फिर शुरू हुआ चीन का वो कुख्यात त्योहार, जिसमें हर साल हजारों कुत्ते खा जाते हैं लोग

फिर शुरू हुआ चीन का वो कुख्यात त्योहार, जिसमें हर साल हजारों कुत्ते खा जाते हैं लोग
हर साल की तरह इस बार भी वहां डॉग मीट फेस्टिवल शुरू हो चुका है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

कोरोना वायरस की दूसरी लहर (second wave of coronavirus) के डर के बीच भी चीन (China) बाज नहीं आया. हर साल की तरह इस बार भी वहां डॉग मीट फेस्टिवल (Dog Meat Festival) शुरू हो चुका है. 10 दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में कुत्तों को जिंदा भूनकर खाया जाता है, जिसमें हजारों कुत्ते मारे जाते हैं.

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दिसंबर में चीन के वुहान से फैले कोरोना वायरस (coronavirus from Wuhan) के बारे में अब तक लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि ये चमगादड़ या पैंगोलिन को खाने पर फैला होगा. मौतों और लॉकडाउन के कारण देशों को जबर्दस्त आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है. इसी सबके बीच चीन ने लगभग दो महीने पहले कुत्तों का मांस खाने पर बैन (ban on dog meat in China) लगाने का एलान किया. ये कदम देशों की आलोचना के साथ इस बात से भी लिया गया कि चीन में कुत्तों का मांस खाने की वजह से दुनियाभर के मुल्क लगातार उसे लानतें भेजते रहे हैं. लेकिन आज यानी 23 जून से ही वहां का कुख्यात डॉग मीट फेस्टिवल शुरू हो चुका है. चीन के यूलिन (Yulin) प्रांत में होने वाले इस त्योहार में लोग शामिल भी हो रहे हैं.

क्या है डॉग मीट फेस्टिवल
जानवरों का मांस खाने के शौकीन चीन में कुत्तों का मांस भी चाव से खाया जाता है. यहां तक कि चीन के लोग इस मांस को 'Mutton of the Earth' कहते हैं. वहां के लोग कुत्ते के मांस में आध्यात्मिक ताकत देखते हैं और ईश्वर से जुड़ने के लिए इसे खाने पर जोर देते हैं.

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वे मानते हैं कि कुत्तों का मांस न सिर्फ आत्मा को, बल्कि शरीर को भी तंदुरुस्त रखता है. यहां पर कई तरीकों से नमकीन के साथ मीठी डिश बनाकर भी दी जाती है. यूलिन में होने वाले इस त्योहार को “Lychee and Dog Meat” फेस्टिवल भी कहते हैं, जिसमें कुत्तों के अलावा ताजी लीचियां और अल्कोहल की अलग-अलग किस्में भी सर्व की जाती हैं. अगर कोई ग्राहक चाहे तो वो जिंदा कुत्ते को पिंजरे समेत घर ले जाकर उसे पका सकता है.



जानवरों का मांस खाने के शौकीन चीन में कुत्तों का मांस भी चाव से खाया जाता है (Photo-pixabay)


कितना क्रूर है उसे पकाने का तरीका
इतिहासकारों के अनुसार चीन में 7,000 से भी ज्यादा सालों से कुत्ते का मांस खाया जा रहा है. कुत्तों को पकाने के अलग-अलग तरीकों के अलावा एक तरीका यहां खासा क्रूर है, इसे pressed dog रेसिपी कहते हैं, जिसके तहत कुत्तों की स्किन निकालकर उसे पीटकर फिर रातभर मैरिनेट करते हैं और फिर पकाते हैं. इसके लिए अलग से चीन और पड़ोसी देशों से भी कुत्तों की तस्करी की जाती है.

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सालभर में लाखों कुत्ते खा जाते हैं चीन के लोग
कुत्तों को एक जगह जमा करने के बाद उन्हें छोटे-छोटे पिंजरों में रखा जाता है. और दिन नजदीक आने पर उन्हें बाहर निकालकर सजा दिया जाता है, जैसे वे जीते-जाते जानवर न होकर कोई फल-सब्जी हों. इंडिया टाइम्स की खबर की मानें तो इन दस दिनों में ही 10 हजार से ज्यादा कुत्ते मार दिए जाते हैं. वहीं पूरे साल में चीन में 10 से 20 मिलियन कुत्ते चीनी लोगों की जीभ की बलि चढ़ते हैं.

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मिलती हैं लीचियां और शराब भी
साल 2010 में शुरू हुए इस फेस्टिवल के लिए चीन के दूर-दराज से भी लोग आते हैं. यहां तक कि आसपास के सारे होटल बुक हो जाते हैं. माना जाता है कि इस फेस्टिवल के पीछे कोई प्राचीन काल की परंपरा नहीं, बल्कि मीट बेचने वालों ने ही गर्मियों में मीट की बिक्री कम होने पर ये फेस्टिवल शुरू किया था. ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए वे कम दामों पर अलग-अलग नस्ल के कुत्ते कम कीमत पर बेचते. साथ ही अलग-अलग तरीके से उन्हें पकाने का तरीका भी सिखाया जाता इसलिए जल्दी ही ये त्योहार मशहूर हो गया.

चीन के लोग इस मांस को 'Mutton of the Earth' कहते हैं (Photo-pixabay)


हालांकि लाखों की संख्या में बर्बरता से कुत्तों के मारे जाने के कारण लोग इसकी बुराई भी करने लगे. ये वैश्विक मुद्दा बन गया और दुनियाभर की पशुप्रेमी संस्थाएं इसपर सवाल करने लगीं. इसके बाद भी फेस्टिवल उतनी ही गति से चलता रहा.

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इस साल कोरोना की वजह से हाल ही में चीन ने डॉग मीट बैन किया. वहां के कृषि मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए कुत्तों की खरीद-फरोख्त पर रोक लग दी. इसके तहत वहां कुत्ते अब पालतू पशुओं की श्रेणी में आ गए हैं और सिर्फ आधिकारिक कारणों से ही उन्हें पालने और व्यापार की अनुमति मिल सकेगी. इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि कम से कम अब चीन के इस क्रूर त्योहार पर रोक लग सकेगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इस साल भी चीन के दक्षिण-पश्चिमी शहर यूलिन में कुत्तों का बाजार सज गया है और लोग आने भी लगे हैं.
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