जब छिड़ेगा परमाणु युद्ध, तब यूं सुरक्षित रहेंगे रूस-अमेरिका के राष्ट्रपति

अमेरिका और रूस ने ऐसे आधुनिक विमान तैयार कर लिए हैं, जो परमाणु युद्ध जैसे हालात में अपने राष्ट्रपतियों को सुरक्षित बचाकर ले जाएंगे.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 9:05 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 9:05 PM IST
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने हाल ही में फिर चेतावनी दी है कि परमाणु युद्ध नजदीक है. दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है. वैसे किसी भी परमाणु युद्ध के छिड़ने पर अमेरिका और रूस ने अपने प्रेसीडेंट्स को बचाने की पुख्ता व्यवस्था कर ली है. रूस ने हाल ही में एक ऐसा प्लेन तैयार किया है, जो पूरी तरह एटामिक वार से सुरक्षित है. इसी तरह के दो विमान अमेरिका ने भी बना रखे हैं.

रूस ने एक ऐसा प्लेन तैयार किया है, जो परमाणु युद्ध का खतरा देखते ही अपने प्रेसीडेंट्स के साथ सेना के बड़े अधिकारियों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर उड़ जाएगा. यही नहीं ये ऐसा विमान होगा, जिसके जरिए प्रेसीडेंट और सैन्य अफसर पूरे युद्ध की कमांड को इसी प्लेन से कंट्रोल कर पाएंगे.



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ऐसी प्रणाली दुनिया में अब तक महज दो ही देशों के पास है-रूस और अमेरिका. ये सेंटर न केवल परमाणु युद्ध की सूरत में न केवल समस्त सेनाओं के लिए कंट्रोल रूम में बदल जाएगा बल्कि सुरक्षा प्रणाली के रूप में भी काम करेगा. ये सिस्टम तब खासकर महत्वपूर्ण हो जाता है जबकि आपकी मैदानी संरचना में बाधा पहुंचती है. मैदानी संचार प्रणाली काम करना बंद कर देती है.

इल्यूशिन प्लेन, जो बन जाएगा कंट्रोल रूम
नेक्स्ट जेनरेशन के इस प्लेन का नाम इल्यूशिन आईएल-80 है. ये इतना आधुनिक है कि इसके जरिए रूस की पूरी सेना के हर कमांड को कंट्रोल किया जा सकेगा. इल्यूतशिन रूसी एयर फोर्स की सेवा में दिया जा चुका है. इसे नाटो देश मैक्सडोम के नाम से जानते हैं. रूसी इसे डूम्सडे प्लेन कहते हैं यानी प्रलय के दिन का विमान.

हवा में उड़ान भरता हुआ रूस का सबसे महत्वपूर्ण सैन्य विमान, जिसे परमाणु युद्ध की दृष्टि से तैयार किया गया है

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रूस ने इसी सीरीज के कुछ विमान पहले भी बनाए हैं लेकिन उनमें सबसे आधुनिक है. माना जा रहा है कि इसे सक्रिय सेवा में रूस की एयरफोर्स को दिया जा चुका है. इसकी जबरदस्त देखरेख और परीक्षण लगातार होता रहता है.

परमाणु युद्ध में कोई आंच नहीं आएगी इस पर 
बताया जाता है रूस ने इस सीरीज के शुरुआती विमान 80 के दशक में तैयार किए थे लेकिन ये एकदम अनोखा है. इसमें पूरी कवायद ही इस तरह की गई है कि अगर परमाणु युद्ध छिड़ चुका हो तो इस विमान पर आंच तक नहीं आए और ये परमाणु विस्फोट से होने वाली रेडिएशऩ के साथ गरमी से बचा रहे.

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ब्रिटेन के अखबार " द मिरर" की एक रिपोर्ट के अनुसार ये विमान मास्को के करीब चालोस्की एयरपोर्ट पर खड़ा रहता है और स्पेशल परपज एविएशन डिविजन की सुपुदर्गी में है. यानी इसके आसपास और अंदर केवल उच्च रूसी अधिकारी ही जा सकते हैं.

रूस के इस खास विमान में राष्ट्रपति के साथ उच्च सैन्य अधिकारी और वो लोग बैठेंगे, जो मिलिट्री कमांड के एक्सपर्ट होंगे


विमान में कोई बाहरी खिड़की नहीं 
इस विमान में कॉकपिट को छोड़कर कोई बाहरी खिड़की नहीं है. इसमें डोम है और ऐसी क्षमता की कोई भी परमाणु लहर इस पर कोई असर नहीं करेगी. खबरें बताती हैं कि इल्यूशिन-आईएल-80 एयरक्राफ्ट के जरिए डूम्जडे फ्लाइंग कमांड सेंटर का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है.

किसी भी तरह के युद्ध के लिए रूस तैयार 
रूस का विमान ये संकेत भी कि वो किसी तरह के युद्ध के लिए तैयार है. इस उड़ते हुए कमांड सेंटर में सीनियर जनरल, सैन्य अधिकारी और तकनीककर्मी होंगे. नाटो देशों की चिंता ये भी है कि ये विमान अदृश्य भी हो सकता है यानि किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आएगा, शायद हवा में उड़ते हुए इसे देखा भी नहीं जा सकेगा.

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अमेरिकी एयरफोर्स के पास भी ऐसा विमान
बताते हैं कि अमेरिका की एयरफोर्स के पास भी ऐसा विमान पहले से है, जिसे ई-4बी बताया जाता है. ये बोइंग 747 -200 का मॉडीफाइड रूप है. इसमें ऐसी पूरी सुविधाएं हैं, जिसमें परमाणु युद्ध होने की सूरत में सभी तरह के सैन्य आपरेशंस की पूरी कमांड विमान में पहुंच जाएगी. इस विमान पर भी सवार होने वालों में वहां के प्रेसीडेंट, रक्षामंत्री और बड़े सैन्य अफसर होंगे.

अमेरिका के पास भी इसका जवाब अत्याधुनिक और उन्नत ई-4 के रूप में है, जो न्यूक्लियर वार की सूरत में हवा में सेंटर कमांड बनने की क्षमता रखता है


अमेरिका ने बहुत पहले ऐसे विमान की तैयारी कर ली थी
अमेरिका में इस तरह के प्लेन को आधिकारिक तौर पर नेशनल एयरबोर्न आपरेशंस सेंटर के नाम से जाना जाता है. 70 के दशक में जब सोवियत संघ और अमेरिका के बीच कोल्ड वार छिड़ा हुआ था, तभी से अमेरिका ऐसे विमान की तैयारी में लग गया था. वो एक ऐसा प्लेन बनाना चाहते थे, जिसमें किसी भी तरह के परमाणु युद्ध की स्थिति में राष्ट्रपति सुरक्षित रहे. अमेरिका ने भी इस तरह के विमान को ऐसे डूम्सडे प्लेन के रूप में देखा है जो उड़ते हुए वार रूम का काम करेंगे, इसमें दर्जनों सैन्य एनालिस्ट, स्ट्रैटजिस्ट और कम्युनिकेशन सहायक मदद के लिए हर पल काम करते रहेंगे.

अमेरिका के पास इसी तरह के कुछ और विमान भी हैं, जिसमें बोइंग ई-6मर्करी, नार्थ्रोप ग्रुमन ई-10एमसी2ए शामिल है.

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