जानिए कौन सा ब्रेन है लड़ाकू विमान तेजस के पीछे

तेजस स्वदेशी विमान न केवल देश की सेना को मजबूती दे रहा है, बल्कि विदेशों में भी इसके चर्चे हैं

तब पोखरण परमाणु परीक्षण (Pokhran nuclear test) के कारण बौखलाए अमेरिका और जापान ने भारत पर कई पाबंदियां लगा रखी थीं और एलान कर दिया था कि देश कभी अपने दम पर हल्के लड़ाकू विमान (light combat aircraft) नहीं बना सकेगा. तभी बना तेजस (Tejas).

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    अपने सैन्य भंडार को अत्याधुनिक बनाने के लिए भारत कई देशों पर निर्भर रहा था लेकिन लड़ाकू विमान तेजस का आना बदलाव की शुरुआत है. इस स्वदेशी विमान के विदेशों में भी चर्चे हैं. जंग के मैदान में कहर बरपाने की क्षमता रखने वाले तेजस के निर्माण के पीछे जिस वैज्ञानिक का हाथ है, वो हैं डॉ. कोटा हरिनारायण (Dr. Kota Harinarayana). उन्होंने अमेरिका की वो भविष्यवाणी गलत साबित कर दी, जिसके मुताबिक भारत कभी हल्के लड़ाकू विमान नहीं बना सकता था.

    अमेरिका ने भारत पर किया व्यंग्य
    ये दिसंबर 2000 की बात है, जब एक अमेरिकी मैग्जीन ने लिखा था कि देश कभी भी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) नहीं बना सकेगा, बल्कि इसके लिए दूसरे देशों पर ही निर्भर रहेगा. इसकी वजह तकनीक को बताया गया. इसके कुछ दिनों बाद ही 4 जनवरी 2001 को डॉ कोटा हरिनारायण ने नेतृत्व में एक टीम ने ये कर दिखाया. इस तरह से तेजस की उड़ान को पंख देने वाले डॉ हरिनारायण के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते. तो आइए, एक बार तेजस निर्माता के बारे में जानें.

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    डॉ. कोटा हरिनारायण (Photo- news18 English via YouTube)


    कौन हैं डॉ हरिनारायण 
    ओडिशा के जिले बहरामपुर के छोटे से गांव में साल 1943 में जन्मे हरिनारायण ने स्कूली पढ़ाई के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली. पढ़ाई में काफी मेधावी इस स्टूडेंट के सामने यहीं से सुरक्षित भविष्य की शुरुआत हो सकती थी लेकिन वे यहां नहीं रुके, बल्कि एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बेंगलुरु पहुंच गए. भारतीय विज्ञान संस्थान में पढ़ाई के बाद वे बेंगलुरू स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में काम करने लगे.

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    विशेषज्ञों को था पीछे रहने का डर 
    डॉ हरिनारायण की यहां तक की कहानी किसी आम मेधावी छात्र जैसी है, जो पढ़ाई में आगे होते हुए मजबूत करियर की शुरुआत करता है लेकिन ये यहीं खत्म नहीं होती. आगे ये शख्स देश की सैन्य मजबूती में अपना योगदान देता है. इसके तार देश के उस असमंजस से जुड़े हुए हैं, जब विशेषज्ञों की टीम हार मानने लगी थी. तेजस या फिर किसी भी हल्के लड़ाकू विमान के निर्माण में लगी टीम का मानना था कि जब तक देसी विमान तैयार होगा, दुनिया कहीं आगे जा चुकी होगी और हम आधुनिकता के स्तर पर पीछे छूट जाएंगे.

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    लड़ाकू विमान जो अभी सुनने में आम लगने लगे हैं, उस दौरान उनका निर्माण कई मुश्किलों से गुजरा


    ऐसे जुड़ा तेजस से नाता
    उस समय कोई अकेला शोध संस्थान इतना विकसित नहीं था कि तेजस का निर्माण कर सके. लिहाजा एरोनॉटिकल डेवललपमेंट एजेंसी ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ करार कर लिया ताकि मिलकर हल्का लड़ाकू विमान तैयार हो सके. यहीं से डॉ हरिनारायण की भूमिका शुरू हुई. उस समय वीएस अरुणाचलम रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार थे. उन्होंने ही डॉ हरिनारायण को स्वदेशी विमान कार्यक्रम के डायरेक्टर के रूप में चुना. ये साल 1984 की घटना है.

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    कई मुश्किलों से गुजरा निर्माण कार्य 

    लड़ाकू विमान जो अभी सुनने में काफी आम लगने लगे हैं, उस दौरान उनका निर्माण कई मुश्किलों से गुजरा. सबसे पहले एक योग्य टीम तैयार की गई. इसके बाद आई तेजी से काम करने वाले कंप्यूटरों की जरूरत. इसके लिए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन से बातचीत हुई और वे जैसे-तैसे आइबीएम 390 कंप्यूटर देने के लिए राजी हुए.

    परमाणु परीक्षण से गुस्साई दुनिया 
    काम चल ही निकला था कि तभी साल 1990 में पोखरण परमाणु परीक्षण हुआ. इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिक गईं. तब भारत को एक कमजोर देश की तरह देखा जाता था, नतीजा ये हुआ कि उसपर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गईं. लेकिन डॉ हरिनारायण की टीम ने हार नहीं मानी और काम करते ही रहे.

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    डॉ कोटा हरिनारायण ने भारत की विमान निर्माण इंडस्ट्री में कई जरूरी बदलाव करवाए (Photo- Facebook)


    साल 2001 में अभियान को बड़ी सफलता मिली
    इसके बाद से तेजस में लगातार बेहतर बदलाव हो रहे हैं. साल 2016 में बहरीन में इंटरनेशनल एयर शो के दौरान तेजस की वाहवाही दुनियाभर में होने लगी, जब इसने लगभग 1,954 घंटे बिना किसी छोटी दुर्घटना के भी उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया. इसका सारा श्रेय डॉ हरिनारायण को जाता है, जिन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर न केवल पहला हल्का लड़ाकू विमान बनाया, बल्कि भारत की विमान निर्माण इंडस्ट्री में कई जरूरी बदलाव करवाए.

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    एक बार तेजस के बारे में भी जानते चलें
    तेजस कार्बन फाइबर से बना है. इसकी वजह से इसका वजन काफी कम है. इसका कुल वजन 6,560 किलोग्राम है. ये 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. तेजस के पंख 8.2 मीटर चौड़े हैं. ये कुल 13.2 मीटर लंबा और 4.4 मीटर ऊंचा है. ये 1350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. तेजस ने अरेस्टेड लैंडिंग टेस्ट पास किया है. इस टेस्ट को पास करने वाले लड़ाकू विमान युद्धपोत पर भी उतर सकते हैं. ये अब तक करीब 3 हजार से ज्यादा उड़ानें भर चुका है.

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