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    जानिए कैसे हमारी नींद की अवस्था के साथ बदलती है हमारे सपने की जटिलता

    शोध से पता चला है कि नींद (Sleep) की अवस्था और गुणवत्ता का असर सपनों (Dream) पर पड़ता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
    शोध से पता चला है कि नींद (Sleep) की अवस्था और गुणवत्ता का असर सपनों (Dream) पर पड़ता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    सपनों (Dreams) को लेकर अहम खोज में शोधकर्ताओं ने पाया है कि REM और गैर REM की दो अलग अवस्थाओं में अलग तरह के सपने आते हैं जिनका उन्होंने ग्राफ (Graph) के जरिये अध्ययन किया है

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 25, 2020, 6:59 PM IST
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    सपने (Dreams) हम सभी देखते हैं. यह भी सभी जानते हैं कि सपनों का नींद (Sleep) की गुणवत्ता (Quality) से भी नाता है. नए विश्लेषण के अनुसार हमारी नींद के विभिन्न चरणों (Stages) में बदलाव के साथ ही हमारे सपनों की गुणवत्ता और जटिलता तक में बदलाव आ जाता है. हाल ही में हुए अध्ययन में दो तरह की नींद की अवस्थाओं के सपनों का विश्लेषण (Analyssis) किया गया जिससे इन सपनों की गुणवत्ता में अंतर  के साथ इन्हें याद कर पाने की क्षमता को भी शामिल किया है.

    नींद की  अवस्थाओं के सपने
    21वीं सदी के पहले माना जाता था कि हम इंसानों को सपने आने की वजह उनके रैपिड आई मूवमेंट (REM) होता है.यानि हमें सपने तभी आते हैं जब हमें इस REM नींद में होते हैं. लेकिन हाल के शोधों में पता चला है कि लोगों को कई बार अपने सपनों की याद जग्रत अवस्था में भी ताजा हो जाती है. ऐसा तब भी होता है जब वे नींद की REM अवस्था में होते हैं.

    आसानी से याद रह जाते हैं सपने अगर
    नींद की इन दो अवस्थाओं में सपनों का आना क्या अलग बाते हैं, इस  बात की पड़ताल वैज्ञानिक अब भी कर रहे हैं.  PLOS ONE में प्राकशित शोध से पता चला है कि जब मरीज REM नींद से जागते हैं तो वे विस्तृत और साफ तरह से अपने सपने को याद रख पाते हैं. जागने के बाद वे बता पाते हैं कि उन्होंने सपने में क्या देखा था.



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    दो प्रकार की नींद (sleep) की अवस्थाओं के कारण सपनों (Dreams) की गुणवत्ता में भी बहुत अंतर आ जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    दूसरी अवस्था में
    वहीं शोध का कहना है कि जब लोग गैर REM अवस्था में  जागते हैं तो वे अपने सपने कम याद रख पाते हैं या फिर उन्हें अपने सपने कम याद रह पाते हैं और सपने भी एक तरह के विचार ही लगते हैं. REM अवस्था में देखे गए सपने प्रायः शब्दों में बयान किए जा सकते हैं. लेकिन लंबे समय में इनके बारे में बता पाना मुश्किल होता जाता है.

    इस उपकरण से ग्राफ के जरिए अध्ययन
    ब्राजील के शोधकर्तां ने एक नया उपकरण विकसित किया है जो तेज गति से विश्लेषण करते हुए इस तरह के मौकों पर रिपोर्ट बना सकता है और उन्हें एक ग्राफ के रूप में दिखा सकता है जिसमें लंबाई और भाषा दोनों का शामिल किया जा सकता है.

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    अंतर मापने की कोशिश
    साओ पाओलो यूनिवर्सिटी के न्यूरोविज्ञानी सिदार्ता रिबेइरो का कहना है, “हम जानते हैं REM नींद अवस्था में सपने लंबे होते हैं और एक फिल्म जैसे होते हैं. इस अध्ययन में विश्लेषण की प्रक्रिया का ऑटोमेशन कर के हमने पहली बार इस संरचनात्मक अंतर के मापन को संभव बनाया है.“ परंपरागत पद्धतियां शब्दों के अर्थों की व्याख्या करने पर निर्भर होते हं. लेकिन यह ग्राफीय विश्लेषण भाषा पर निर्भर नहीं है और यह  जो कहा जा रहा है उसकी टोन पर ध्यान केंद्रित करता है.

    रिपोर्ट में जटिलता
    शोधकर्ताओं ने 20 प्रतिभगियों के 133 सपनों की रिपोर्ट को देखा जो विभिन्न स्तर के सपनों की अवस्थाओं में जागे थे जिसके बाद उन्होंने अपने सपनों को याद करने की कोशिश की थी.  शोधकर्ताओं ने इस आधार पर उनका ग्राफ बनाया. शोधकर्ताओं ने पाया REM अवस्था की नींद की रिपोर्ट गैर REM नींद की अवस्था की रिपोर्ट की तुलना में ज्यादा जटिल होती हैं.

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    हम सपनों (Dreams) को फिर याद (Remember) कर पाते हैं या नहीं यह इस भी निर्भर करता है कि हम किस अवस्था में जाग रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    अध्ययन की अहमियत
    इस अध्ययन की इस लिहाज से ज्यादा अहमियत है कि सपनों के अध्ययन में कम्प्यूटेशनल पद्धतियां लागू की जा सकती हैं. यहां यह अध्ययन परम्परागत अध्ययन पद्धतियों से अलग है. शोधकर्ता अभी तक यह पता नहीं लगा सके हैं कि REM नींद आखिर क्यों और कैसे होती है. अगर इस अवस्था में नींद के सपने वाकई अलग प्रकार के होते हैं, जैसा कि यह शोध इंगित करता है, तो REM और गैर REM की नींद की अवस्था के सपनों के बनने के पीछे भी अलग प्रक्रिया होगी जिसकी हमारी बायोलॉजी में अलग भूमिका होगी.

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    शोधकर्ताओं ने पाया की REM अवस्था के सपनों की तुलना में दूसरी अवस्था सपने गहरे, धीमी नींद में और छोटे होते हैं. ये सपने छोटे होते हैं और बहुत कम याद आता है. इनकी तीव्रता कम होती है और विचार प्रधान ज्यादा होते हैं.
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