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DRDO ने 2012 में ही कर दिया था दावा- जब चाहें अंतरिक्ष में मार सकते हैं सैटेलाइट

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

2007 में चीन ने अपनी खराब हो चुकी फेंक युन 1-C नाम की सैटेलाइट को ASAT रॉकेट के जरिए 2,500 से 3,000 टुकड़ों में तोड़ दिया था.

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    प्रधानमंत्री मोदी ने जिस एंटी सैटेलाइट हथियार की बात आज कही, भारत सरकार को लंबे वक्त से उसका इंतजार था. DRDO के पूर्व प्रमुख ने वर्ष 2012 में ही दावा किया था कि भारत के पास दुश्मन सैटेलाइट को मार गिराने की सभी जरूरी तकनीक मौजूद हैं. दरअसल भारत के पड़ोसी चीन ने जनवरी, 2007 में इस मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसके बाद भारत सरकार ने भी इसे लेकर अपनी इच्छा का इजहार किया था.

    कब किस देश ने किया डेवलप?
    सबसे पहले अमेरिका ने यह शक्ति हासिल की थी. अमेरिका ने 1980 के दशक के मध्य में ही इस तकनीक को विकसित कर लिया था. चीन ने भी चुपचाप, बिल्कुल गुप्त तरीके से इस मिसाइल का परीक्षण किया था. चीन के इस परीक्षण पर अमेरिका ने चिंता जताई थी. इस चिंता की वजह यह थी कि चीन की ASAT मिसाइल की रेंज में अमेरिका की सैटेलाइट्स भी आती थीं.

    चीन ने अपने KT-1 रॉकेट के जरिए इस परीक्षण को अंजाम दिया था. इस रॉकेट के जरिए चीन ने अपनी खराब हो चुकी फेंक युन 1-C नाम की सैटेलाइट को 2,500 से 3,000 टुकड़ों में तोड़ दिया था. यह चीनी सैटेलाइट अंतरिक्ष की निचली कक्षा में मात्र 800किमी ऊपर थी.

    ASAT मिसाइल की इन बातों से चिंतित रहे हैं विशेषज्ञ
    हालांकि ASAT मिसाइलों को लेकर विशेषज्ञों की हमेशा से चिंता रही है कि ये जिस सैटेलाइट को निशाना बनाती हैं, उसका मलबा लंबे वक्त तक अंतरिक्ष में बिखरा रहता है और यह दूसरी सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा मानवयुक्त मिशन के दौरान इस कचरे से टकराने से मिशन तो खतरे में पड़ ही सकता है, यान में आग लगने से अंतरिक्ष यात्रियों की जान भी जा सकती है. मई 2013 में अंतरिक्ष के कचरे से ऐसी ही एक दुर्घटना हुई थी जब उसने एक रूसी सैटेलाइट उसमें फंस गई थी और नष्ट हो गई थी.

    क्या था भारत का 2012 का दावा?
    भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ा मोड़ तब आया था, जब 2012 में तत्कालीन DRDO प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा था कि भारत के पास वह सभी जरूरी तकनीक मौजूद हैं, जिसके जरिए वह लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO) या पोलर ऑर्बिट में किसी भी तरह की दुश्मन सैटेलाइट को निशाना बनाने में सक्षम ASAT मिसाइल विकसित कर सकता है. सारस्वत ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि भारत को इसके एंटी बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम के जरिए ASAT मिसाइल विकसित करने में सहायता हो सकती है. एंटी बैलेस्टिक मिसाइल में अग्नि सीरीज की मिसाइलें भी शामिल हैं.

    यह भी पढ़ें: किन देशों के पास है एंटी सैटेलाइट हथियार तकनीक

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