क्या Trump का नया प्रस्ताव आपके लिए भी US जाना आसान कर देगा?

क्या Trump का नया प्रस्ताव आपके लिए भी US जाना आसान कर देगा?
ट्रंप ने इमिग्रेशन को लेकर एग्जीक्यूटिव ऑर्डर लाने का जिक्र किया है (Photo-pixabay)

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के 'Merit-Based' सिस्टम से उन सबको फायदा होगा, जो पढ़े-लिखे हैं, अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ है और जो अमेरिका जाना चाहते हों.

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प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के आदेश पर वाइट हाउस (White House) योग्यता के आधार पर इमिग्रेशन पर काम कर रहा है. खुद ट्रंप ने इमिग्रेशन को लेकर एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (executive order on immigration) लाने का जिक्र किया है. माना जा रहा है कि ये काफी बड़ा बिल होगा, जिससे शिक्षित और स्किल्ड लोगों को काफी लोगों को फायदा हो सकता है. वहीं इससे परिवार के आधार पर अमेरिका में बसने के सपने टूट सकते हैं. जानिए, क्या है ट्रंप का मेरिट-बेस्ट इमिग्रेशन का प्रस्ताव (proposal on merit-based immigration) और इससे किन-किन लोगों को हो सकता है फायदा.

ट्रंप का ये प्रस्ताव अमेरिका में आधी सदी से ज्यादा वक्त से चले आ रहे इमिग्रेशन सिस्टम को खत्म कर सकता है. असल में साठ के दशक की शुरुआत के साथ ही अमेरिका में इमिग्रेशन सिस्टम इस तरीके पर आधारित है, जिसके तहत अगर परिवार का कोई अहम सदस्य वहां का नागरिक है, तो परिवार के दूसरे सदस्यों को अमेरिका आने को प्राथमिकता मिलती है. हालांकि ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ के तुरंत बाद ही इस नियम की बजाए ऐसा नियम लाने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें उन लोगों को अमेरिका आने में प्राथमिकता दी जाए जो बेहतर श्रमिक हैं. यानी जिनके पास योग्यता है. इसे ही मेरिट बेस्ड इमिग्रेशन कहा जा रहा है.

ट्रंप का ये प्रस्ताव अमेरिका में आधी सदी से ज्यादा वक्त से चले आ रहे इमिग्रेशन सिस्टम को खत्म कर सकता है




इस प्रस्ताव के पीछे ट्रंप और उनके सहयोगियों का मानना है कि नए और बेहतर लोगों के आने से अमेरिका में काम की स्थिति बेहतर होगी. वहीं पुराने परिवार को प्रथमिकता देने वाले सिस्टम की वजह से कम बेहतर लोग आया करते थे. काम के दौरान अनुभव या योग्यता न होने के कारण उन्हें मदद की जरूरत होती थी. ट्रंप का तर्क है कि पुराने सिस्टम के कारण टैक्स पेयर्स पर भी टैक्स का बड़ा दबाव रहता है क्योंकि एक बड़ा तबका योग्यता न होने के कारण आर्थिक तौर पर कमजोर ही रहता है.
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मेरिट बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम को पॉइंट बेस्ड सिस्टम भी कहते हैं. इसमें अमेरिका आने और काम करने या नागरिकता के लिए आवेदन के लिए कैंडिडेट के पास खास योग्यताएं होनी चाहिए. जैसे उसकी एजुकेशन अच्छी हो. उसे अंग्रेजी भाषा में कोई दिक्कत न हो. साथ ही कैंडिडेट का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए. इन बातों के आधार पर उसे पॉइंट्स मिलेंगे. अब तक कई देशों में मेरिट बेस्ट इमिग्रेशन सिस्टम माना जा रहा है. इसमें ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया इन सारे देशों में सबसे आगे और सबसे ज्यादा अनुभवी हैं. यही वजह है कि मेरिट बेस्ट सिस्टम शुरू करने को तैयार कई देश इनसे सलाह लेते या इनका सिस्टम फॉलो करते हैं.

मेरिट बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम को पॉइंट बेस्ड सिस्टम भी कहते हैं (Photo-pixabay)


कनाडा में साल 1967 में पॉइंट बेस्ट इमिग्रेशन सिस्टम शुरू हुआ. पहले कनाडा में उन लोगों को आने दिया जाता था, जिनके परिवार का कोई सदस्य वहां का नागरिक हो. कई देशों के लोगों को भी कनाडा की नागरिकता मिलने में आसानी होती थी. धीरे-धीरे वहां कम योग्य लोगों की वर्कप्लेस पर भरमार हो गई. तब मेरिड बेस्ड शुरुआत हुई. इसमें पढ़े-लिखे, बिना क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले ऐसे युवाओं को प्राथमिकता मिलने लगी, जिनकी अंग्रेजी या फ्रेंच पर पकड़ हो. कई खूबियों के कारण कनाडा के इस सिस्टम को सबसे ऊपर रखा जाता है. यूके में साल 2007 के बाद ये सिस्टम शुरू हुआ इसलिए फिलहाल ये उतना प्रभावी नहीं है.

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साल 2017 में ट्रंप ने भी पॉइंट बेस्ड इमिग्रेशन का प्रस्ताव दिया. एक तबका इसके पक्ष में है क्योंकि इससे देश में युवा और ज्यादा बेहतर स्किल वाले लोगों के आने का रास्ता खुलेगा. वहीं दूसरी ओर बहुत से लोग इसके विरोध में हैं क्योंकि वे मानते हैं कि जिनके परिवार के लोग अमेरिकी नागरिक हैं, उन परिवारों को देश आने के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

इससे देश में युवा और ज्यादा बेहतर स्किल वाले लोगों के आने का रास्ता खुलेगा (Photo-pixabay)


नए प्रस्ताव के तहत एक फाइनेंशियल ईयर में 140,000 लोगों को वीजा मिल सकेगा, जिनमें योग्यता रखने वाले लोगों के साथ-साथ वे महिला-पुरुष और नाबालिक भी शामिल होंगे, जिनके परिवार का एक अहम सदस्य अमेरिका में हो. इसमें उन लोगों को भी तवज्जो मिलेगी, जिनकी पढ़ाई यूएस में हुई हो या फिर जो STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग या मैथमेटिक्स में पढ़े हुए हों.

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हालांकि इससे उन लोगों को सीधा नुकसान होगा, जो वैसे तो योग्य हों लेकिन जिनकी अंग्रेजी पर पकड़ कमजोर हो. या फिर ऐसे लोग जो अनस्किल्ड काम से जुड़े हों. चूंकि स्किल्ड लेबर के लिए अमेरिका युवाओं को प्राथमिकता देगा, लिहाजा इससे अधेड़ या बड़ी उम्र के लोगों के लिए अमेरिकी वीजा का रास्ता बंद हो जाएगा.

साल 1917 में सरकार ने अमेरिका आने वालों के लिए साक्षरता टेस्ट अनिवार्य किया था (Photo-pixabay)


वैसे इससे पहले भी यूएस में छोटे-स्तर पर मेरिट बेस्ड सिस्टम की बात हो चुकी है. साल 1917 में इसका सबसे पहला प्रमाण मिलता है. तब सरकार ने अमेरिका आने वालों के लिए साक्षरता टेस्ट अनिवार्य किया था. साल 1960 में ये नियम हटा लिया गया. इसके पीछे तर्क था कि इससे नॉन-यूरोपियन या गरीब देशों के लोगों को अमेरिका आने का मौका नहीं मिल पाता है. तभी family-preference system की शुरुआत हुई, जिसमें परिवार के एक व्यक्ति के जरिए बाकी लोग भी अमेरिका आने लगे. इससे यूएस में बहु-संस्कृति की बजाए लैटिन अमेरिकी और एशियन लोग ज्यादा हो गए.

साल 2015 में माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट की एक रिसर्च में 1 मिलियन लीगल परमानेंट निवासियों से बात में साफ हुआ कि 44 प्रतिशत वे लोग हैं, जिसके परिवार का अहम सदस्य यूएस का नागरिक है. 20 प्रतिशत वे हैं, जो फैमिली प्रेफरेंस सिस्टम के कारण आ सके. वहीं सिर्फ 14 प्रतिशत वे लोग थे, जिन्हें काम की वजह से यूएस आने मिला. अब माना जा रहा है कि अगर ट्रंप का मेरिड बेस्ट प्रस्ताव पारित हो सका तो अमेरिका में युवा, पढ़े-लिखे और बेहतर कामकाज जानने वालों की संख्या बढ़ सकेगी.
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