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क्या रमजान में उपवास से गंभीर हो सकता है कोरोना संक्रमण?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रोजे को लेकर एडवायजरी जारी की है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रोजे को लेकर एडवायजरी जारी की है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

WHO के मुताबिक, कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित या अन्य रोगों से पीड़ित लोगों को रोजा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. उपवास के दौरान शरीर में तरल पदार्थ की कमी इम्यूनिटी लेवल कमजोर कर सकती है.

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    इस्लाम धर्म के पवित्र महीने रमजान (Ramadan) में दुनियाभर के मुसलमान उपवास रखते हैं. उपवास रखने का समय सुबह से लेकर शाम तक का होता है. शाम को फिर इफ्तार के जरिए उपवास खत्म किया जाता है. सामान्य तौर पर ये समय तकरीबन 14 घंटे का होता है. एक स्वस्थ शरीर इस उपवास की प्रक्रिया को जल्दी अपना लेता है. हालांकि उपवास रखना शरीर के लिए कई मायनों में बेहतर भी माना जाता है. लेकिन असली समस्या शरीर में तरल पदार्थों (जैसे फलों के जूस या फिर पानी) की कमी की है.

    विशेष तौर पर बीमार लोगों के शरीर में तरल पदार्थ की ज्यादा आवश्यकता होती है, क्योंकि ये शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. डायचे वेले पर प्रकाशित एक रिपोर्ट कहती है कि अभी तक ऐसी कोई रिसर्च नहीं है जो बताए कि क्या उपवास के दौरान इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. इसलिए कोरोना वायरस और उपवास का संबंध सैद्धांतिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ. लेकिन ये वायरस नया है और इसके प्रभाव हर दिन बदल रहे हैं ऐसे में आशंकाएं भी जाहिर की जा रही हैं. खुद वैज्ञानिक भी इस वायरस से अभी जूझ रहे हैं.

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    प्रतीकात्मक तस्वीर


    बीमार लोग रखें ध्यान
    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक एडवायजरी के जरिए कहा है कि कोरोना से संक्रमित लोग उपवास के पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें. अगर संभव हो तो उपवास की प्रक्रिया को टाल दें. आखिरकार ये सिर्फ डॉक्टर ही बता सकता हैं कि संक्रमित व्यक्ति से शरीर में संक्रमण का स्तर कैसा है. उपवास कहीं उसे नुकसान तो नहीं पहुंचा सकता. इसके अलावा अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी उपवास रखने से पहले डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए. दरअसल कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मजबूत इम्यून सिस्टम का अहम रोल है. ये प्रमाणित है कि मजबूत इम्यूनिटी सिस्टम वाले लोग इस बीमारी को पछाड़कर स्वस्थ हो रहे हैं.

    वैसे भी इस्लामिक धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सामान्य तौर पर गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को उपवास न रखने की सलाह दी जाती है. पहले से चल रहे लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से ज्यादा संख्या में इफ्तार की पाबंदी चल रही है. सरकारों की तरफ से आदेश है कि इफ्तार अपने घर पर रही करें.

    प्रतीकात्मक तस्वीर


    इस्लामिक ट्रेडिशन के हिसाब से उम्रदराज, बीमार, गर्भवती महिलाओं और यात्रियों को उपवास से कुछ छूट हासिल है. एक स्वस्थ मुस्लिम पर रोजे रखना फर्ज माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में आप छूट हासिल कर सकते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से कहा गया है कि जो मुस्लिम स्वस्थ हैं वो रोजा रख सकते हैं. हालांकि उन्हें भी अपने लक्षणों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए. संगठन ने कहा है कि स्वस्थ लोगों के उपवास रखने में अभी कोई समस्या नहीं दिखाई दे रही है.

    37 लाख से ज्यादा संक्रमित
    गौरतलब है कि दुनियाभर के देशों में फैले कोरोना संक्रमण की वजह से कुल संक्रमितों की संख्या 37 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है. करीब 2 लाख 58 हजार लोग इस महामारी की वजह से जान गंवा चुके हैं. रमजान के महीने में श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाली मक्का और मदीना मस्जिदें बंद हैं. ये दोनों मस्जिदें इस्लाम धर्म में वैश्विक आस्था का केंद्र हैं.

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