लाइव टीवी

बिना पायलट के दुश्मन को यूं चकमा देता है DRDO का ड्रोन रुस्तम-2

News18Hindi
Updated: September 18, 2019, 12:34 PM IST
बिना पायलट के दुश्मन को यूं चकमा देता है DRDO का ड्रोन रुस्तम-2
रुस्तम-2

रुस्तम-2 (Rustom-2) को भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO) ने बनाया है. ये मानवरहित विमान है जो निगरानी से लेकर हमला करने तक में सक्षम है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2019, 12:34 PM IST
  • Share this:
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का एक अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) कर्नाटक में क्रैश हो गया. रुस्तम 2 (Rustom-2) नाम का ये मानव रहित विमान यानी यूएवी या जिसे ड्रोन भी कहते हैं, अपनी परीक्षण उड़ान पर था. उड़ान के दौरान ही चित्रदुर्ग जिले के जोडीचिकेनहल्ली में सुबह 6 बजे यह दुर्घटनाग्रस्त हुआ. रुस्तम 2 के साथ इस विमान को तापस बीएच-201 भी कहते हैं.

इसके पहले भी रुस्तम-2 का परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा चुका था. रुस्तम 2 को डीआरडीओ ने पूरी तरह स्वदेशी तौर पर विकसित किया है. ये ऐसा ड्रोन है, जो दुश्मन की निगरानी करने, जासूसी करने, दुश्मन ठिकानों की फोटो खींचने के साथ दुश्मन पर हमला करने में भी सक्षम है. अमेरिका आंतकियों पर हमले के लिए ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल करता रहा है. उसी तर्ज पर डीआरडीओ ने सेना में शामिल करने के लिए ऐसे ड्रोन बनाए हैं.



रुस्तम 2 ने फरवरी 2018, उसके बाद जुलाई में सफल परीक्षण उड़ान भरी थी. डीआरडीओ ने कहा था कि 2020 तक ये ड्रोन सेना में शामिल होने के लिए तैयार होंगे. रुस्तम- 2 अमेरिकी ड्रोन प्रिडेटर जैसा है. प्रिडेटर ड्रोन दुश्मन की निगरानी से लेकर हमला करने में सक्षम है.

कितना शक्तिशाली है रुस्तम-2

रुस्तम-2 को डीआरडीओ के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इसटैब्लिसमेंट (ADE) ने HAL के साथ पार्टनरशिप करके बनाया है. इसका वजन करीब 2 टन का है. विमान की लंबाई 9.5 मीटर की है. रुस्तम-2 के पंखे करीब 21 मीटर लंबे हैं. ये 224 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भर सकता है.

drdo combat rustom 2 unmanned aerial vehicle carshed know how this uav is important for indian military
रुस्तम-2 को DRDO ने पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर बनाया है

Loading...

रुस्तम-2 कई तरह के पेलोड्स ले जाने में सक्षम है. इसमें सिंथेटिक अपर्चर राडार, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम और सिचुएशनल अवेयरनेस पेलोड्स शामिल हैं.

यह 26 हजार फीट से लेकर 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है. रुस्तम-2 एक बार में करीब 1000 किमी की हवाई सफर कर सकता है.

रुस्तम-2 मे लगे कैमरे 250 किलोमीटर तक की रेंज में तस्वीरें ले सकते हैं. रुस्तम-2 यूएवी उड़ान के दौरान ज्यादा शोर नहीं करता है. इसलिए दुश्मन की नजर में आए बिना ये हमला करने में सक्षम है. कहा जाता है कि रुस्तम-2 का नाम साइंटिस्ट रुस्तम दमानिया के नाम पर रखा गया है.

drdo combat rustom 2 unmanned aerial vehicle carshed know how this uav is important for indian military
रुस्तम-2 को 2020 तक सेना में शामिल होना है


हमारी सेना के लिए क्यों खास है रुस्तम-2

डीआरडीओ ने रुस्तम-2 को यूएवी के 1500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से बनाया है. इसे वायुसेना और थलसेना के साथ नौसेना की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया है. ये पनडुब्बी से उड़ान भरने में भी सक्षम है. इसके जरिए सेना दुश्मनों की निगरानी कर सकती है. दुश्मन ठिकानों की जासूसी की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर इसके जरिए हमला भी किया जा सकता है.

बदलते वक्त की जरूरतों को देखते हुए जानकार बताते हैं कि सेना को रुस्तम-2 जैसे 400 ड्रोन्स की जरूरत है. जबकि अभी सेना के पास करीब 200 ड्रोन्स हैं.

ये भी पढ़ें: जानिए कहां से कपड़े खरीदते हैं पीएम मोदी? 15 दिलचस्प बातें
सुप्रीम कोर्ट में SC-ST एक्ट पर कानूनी जंग अब भी क्यों जारी है?
ऑड-ईवन स्कीम से कितना कम होता है प्रदूषण, जानें क्या कहती है स्टडी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 17, 2019, 12:02 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...