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जानिए, दुनियाभर में किन दवाओं से हो रहा है कोरोना का इलाज

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Updated: March 28, 2020, 5:56 PM IST
जानिए, दुनियाभर में किन दवाओं से हो रहा है कोरोना का इलाज
ज्यादातर देशों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग दिया जा रहा है

फिलहाल दुनिया के तमाम देशों में रहस्यमयी कोरोना वायरस के इलाज (treatment of coronavirus) में इन्हीं चारों दवाओं को सबसे असरदार (effective drugs) माना गया है.

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  • Last Updated: March 28, 2020, 5:56 PM IST
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कोरोना वायरस  (coronavirus) का वैश्विक आंकड़ा अब तक 6 लाख 14 हजार पार कर चुका है. चीन (China) और इटली (Italy) के बाद अमेरिका (America) जैसी महाशक्ति इस वायरस का केंद्र बन चुकी है. जहां एक तरफ जांच और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर जोर दिया जा रहा है तो हर देश में डॉक्टर अलग-अलग तरीकों से इसका इलाज की कोशिश में लगे हैं. जानते हैं, कौन से देश कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए कौन सी दवाएं इस्तेमाल कर रहे हैं.

इटली और फ्रांस में डॉक्टर इलाज के लिए Hydroxychloroquine दवा पर भरोसा कर रहे हैं. ये दवा असल में मलेरिया के इलाज की दवा क्लोरोक्वीन का माइल्ड रूप है. हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल सका है कि ये दवा इस नए वायरस पर कितनी असरदार है. वैसे फ्रांस और इटली के अलावा कई अमेरिकी स्टेट्स में भी इसे आजमाया जा रहा है. चीन और दक्षिण कोरिया में भी कुछ मरीजों पर इस दवा का इस्तेमाल किया गया.

National Institute of Allergy and Infectious Diseases के डायरेक्टर Dr. Anthony Fauci से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि फिलहाल इस बारे में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है कि ये दवा कोरोना के मामले में कितनी असरदार हो सकती है. दुनियाभर में बड़ी संख्या में मरीजों पर hydroxychloroquine दवा के कम से कम 6 क्लिनिकल ट्रायल किए जाने की योजना बनाई जा रही है. वहीं भारत समेत ज्यादातर देशों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग पैरासिटामोल का उपयोग हो रहा है.



चीन में प्री ट्रायल की सफलता के बाद कंपनी ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल के लिए 3,000 सैंपल भी तैयार कर चुकी है




WHO ने शुरू किया दवाओं का ट्रायल
तमाम खोजों के बीच WHO ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए फिलहाल तक के सबसे प्रभावी ड्रग्स जैसे एंटी-मलेरिया दवाएं, एक एंटी-वायरल ड्रग Remdesivir और HIV ड्रग्स (Lopinavir और Ritonavir) के कंबीनेशन के साथ sclerosis बीमारी के इलाज में काम आने वाली दवाओं का ट्रायल करने की ठानी है. ये ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल है जो नॉर्वे और स्पेन में किया जा रहा है. 27 मार्च को WHO ने इस ट्रायल की घोषणा की. ये जानकारी डायरेक्टर जनरल Tedros Adhanom Ghebreyesus ने जिनेवा में देते हुए कहा कि फिलहाल दुनिया के तमाम देशों में इस रहस्यमयी वायरस के इलाज में इन्हीं चारों दवाओं को सबसे असरदार माना गया है. WHO ने बिना किसी खास दवा का नाम लिए बाकी देशों से ये भी कहा कि फिलहाल इन आजमाई जा चुकी दवाओं के अलावा कोई भी दूसरी दवा ट्राय न की जाए.

वैक्सीन ट्रायल भी शुरू
इसी बीच National Institute of Allergy and Infectious Diseases की देखरेख में कोविड-19 के वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है. वैक्सीन को mRNA-1273 नाम दिया गया है. टेस्ट के पहले चरण का मकसद ये देखना है कि इंसानी शरीर पर ये टीका कैसी प्रतिक्रिया करता है. ये जानने में लगभग 3 महीने लग सकते हैं कि टीका कितना सुरक्षित है या फिर कितना प्रभावी है. ट्रायल के लिए सिएटल को चुना गया है. ओपन लेवल ट्रायल के पहले दौर में 45 लोग लिए जा रहे हैं. बता दें कि ये 45 लोग केवल वालंटरी ढंग से इस ट्रायल में शामिल हुए हैं और 18 से 55 साल की उम्र के बीच के ये लोग हर तरह से स्वस्थ हैं. इसके बाद बड़े स्तर पर ट्रायल होगा, जिसमें सैकड़ों मरीजों को शामिल किया जाएगा.

टीके की टाइमलाइन इसी बात पर निर्भर है कि वो इंसानी शरीर पर कैसी प्रतिक्रिया करता है


NIAID प्रमुख Dr. Fauci कहते हैं कि चाहे कितनी ही तेजी से ये काम किया जाए तो भी इसमें 6 से 8 महीने और लगेंगे. सालभर तक वालंटियर्स के स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी. इसमें सफलता मिलने के बाद बड़े स्तर पर यानी बाजार में टीका उतरने में लगभग एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है. लेकिन ये भी तभी संभव है जब दोनों ट्रायल्स में सफलता मिले. नाकामयाबी मिलने पर नए सिरे से जेनेटिक सीक्वेंस पर काम होगा.

टाइमलाइन क्या है
Food and Drug Administration की इजाजत के बाद शुरू हुई इस स्टडी में investigational vaccine के अलग-अलग डोज लगभग 6 हफ्ते तक दिए जाने वाले हैं और देखा जाएगा कि प्रतिभागियों का इम्यून सिस्टम इसपर कैसी प्रतिक्रिया करता है. शोध में शामिल Dr. Anthony Fauci ने पूरी प्रकिया पर संतोष जताते हुए कहा कि वैज्ञानिकों ने बहुत तेजी से इसपर काम किया. हालांकि काम का रिजल्ट देखना अभी बाकी है. बता दें कि अमेरिका की नामी-गिरामी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Moderna ने सोमवार 24 फरवरी को एक प्रेस वार्ता में बताया था कि वे COVID-19 के टीके की पहली खेप NIAID (National Institute of Allergy and Infectious Diseases) को भेज चुके थे. इसी का इस्तेमाल ट्रायल में हो रहा है.

WHO ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 4 दवाओं का एक साथ ट्रायल शुरू किया


ये मुल्क भी हैं वैक्सीन की खोज में
जर्मनी स्थित CureVac फार्मास्यूटिकल कंपनी भी दावा कर रही है कि वो गोल्बल कोऑपरेशन नेटवर्क के तहत कोरोना वायरस का टीका बनाने और उसे दुनियाभर के प्रभावित देशों को उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं. Altimmune नाम एक अमेरिकन मेडिसिन कंपनी भी इस ओर काम कर रही है. ये कंपनी अपने टीके को पहले से ही खोजे जा चुके फ्लू के टीके NasoVAX की तर्ज पर बनाने की कोशिश में है. चीन में Inovio Pharmaceuticals और Beijing Advaccine Biotechnology इसपर मिलकर काम कर रहे हैं. INO-4800 नाम से तैयार टीके का प्री-क्लनिकल ट्रायल भी शुरू हो चुका है. यहां तक कि प्री ट्रायल की सफलता के बाद कंपनी ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल के लिए 3,000 सैंपल भी तैयार कर चुकी है. माना जा रहा है कि अप्रैल में ये शुरू हो जाएगा.

इंग्लैंड के वैज्ञानिकों (scientists of England) ने भी हाल ही में कोरोना वायरस से जंग (fight against coronavirus) में बड़ी कामयाबी का दावा किया है. यहां वैज्ञानिकों की टीम ने Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS) के एक मरीज के शरीर में ऐसी एंडीबॉडी की खोज की, जो इससे मिलती-जुलती बीमारी कोरोना के वायरस से लड़ने में भी प्रभावी हो सकती है. दोनों ही वायरल से होने वाली श्वसन तंत्र की बीमारियां हैं जो सीधे फेफड़े पर असर करती हैं. इसपर अभी कोई क्लिनिकल ट्रायल शुरू होने की खबर नहीं आई है.

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First published: March 28, 2020, 5:56 PM IST
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