कौन हैं द्रविड़, जिनका जिक्र दक्षिण भारत की राजनीति में अक्सर आता है?

दक्षिण भारत के राजनेता जब-तब द्रविड़ और आर्य जैसी बातें करते रहे हैं- सांकेतिक फोटो

दक्षिण भारत के राजनेता जब-तब द्रविड़ और आर्य जैसी बातें करते रहे हैं- सांकेतिक फोटो

Tamil Nadu Assembly election 2021: अभिनेता से नेता बने कमल हासन (Kamal Haasan) चुनाव प्रचार के दौरान कई बार द्रविड़ शब्द (Dravidian movement in South India) कह चुके हैं. इससे पहले भी दक्षिण भारत के राजनेता जब-तब द्रविड़ और आर्य जैसी बातें करते रहे हैं.

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मक्कल निधि मैयम (एमएनएम) पार्टी के नेता कमल हासन तमिलनाडु के कोयंबटूर से चुनाव लड़ रहे हैं. इस बीच दूसरे एजेंडा के बीच वो कई बार द्रविड़ शब्द का जिक्र कर चुके. वैसे द्रविड़ शब्द दक्षिण भारत की राजनीति में नया नहीं, बल्कि वहां चालीस के दशक में बाकायदा द्रविड़ आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसने दक्षिण में कई दिग्गज नेताओं को जन्म दिया. देश के इस हिस्से से इतर भी द्रविड़ शब्द कई बार चर्चा में आता रहा है.

क्या कहता है जानकारों का एक धड़ा

द्रविड़ सभ्यता पर इतिहासकार सदियों से शोध कर रहे हैं और हरेक का अपना मत है. उनका एक तबका मानता है कि द्रविड़ भारत की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से है, जो पहले उत्तर और दक्षिण भारत दोनों ही हिस्सों में फैली हुई थी. बाद में उत्तरी क्षेत्र के द्रविड़ मेसापोटामिया (अब ईरान और आसपास) की तरफ चले गए. मध्य में वे बलूचिस्तान, अफगानिस्तान की ओर रुके और कुछ लोग वहीं रह गए. वहां का ब्राहुई समुदाय द्रविड़ सभ्यता से जन्मा माना जाता है, जिनकी भाषा तमिल, तेलुगु से मिलती-जुलती है.

tamil nadu election 2021
अभिनेता से नेता बने कमल हासन कोयंबटूर से चुनाव लड़ रहे हैं

द्रविड़ियन भाषा का जन्म 

उत्तर से तो द्रविड़ हटकर दुनिया के दूसरे हिस्सों तक चले गए लेकिन दक्षिणी भारत में ये सभ्यता वहीं जमी रही. आज भी दक्षिण में तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम भाषा-संस्कृति वाले लोगों को द्रविड़ और उनकी भाषाओं को द्रविड़ियन भाषा कहा जाता है. इन भाषाओं का जन्म संस्कृत से नहीं हुआ, बल्कि ये प्राचीन भाषाएं हैं. टी.पी. मीनाक्षी सुंदरन ने तमिल भाषा का इतिहास बताते हुए भौगोलिक क्षेत्रों के बारे में यही बताया था. उनके अलावा कई इतिहासकार द्रविड़ों को दक्षिण से जुड़ा बताते रहे.

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दूसरी थ्योरी, पहली का खंडन करती है 

वहीं एक दूसरी थ्योरी भी है, जो आर्यन इन्वेजन थ्योरी को गलत बताती है. दरअसल पहले सिद्धांत में कहा गया कि उत्तर भारत से द्रविड़ों का हटकर विदेशों की ओर बढ़ना कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि आर्यों ने हमला करके उन्हें वहां से हटाया था. इसे ही आर्यन इन्वेजन कहते हैं. लेकिन बाद में कई ऐसे प्रमाण मिले जो बताने लगे कि आर्य किसी एक सभ्यता नहीं, बल्कि विचारधारा से प्रेरित समुदाय था, जो वाकई में प्राचीन भारत से संबंध रखता था.

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भाषा की बात करें तो द्रविड़ परिवार की भाषा उत्तर से अलग है

क्या कहते हैं शोध

इसे समझने के लिए फिनलैंड समेत कई देशों में भारतीयों के डीएनए पर आधारित शोध हुए. इस दौरान पाया गया कि सभी भारतीयों का गुणसूत्र लगभग समान है यानी सभी एक ही पूर्वजों की संतान हैं. यहां तक कि आर्य और द्रविड़ का कोई भेद गुणसूत्रों के आधार पर नहीं मिलता है, जैसा कि बहुत से जानकार कहते रहे हैं कि आर्य बाहरी हैं, जबकि केवल द्रविड़ ही भारत के मूल निवासी हैं. कुछ ऐसी ही बात सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के भूतपूर्व निदेशक और वैज्ञानिक लालजी सिंह ने भी की थी. इस दौरान देश के 13 राज्यों के 25 अलग-अलग जाति-समूहों के डीएनए का मिलान किया गया था.

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वास्तुकला में काफी अंतर

दूसरी ओर ये भी हकीकत है कि उत्तर और दक्षिण भारत के खानपान और भाषा-बोली को देखा जाए तो दोनों में काफी फर्क दिखता है. खासतौर पर किसी स्थान की पहचान उसके धार्मिक स्थल होते हैं, अगर ये मानकर देखा जाए तो दक्षिण भारत के मंदिरों की वास्तुकला उत्तरी इलाकों से एकदम अलग है. इसे द्रविड़ स्थापत्य शैली कहा जाता है. इस शैली में मंदिर का आधार भाग वर्गाकार होता है तथा गर्भगृह के ऊपर का शिखर भाग पिरामिड की तरह दिखता है. प्रांगण का मुख्य प्रवेश द्वार गोपुरम कहलाता है. अक्सर मंदिर प्रांगण में विशाल दीप स्तंभ दिखता है.

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दक्षिण में केवल खाना पकाने के तरीके और सामग्री में ही फर्क नहीं, बल्कि खाने के तरीके भी अलग हैं

भाषाएं और खानपान का अंतर

इसी तरह से भाषा की बात करें तो द्रविड़ परिवार की भाषा भी उत्तर से अलग है. इनमें मुख्यतः तमिल, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु आते हैं. इसके अलावा कई उपभाषाएं भी हैं लेकिन अधिकतर दक्षिण भारतीय यही भाषाएं बोलते हैं. साथ ही साथ खानपान में भी कई बातें हैं, जो दक्षिण भारत को उत्तर से अलग बनाती हैं. दक्षिण के खाने को द्रविड़ियन भोजन भी कहा जाता है, जिसमें केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश का भोजन दिखता है. यहां केवल खाना पकाने के तरीके और सामग्री में ही फर्क नहीं, बल्कि खाना खाने के तरीके भी अलग हैं.

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द्रविड़ आंदोलन का जन्म 

दक्षिण की राजनीति में द्रविड़वाद कुछ इस तरह पनपा कि इसे ब्राह्मणवादी सोच के खिलाफ आंदोलन का रूप दे दिया गया. माना जाने लगा कि आर्य यानी ब्राह्मण हैं जो गैर-ब्राह्मण संस्कृति के खिलाफ हैं. लिहाजा एक आंदोलन चल निकला, जिसकी अगुआई ईवीके रामास्‍वामी 'पेरियार' ने की थी. बाद में इस सोच को डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कडगम) ने ले लिया और द्रविड़ आंदोलन के जरिए ही राजनीति में पैर जमाए. इस तरह से दक्षिण की पॉलिटिक्स में जब-तब द्रविड़ शब्द आता रहा है.

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