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    क्या कोर्ट की मदद से Donald Trump पद से हटने से इनकार कर सकते हैं?

    सुप्रीम कोर्ट वाले ट्रंप के बयान को नए सिरे से तौला जा रहा है-सांकेतिक फोटो (flickr)
    सुप्रीम कोर्ट वाले ट्रंप के बयान को नए सिरे से तौला जा रहा है-सांकेतिक फोटो (flickr)

    US Presidential Election 2020: अमेरिका में चुनाव की प्रक्रिया काफी पेचदगी-भरी है. यही वजह है कि चुनाव के नतीजे सुप्रीम कोर्ट (Supreme court of America) में जाकर अटक सकते हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 27, 2020, 3:16 PM IST
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    अमेरिका में चुनावी गहमागहमी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) विवादों में हैं. वे कई बार गोलमोल तरीके से कह चुके हैं कि चुनाव के नतीजे उनके मुताबिक न होने पर सुप्रीम कोर्ट उनकी मदद करेगा. हाल ही में अमेरिकी सीनेट में सुप्रीम कोर्ट के नए जज के लिए वोट हुआ, जिसमें ट्रंप की नामित एमी कोनी बैरेट जीतीं. इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट वाले ट्रंप के बयान को नए सिरे से तौला जा रहा है.

    ट्रंप और कोर्ट पर बयान 
    सितंबर के आखिर में ट्रंप ने कहा था कि शायद ये चुनाव सुप्रीम कोर्ट में जाकर रुकेगा. साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि हमें इसके लिए कोर्ट में पूरे 9 जजों की जरूरत होगी. बता दें कि कोर्ट की शीर्ष जज रूथ बेडर गिन्सबर्ग कुछ वक्त नहीं रहीं. उनके निधन के बाद से ये पद खाली था. इसे भरने पर ट्रंप लगातार जोर दे रहे थे. अब जो नियुक्ति हुई है, वो ट्रंप के मुताबिक ही है. नई जज एमी कोनी बैरेट को ट्रंप ने ही वोट किया था. इससे पहले भी एमी और ट्रंप के घनिष्ठ संबंधों की बात होती रही है.

    अमेरिका में राजनीति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दायरा बढ़ा हुआ है- सांकेतिक फोटो

    अपने अनुसार जज की ये नियुक्ति आखिर ट्रंप को कैसे फायदा देगी?


    इस बारे में समझने के लिए साल 2000 का मामला देख सकते हैं. तब “बुश बनाम गोर (Bush v Gore)” मामले में सुप्रीम कोर्ट का विवादित फैसला अभी भी डेमोक्रेटिक पार्टी को परेशान करता है. उस दौरान जॉर्ज डब्ल्यू बुश रिपब्लिकन्स, जबकि अर्नाल्ड गोर डेमोक्रेट्स की ओर से उम्मीदवार थे. तब बराबर वोटों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच तनातनी चलती रही. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोरिडा में वोटों की दोबारा गिनती पर रोक लगाते हुए जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को राष्ट्रपति बना दिया. अब भी ये फैसला मीडिया और संविधान के जानकारों के बीच बहस का विषय है.

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    दूसरे देशों से अलग अमेरिका में राजनीति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दायरा काफी बढ़ा हुआ है. वो हमेशा से इसमें दखल दे पाई है. इसकी वजह ये है कि वहां पर चुनावों को लेकर कोई खास या पक्का नियम नहीं है. ऐसे में विवाद होने पर तुरंत कोर्ट सक्रिय हो जाती है.

    अमेरिका में चुनाव से जुड़े विवाद पहले भी कोर्ट जाते रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    लिखी जा चुकी है किताब
    यही वजह है कि अमेरिका में चुनाव से जुड़े विवाद लगातार कोर्ट जाते रहे हैं. इसका जिक्र एक किताब Election Meltdown: Dirty Tricks, Distrust, and the Threat to American Democracy में है. इसे देखते हुए ये अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल के चुनावी नतीजे भी आराम से पक्के नहीं होने वाले, बल्कि कोर्ट के जरिए ही रुकेंगे.

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    क्या सत्ता सौंपेंगे ट्रंप
    इसकी बड़ी वजह ट्रंप के ऊटपटांग बयान भी हैं. जैसे अगस्त में एक प्रेस वार्ता में ट्रंप ने अजीबोगरीब बयान दिया,जिसके मुताबिक जरूरी नहीं कि हारने पर भी वे सत्ता को शांति से छोड़ देंगे. इसके साथ ही अमेरिका में सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण पर चर्चा छिड़ गई. सवाल उठ रहा है कि क्या हारी हुई पार्टी विजेता पार्टी को सत्ता देने से इनकार भी कर सकती है! इस बारे में विशेषज्ञों की राय खास अच्छी नहीं.

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    अमेरिकी संविधान में चुनाव पर ज्यादा बात नहीं
    द अटलांटिक में छपी एक रिपोर्ट में कानूनविद लॉरेंस डगलस की राय इसी ओर इशारा करती है. डगलस कहते हैं कि अमेरिकी संविधान में सत्ता के शांतिपूर्वक हस्तांतरण की बात नहीं करता है, बल्कि वो इसका अनुमान लगा लेता है कि ऐसा ही होगा. ऐसे में अगर कोई प्रेसिडेंट हार के बाद भी सत्ता जीती पार्टी को देने से इनकार कर दे तो इसके लिए अमेरिकी संविधान में कोई अलग बात नहीं कही गई है.

    प्रेस वार्ता में ट्रंप अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं- सांकेतिक फोटो


    क्या हालात हो सकते हैं
    संविधान की इसी कमी पर किताब भी लिखी जा चुकी है. विल ही गो (Will He Go?) नाम से इस किताब में अनुमान लगाया गया है कि अगर कोई अमेरिकी प्रेसिडेंट हार के बाद पद छोड़ने से इनकार कर दे तो क्या हालात बन सकते हैं. इस पर एक्सपर्ट बहस कर रहे हैं लेकिन चूंकि संविधान में इसके लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं, इसलिए फिलहाल अनुमान ही लगाए जा रहे हैं कि ऐसा होने पर क्या हो सकता है.
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