कौन हैं काले कपड़ों में वे लोग, जिनसे घबराकर डोनाल्ड ट्रंप को बंकर में छिपना पड़ा

कौन हैं काले कपड़ों में वे लोग, जिनसे घबराकर डोनाल्ड ट्रंप को बंकर में छिपना पड़ा
सिर से पैर तक काले कपड़ों में ढंके रहने वाले Antifa के सदस्य चेहरे पर स्कार्फ या हेलमेट भी लगाए रखते हैं (Photo- cnn)

अक्सर सिर से पैर तक काले कपड़ों में ढंके रहने वाले Antifa के सदस्य चेहरे पर स्कार्फ या हेलमेट भी लगाए रखते हैं ताकि हिंसा (violence) के दौरान पुलिस उन्हें पहचान न ले.

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अश्वेत मूल के अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद अमेरिका में हिंसा (violence in America) भड़की हुई है. 29 मई की रात वाइट हाउस (White House) के सामने हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए और जॉर्ज के लिए इंसाफ की मांग करते दिखे. खतरे की आशंका को देखते हुए प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को खुफिया बंकर में छिपाना पड़ा. इसी बीच ट्रंप ने Antifa नाम के संगठन पर इंसाफ के नाम पर दंगे भड़काने और लूट का आरोप लगाते हुए उसे बैन करने की बात की है. जानिए, क्या है Antifa, जिसकी वजह से खुद अमेरिकी प्रेसिडेंट को छिपने पर मजबूर होना पड़ा.

अमेरिका में फासीवाद के विरोधी (anti-fascists) समूह को Antifa के नाम से जाना जाता है. एंटीफा ग्रुप की शुरुआत साल 1920 से 1930 के बीच मानी जाती है. वैसे अमेरिका में इसकी शुरुआत साल 1930 में हुई. मार्क ब्रे की किताब Antifa: The Anti-Fascist Handbook में इसका जिक्र मिलता है. अमेरिका में ये ग्रुप शुरुआत में अपने मकसद की वजह से एंटी-रेसिस्ट एक्शन ग्रुप कहलाता था. ये लोग नव-नाजी, फासीवाद और रंगभेद के खिलाफ खड़े रहने का दावा करते हैं.

खतरे की आशंका को देखते हुए प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को खुफिया बंकर में छिपाना पड़ा




साल 2000 से लेकर हाल के दिनों तक एंटीफा संगठन निष्क्रिय सा पड़ा रहा लेकिन ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से ये दोबारा एक्टिव दिखने लगा है. अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए इसके सदस्य ज्यादातर सरकार के विरोध में खड़े रहते हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं. हालांकि कई बार विरोध के दौरान ये हिंसक भी हो जाते हैं. यही वजह है कि फिलहाल ट्रंप इस अमेरिका के 30 राज्यों में फैली हिंसा के पीछे इस संगठन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.



किस तरह के लोग संगठन से जुड़ते हैं
इसके बारे में कोई खास जानकारी नहीं है लेकिन माना जाता है कि अधिकतर छात्र या छात्र संगठन इसमें खासे सक्रिय होते हैं. साथ ही अश्वेत लोगों के अधिकारों पर काम करने वाली संस्थाएं गुप्त रूप से इन्हें सहयोग करती हैं. वैसे किसी भी देश और खासकर अमेरिका में एंटीफा के सदस्य मुंह पर कपड़ा बांधकर या हेलमेट पहनकर प्रदर्शन करते हैं ताकि पुलिस की पकड़ाई में न आएं. आधिकारिक तौर पर इनका कोई नेता नहीं है, जिससे पुलिस बात कर सके.

हाल के दिनों तक एंटीफा संगठन निष्क्रिय सा पड़ा रहा लेकिन ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से ये एक्टिव दिखने लगा है (Photo- cnn)


वैसे महिला-पुरुषों के लिए भी इस संगठन में थोड़े अलग से नियम हैं. जैसे जब बात सड़क पर प्रदर्शन की आती है तो अधिकतर पुरुष ही होते हैं लेकिन अब महिलाएं भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने लगी हैं. उनका आरोप है कि वर्तमान अमेरिकी सरकार महिला-विरोधी है और इसलिए ही एंटीफा में महिलाओं का जुड़ना भी बहुत जरूरी है. बीबीसी की रिपोर्ट में एंटीफा ग्रुप Refuse Fascism की एक महिला सदस्य संसारा टेलर ने बताया कि महिलाएं अब उन तमाम मामलों पर बोलने के लिए तैयार हैं, जो उन्हें प्रभावित करता है.

एंटीफा सदस्य अक्सर सिर से पैर तक काले कपड़े पहने होते हैं. इसके पीछे भी खास वजह है. दरअसल वेस्ट जर्मनी में कोल्ड वॉर के दौरान इसकी शुरुआत हुई थी, तब विरोध प्रदर्शन का यही तरीका था. इस तरीके को "black bloc" के नाम से जाना जाता है. काले कपड़े चूंकि वेस्ट में काफी प्रचलित हैं तो काले कपड़े पहने हुए ये किसी मुसीबत में आसानी से तितर-बितर हो जाते हैं और दूसरे लोगों से मिल जाते हैं. यानी उनकी पहचान नहीं हो पाती है.

एंटीफा के विरोध का तरीका काफी अलग है (फोटो साभार- फोटोग्राफर डाई सुगानो/ Twitter)


एंटीफा के विरोध का तरीका काफी अलग है. वे किसी के विरोध के लिए उसकी सभा में जाते हैं और चीखने-चिल्लाने लगते हैं ताकि सभा भंग हो जाए. भगदड़ मचाना और ह्यूमन चेन बनाना भी इसकी एक रणनीति है. कई बार वे सोशल मीडिया पर अपने विरोधी की इमेज खराब करने के लिए उससे जुड़ी निजी बातें डालते हैं, जिसे "doxxing" कहते हैं. वैसे आमतौर पर शांतिप्रिय माने जाने वाले ये संगठन हिंसा के भी परहेज नहीं रखते और जरूरत पड़े तो अपने साथ मिर्च पावडर, चाकू, डंडे और ईंटें लेकर चलते हैं.

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