी आलोचना हुई थी. इसके बाद डॉ. जेऑन्‍ग को कोरियाई सेंटर्स फॉर डिजीज एंड पब्लिक कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (KCDC) का चीफ बना दिया गया.

    डॉ. जेऑन्‍ग ने पूरे दक्षिण कोरिया में दक्षिण कोरिया में जगह-जगह टेलीफोन बूथ के आकार के टेस्टिंग स्टेशन बनवाए. इन सेंटर्स पर कोई भी अपना मुफ्त कोरोना टेस्‍ट करा सकता है.


    कोरियाई सीडीसी की पहली महिला डायरेक्‍टर हैं डॉ. जेऑन्‍ग
    सीडीसी के पूर्व निदेशक का कहना है कि ऐसे हालात में कोई भी दूसरा व्‍यक्ति डॉ. जेऑन्‍ग से बेहतर काम नहीं कर सकता है. यह काम सिर्फ जानकारी से नहीं किया जा सकता है. डॉ. जेऑन्‍ग के पास काफी अनुभव भी है. उन्हें पता है कि ऐसे हालात में क्या किया जा सकता है और क्या नहीं करना है. वह केसीडीसी की पहली महिला डायरेक्‍टर हैं. राष्‍ट्रपति मून जे इन ने उन्‍हें जुलाई, 2017 में सीडीसी की जिम्‍मेदारी सौंपी थी. लोगों ने उन्‍हें मर्स (MERS) वायरस के फैलने के दौरान पहचानना शुरू कर दिया था. वह उस समय प्रेस ब्रीफिंग के लिए मीडिया के सामने आती रहती थीं. इससे पहले वह सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन और डिपार्टमेंट ऑफ क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल रिसर्च की डायरेक्‍टर भी रह चुकी थीं.

    दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से डेथ रेट 0.97 फीसदी
    दक्षिण कोरिया में कोई लॉकडाउन नहीं किया गया. सभी ऑफिस खुले रहे. अब बताया जा रहा है कि अप्रैल की शुरुआत में स्कूल भी खुल जाएंगे. हालात को पूरी तरह से काबू में करने के लिए सीडीसी ज्यादा से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग पर ध्यान दे रहा है. वर्ल्थ हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार अब तक 188 देश कोरोना वायरस (coronavirus) की चपेट में आ चुके हैं. इनमें दक्षिण कोरिया इस वायरस से मुकाबले में दो कदम आगे नजर आ रहा है. हफ्तेभर पहले ही संक्रमण के मामले में चीन और इटली के बाद खड़े इस देश में हालात लगातार सुधर रहे हैं. इस हफ्ते दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से डेथ रेट 0.97 फीसदी रहा, जबकि इटली में मरने वालों की संख्‍या 7.94 फीसदी और चीन व हांगकांग में 3.98 प्रतिशत रही है.

    दिनरात बनाईं टेस्‍ट किट, हर दिन 20 हजार लोगों की जांच
    इंटरनेशनल वैक्‍सीन इंस्‍टीट्यूट (IVI) के डायरेक्टर जनरल जेरॉम किम के मुताबिक, दक्षिण कोरिया की बायोटेक इंडस्ट्रूी शानदार काम कर रही है. जब चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का जीन सिक्वेंस जारी किया, तभी से दुनियाभर के वैज्ञानिक खोज में जुट गए. दक्षिण कोरिया भी इनमें से एक था. हालांकि दक्षिण कोरिया ने दवा या वैक्‍सीन तैयार करने में वक्‍त जाया करने के बजाय मेडिकल टेस्‍ट करने और संक्रमितों के संपर्क में आए लागों की पहचान कर उन्‍हें अलग-थलग करने में पूरी ताकत झोंक दी. इस रणनीति को सफल बनाने के लिए देश की बायोटेक कंपनियों ने भी काम करना शुरू कर दिया. कंपनियों ने दिनरात काम कर टेस्‍ट किट बनाना शुरू कर दिया. इसका फायदा ये हुआ कि देश में हर दिन 20 हजार लोगों का कोरोना टेस्ट कराया जा सका.

    दक्षिण कोरिया में लोगों का रोड पर कार में बैठे-बैठे ही कोरोना टेस्‍ट किया जा रहा है. इस तरह अब तक देश में 3 लाख से ज्‍यादा लोगों का टेस्‍ट किया जा चुका है.


    छोटे-छोटे टेस्टिंग सेंटर्स पर मुफ्त की जा रही है जांच 
    डॉ. जेऑन्‍ग की रणनीति के तहत दक्षिण कोरिया में जगह-जगह खोले गए छोटे-छोटे सेंटर्स पर पहुंचकर कोई भी अपना मुफ्त टेस्‍ट करा सकता है. इस जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को तुरंत आइसोलेट कर इलाज शुरू कर दिया जाता है. फरवरी में सरकार ने संक्रमित सभी लोगों की आईडी, क्रेडिट-डेबिट कार्ड की रसीद और दूसरे प्राइवेट डाटा निकाल लिए. इसके बाद उनके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान की गई. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज के प्रोफेसर ओई इंग इयॉन्ग कहते हैं कि उन्होंने कमाल के इंतजाम किए और जनता के जमकर कोरोना टेस्ट कराए. साल 2015 में मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रॉम फैला तो दक्षिण कोरिया में 35 लोगों की मौत हुई थी. तभी से यहां संक्रामक बीमारियों के टेस्ट की मंज़ूरी के लिए विशेष सिस्टम है.

    टेस्‍ट, आइसोलेशन और सोशल डिस्‍टेंसिंग ही कारगर
    डब्‍ल्‍यूएचओ में रिसर्च पॉलिसी के पूर्व निदेशक तिक्की पंगेस्तू कहते हैं कि अमरीका और ब्रिटेन ने एक मौका खो दिया है. उनके पास चीन के बाद दो महीने थे, लेकिन उन्हें लगा कि उन्हें कुछ नहीं होगा. अमेरिका ने टेस्टिंग में देरी की. वहीं, वायरस को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं होने के बाद भी सिंगापुर, ताइवान और हांगकांग ने बहुत जल्‍दी अपनी सीमाओं पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. ताइवान ने तो वुहान से आने वाले विमानों के यात्रियों को नीचे उतारने से पहले ही उनकी जांच की. हाल में पता चला है कि जिन संक्रमित लोगों में लक्षण नहीं पाए गए हैं, वे भी दूसरों में संक्रमण फैला रहे थे. ऐसे में सीधे कोरोना टेस्‍ट बहुत अहम है. दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कोरोना टेस्ट, संक्रमितों को अलग करना और सोशल डिस्‍टेंसिंग ही कारगर उपाय है.

    संक्रमण फैलाने के आरोपियों पर की सख्‍त कार्रवाई
    दक्षिण कोरिया ने संक्रमण फैलाने वालों पर सख्‍त कार्रवाई भी की. कोरोना वायरस की वजह से हुई कुछ मौतों के लिए एक धार्मिक नेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दे दिए गए. राजधानी सोल के प्रशासन ने शिन्चेऑन्जी चर्च के संस्थापक ली-मन-ही और 11 अन्य के खिलाफ मामला चलाने का आदेश दे दिया. सभी आरोपियों पर कोरोना पीड़ित कुछ लोगों के नाम अधिकारियों से छुपाने का आरोप है. ये अधिकारी शहर में वायरस फैलने से पहले प्रभावित लोगों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे थे. दक्षिण कोरिया में संक्रमण से मरने वालों में आधे एक ईसाई समूह की ओर से चलाए जा रहे चर्च के सदस्य हैं. प्रशासन का कहना है कि दक्षिणी शहर डाएगू में शिन्चेऑन्जी चर्च के सदस्यों में एकदूसरे के जरिये कोरोना वायरस फैलता गया. फिर धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों में भी इसका असर होने लगा. आरोपियों पर हत्या, नुकसान पहुंचाने और संक्रामक रोग व नियंत्रण अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं.

    सभी चर्च हुए बंद, बौद्ध कार्यक्रम और प्रदर्शन किए रद्द    
    दक्षिण कोरिया सरकार ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तुरंत सभी चर्च बंद करा दिए. इसके अलावा देश में होने वाले सभी विरोध-प्रदर्शन और बौद्ध कार्यक्रम रद्द कर दिए गए. दक्षिण कोरिया ने मास्क निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया. देश ने अपने चार स्तरीय वायरस अलर्ट को उच्चतम स्तर 'लाल' तक बढ़ा दिया. देश में 3 लाख लोगों में 2.50 लाख से ज्‍यादा की कोरोना टेस्‍ट रिपोर्ट निगेटिव आई. दक्षिण कोरिया में अधिकारी लॉकडाउन का सहारा लिए बिना कोरोना वायरस से लड़ रहे हैं. सरकार लाखों लोगों का सड़क पर ही उनकी कारों में टेस्ट कर रही है. इसके लिए मोबाइल फोन और सेटेलाइट टेक्‍नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने इन कोशिशों को इस वायरस के खतरे के खिलाफ एक जंग की शुरुआत करार दिया था.

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