US Election 2020: क्यों बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

US Election 2020: क्यों बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?
चुनावी सर्वे में डोनाल्ड ट्रंप अपने विपक्षी से काफी पीछे दिख रहे हैं (Photo-cnbc)

चुनावी सर्वे में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)अपने विपक्षी जो बिडेन (Joe Biden) से काफी पीछे दिख रहे हैं. इसमें बड़ी वजह कमला हैरिस (Kamala Harris) भी मानी जा रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 24, 2020, 3:27 PM IST
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लगभग 8 हफ्तों में अमेरिका के लिए राष्ट्रपति पद की वोटिंग शुरू हो जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जो बिडेन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं. कोरोना के कारण खुलकर चुनाव प्रचार तो नहीं हो पा रहा लेकिन बाकी चुनावी हलचलें तेज हो गई हैं. दोनों को ही उनकी बातों और भाषण के आधार पर जांचा जा रहा है. इसी बीच कई रिपोर्ट्स आ रही हैं जो बताती हैं कि पद पर किसकी दावेदारी ज्यादा मजबूत दिख रही है. जानिए, डोनाल्ड ट्रंप बनाम जो बिडेन में कौन है मजबूत दावेदार.

कैसा है वहां का राजनैतिक परिदृश्य
वर्तमान राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ खड़े जो बिडेन को वैसे तो ओबामा के दौरान उनके उप-राष्ट्रपति के तौर पर ही याद किया जाता है. हालांकि राजनीति में बिडेन साल 1970 से हैं. इधर चुनाव से पहले ट्रंप के खिलाफ कई लोग हमलावर हो चुके हैं. इनमें परिवार के अलावा उनके साथ काम कर चुके लोग भी हैं. हालांकि अमेरिका में नेशनल पोल को देखने पर इसका सही अंदाजा होता है कि कौन सा उम्मीदवार कितना लोकप्रिय है. यही फिलहाल देखा भी जा रहा है.

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इसके मुताबिक बिडेन का अप्रूवल रेट 50 के पार जा रहा है. वहीं ट्रंप अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय हैं. वे 42 रेट के आसपास झूल रहे हैं. लेकिन नेशनल पोल के साथ भी कई समस्याएं हैं. उदाहरण के तौर पर साल 2016 में लगातार विपक्ष से खड़ी हिलेरी क्लिंटन पूरे समय आगे दिखती रहीं लेकिन जीत ट्रंप की हुई.



इधर चुनाव से पहले ट्रंप के खिलाफ कई लोग हमलावर हो चुके हैं (Photo-pixabay)


क्या कहती है रेटिंग
सीएनएन के सर्वे में भी बिडेन ट्रंप से आगे दिख रहे हैं. SQL Server Reporting Services (SSRS) की मदद से हुए इस सर्वे के अनुसार ट्रंप को जहां 42 प्रतिशत वोटर ही सपोर्ट कर रहे हैं, वहीं बिडेन उनसे 10 प्रतिशत आगे हैं. इस तरह के 6 टेलीफोनिक सर्वे हुए. इनमें से दो सर्वे बिडेन द्वारा कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद का दावेदार बनाने को लेकर भी थे.

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हैरिस के आने से बढ़ी लोकप्रियता
बता दें कि कमला हैरिस के आने के बाद से बिडेन की लोकप्रियता और भी तेजी से बढ़ी, जो बीच-बीच में अस्थित होती लग रही थी. बिडेन का खासतौर पर ये कदम 50 प्रतिशत से ज्यादा वोटरों को पसंद आया. खुद डेमोक्रेट्स में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग ये मानते नजर आए कि हैरिस को चुनाव में लाना सकारात्मक दांव रहेगा.

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मनीकंट्रोल ने सीएनएन की एक खबर से हवाले से इसपर एक रिपोर्ट की. इसमें बताया गया है कि कैसे 54 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटरों ने ट्रंप के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया दी. दूसरे सर्वे में भी इसी तरह के रुझान दिख रहे हैं. वॉशिंगटन पोस्ट और एबीसी न्यूज पोल के मुताबिक ट्रंप की रेटिंग 43 प्रतिशत अप्रूवल तक सिमटी हुई दिखी. वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल और फॉक्स न्यूज के अनुसार ट्रंप के लिए ये प्रतिशत 44 तक जा रहा है.

एक सर्वे में लगभग 54 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटरों ने ट्रंप के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया दी
एक सर्वे में लगभग 54 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटरों ने ट्रंप के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया दी


रिपब्लिकन्स के गढ़ में भी बिडेन आगे
जून के बाद से लगभग हर एजेंसी की रेटिंग में जो बिडेन ने लीड ली है, इसके अलावा वो ऐसे राज्यों में भी बढ़त बना रहे हैं जिन्हें वाइट पावर हाउस माना जाता है. यानी वो स्टेट्स जिन्हें रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है. इन स्टेट्स में फ्लोरिडा, टेक्सास, जॉर्जिया जैसे राज्य हैं. कोरोना वायरस के मामले में नाकामयाबी को भी ट्रंप के पीछे रहने की एक वजह माना जा रहा है. साथ ही कुछ महीनों पहले अश्वेत मूल के व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से लोग ट्रंप की सत्ता को नस्लभेदी मानते दिख रहे हैं और कथित तौर पर उनसे दूरी बना रहे हैं.

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भारतीय मूल के वोटर होंगे अहम
वैसे इस राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय मूल के अमेरिकी वोटर भी बड़ी भूमिका में रहेंगे. अमेरिका में प्रवासी मामलों के संस्थान माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट का कहना है कि बीते तीन दशकों में अमेरिका में भारतीय अमेरिकियों की संख्या तेजी से बढ़ी. अस्सी के दशक में पहली बार भारतीय अमेरिकी वोटरों की गणना जनसंख्या के तहत हुई थी. इसके बाद से उनकी आबादी बढ़ती गई. बता दें कि अमेरिका की आबादी लगभग 32.82 करोड़ है. जबकि इनमें अप्रवासियों की संख्या 4.5 करोड़ के आसपास है, जो कुल आबादी का करीब 14% हिस्सा है.

बिडेन ने बड़ा दांव खेलते हुए उप-राष्ट्रपति पद के लिए भारतवंशी कमला हैरिस को खड़ा कर दिया (Photo-flickr)
बिडेन ने बड़ा दांव खेलते हुए उप-राष्ट्रपति पद के लिए भारतवंशी कमला हैरिस को खड़ा कर दिया (Photo-flickr)


बड़ी और प्रभावशाली आबादी भारतीयों की
साल 2010 से 2017 के बीच अमेरिका में कुल 8 लाख भारतीय अप्रवासी जाकर बस गए. ये दूसरे देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है. अमेरिका पहुंचने वाले सबसे ज्यादा अप्रवासियों में पहला स्थान चीन का है. वहां 28 लाख से ज्यादा अप्रवासी मौजूद है. जबकि दूसरे नंबर पर भारतीयों की तादाद है, जो करीब 26 से ज्यादा है. अमेरिका में मौजूद हर 6 अप्रवासी में 1 भारतीय है. ये एक बड़ा कारण है, जो राष्ट्रपति चुनाव में रिजल्ट में उलटफेर कर सकता है.

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भारतीय मूल के अमेरिकी वोटर वहां काफी प्रभावशाली पदों पर भी हैं. वे केवल आईटी ही नहीं, बल्कि होटल, मेडिकल और रिसर्च तक में अपने झंडे गाड़ चुके हैं. यहां तक कि राजनीति में तुरुप का पत्ता कहलाती कमला हैरिस की मां भी भारतीय थीं. ऐसे में भारतीय वोटरों की राजनैतिक सोच बड़ी आबादी पर असर डाल सकती है.
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