अब कैसे आपको बगैर टेस्ट के ही मिल जाएगा ड्राइविंग लाइसेंस?

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की तैयारी करते हुए अब लोगों को आरटीओ जाकर ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

भारत बढ़ते सड़क हादसों (road accidents in India) के कारण ड्राइविंग के लिए खतरनाक देशों में आता है. अब इसे ज्यादा सेफ बनाने के लिए नया नियम आ रहा है, जिससे ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत भी खत्म (driving license without test) हो जाएगी.

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    ड्राइविंग लाइसेंस (driving license) बनाने की तैयारी करते हुए अब लोगों को रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) जाकर ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं, बल्कि बगैर इस परीक्षा के डीएल बन सकेगा. सड़क हादसों को कम से कम करने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस तरह का बंदोबस्त किया है, जिससे लोग ड्राइविंग सेंटर पर जाकर गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग लेंगे. इसका उन्हें सर्टिफिकेट मिलेगा, जो किसी डीएल की तरह ही काम करेगा. हां, ये जरूर है कि जिस सेंटर पर आप ड्राइविंग सीख रहे हों, वो मान्यता प्राप्त हो.

    देश में रोड एक्सिडेंट 
    भारत में हर घंटे लगभग 53 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें हर 4 मिनट में एक मौत हो रही है. ये आंकड़ा वर्ल्ड बैंक (World Bank) का है. बता दें कि देश में दुनियाभर के वाहनों का केवल 1% है. इसके बाद भी सड़क हादसों में ग्लोबल डेथ के आंकड़े में हमारा योगदान 11% है. वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत सड़क हादसों में हुई मौतों के मामले में पहले स्थान पर है.

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    भारत में हर घंटे लगभग 53 सड़क हादसे हो रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    ये देश है ड्राइविंग के लिए सबसे खतरनाक 
    कई दूसरी रिपोर्ट्स ऐसी हैं, जिसमें ड्राइविंग के लिए खतरनाक देशों का क्रम बदल जाता है. दुनिया भर में ड्राइवर एजुकेशन उपलब्ध कराने वाली कंपनी जुटोबी ने एक स्टडी यही जानने के लिए की. इस दौरान 56 देशों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि दक्षिण अफ्रीका की सड़कें सबसे खतरनाक हैं. यहां रोड हादसे में मरने वालों की संख्या 57 फीसदी से ज्यादा है. यहां हर एक लाख ड्राइवर्स में मरने वालों की संख्या 36 है.

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    हादसे कम करने के लिए नया नियम आ रहा 
    डाटा जो भी कहे, हमारे यहां सड़क हादसों में लगातार बढ़त से इनकार नहीं किया जा सकता. एक्सिडेंट को कम से कम करने के लिए हाल में एक बड़ा नियम बना. इसके तहत लोगों को प्रॉपर ड्राइविंग स्कूल से गाड़ी चलाना सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसे संस्थानों के बारे में बात की है.

    मान्यता मिले हुए ये सेंटर लोगों को गाड़ी चलाने की पक्की ट्रेनिंग देंगे ताकि मुश्किल और तुरंत निर्णय लेने जैसे हालातों में ड्राइवर घबराकर कंट्रोल न खो दे. इस दौरान थ्योरी से लेकर प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा. साथ ही सेंटर अपने यहां ही लोगों से ड्राइविंग ट्रैक पर प्रैक्टिस करवाएंगे.

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    सेंटर लोगों को गाड़ी चलाने की पक्की ट्रेनिंग देंगे - सांकेतिक फोटो (pixabay)


    इस तरह का होगा ड्राइविंग कोर्स 
    सेंटरों पर नए लोग भी आ सकेंगे, जिन्हें ड्राइविंग की अ-ब-स तक न आती हो. साथ ही ऐसे लोग भी ट्रेनिंग ले सकेंगे, जो ड्राइविंग जानते तो हैं लेकिन जो इसे दोबारा रीफ्रैश करना चाहते हों. जैसे अगर किसी कस्बे में ड्राइविंग करता शख्स किसी बड़े शहर जा रहा हो तो वहां के ट्रैफिक में गाड़ी चलाने के लिए उसे बेहतर तैयारी चाहिए हो. तो इन सेंटरों पर ये सब होगा. इन्हें ‘रेमिडियल’ और ‘रिफ्रेशर’ सिलेबस कहा गया है.

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    टेस्ट पास करने के बाद सर्टिफिकेट 
    कोर्स के बाद ऐसा नहीं है कि आप ड्राइवर कहलाने लगेंगे, बल्कि इसके लिए आपको तमाम चरणों से गुजरना होगा, जैसे थ्योरी और प्रैक्टिकल. सेंटर पर ही ड्राइविंग ट्रैक होगी, जिसपर आपको गाड़ी चलानी होगी. परीक्षा में पास होने पर यहां भी सर्टिफिकेट मिलेगा. यही वो सर्टिफिकेट होगा, जो ड्राइविंग लाइसेंस का विकल्प होगा.

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    सेंटर पर ही ड्राइविंग ट्रैक होगी, जिसपर आपको गाड़ी चलानी होगी- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    ये नियम इसी साल जुलाई से लागू हो जाएगा. इसके बाद उन सेंटरों की पहचान की जाएगी, जो ड्राइविंग सिखाने के लिए सबसे बढ़िया हैं. जैसे जिन सेंटरों के पास अच्छे ट्रेनर, डाइविंग के लिए ट्रैक, बायोमैट्रिक सिस्टम समेत वो सारी सुविधाएं हों जो किसी गैर-जानकार को भी अच्छा ड्राइवर बना सकें.

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    सीखने वाले को घनी आबादी वाली गलियों जैसी जगहों से लेकर बिजी सड़क तक में ड्राइविंग करने लायक बनाया जाएगा. इसके बाद ही सर्टिफिकेट मिलेगा, जो ड्राइविंग लाइसेंस का काम करेगा.

    गाड़ी चलाने के लिए नॉर्वे सबसे सेफ 
    ड्राइविंग खराब होने के कारण होने वाले सड़क हादसों के बीच एक बार ये जानना भी जरूरी है कि कौन सा देश सबसे सेफ ड्राइविंग के लिए जाना जाता है. इस श्रेणी में नॉर्वे सबसे ऊपर है. वहां सालाना प्रति लाख की ड्राइविंग आबादी में से 2.7 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत होती है. इसकी वजह यहां के सख्त नियम-कायदे हैं. साथ ही यहां लोगों में सिविक सेंस ज्यादा है. लगभग 95 प्रतिशत लोग यहां सीट बेल्ट पहनकर ही गाड़ी चलाते हैं.

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