दिल्ली मेट्रो कार्ड में नहीं है महिला-पुरुष पहचानने की क्षमता, कैसे लागू होगा केजरीवाल का फैसला

अगर दिल्ली मेट्रो महिलाओं के ‌अलग से कार्ड जारी करना शुरू करता है तो इस पूरे काम में करीब 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा.

News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 9:23 PM IST
दिल्ली मेट्रो कार्ड में नहीं है महिला-पुरुष पहचानने की क्षमता, कैसे लागू होगा केजरीवाल का फैसला
महिला और पुरुष की पहचान वाले कार्ड को बनाने में 1000 करोड़ से ज्यादा खर्च आएगा.
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Updated: June 3, 2019, 9:23 PM IST
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने महिलाओं-लड़कियों को एक भारी राहत देते हुए दिल्ली मेट्रो सेवा और डीटीसी बस सेवा फ्री कर दी है. लेकिन इस फैसले को लेकर कुछ आम सवाल उठ रहे हैं. इनमें सबसे पहला सवाल दिल्ली मेट्रो में महिलाओं का किराया मुफ्त करने को लेकर है. दिल्ली मेट्रो में किराया लेने की वर्तमान व्यवस्‍था टोकन या दिल्ली मेट्रो के स्मार्ट कार्ड को एंट्री और एग्जिट गेट पर दिखाने से होती है. अगर आपके पास टोकन है तो उसे दिखाने से एंट्री गेट खुलता है और बाहर जाते वक्त उसे एग्जिट गेट के मशीन में डालने से बाहर आने का गेट खुलता है. इसी तरह स्मार्ट कार्ड से एंट्री लेते वक्त कार्ड पंच करने से एंट्री खुलता है और लौटते वक्त फिर से कार्ड पंच करने पर बाहर आने का दरवाजा खुलता है.

इस पूरी व्यवस्‍था में पुरुष और महिला को पहचानने के लिए किसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाता. टोकन अथवा कार्ड करने वाला है या वाली है, इससे एंट्री या एग्जिट मशीन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. ऐसे में अगर यह फैसला तत्काल लागू होता है तो इस बात की निगरानी करना करीब-करीब नामुमकिन है कि किसी कार्ड या टोकन से लड़की ने एंट्री किया है और किस कार्ड से वो बाहर आएगी.

महिलाओं के लिए अगर कार्ड जारी करने में खर्च होंगे 1000 करोड़् अतिरिक्त
यह चुनौती इतने पर ही खत्म नहीं होती. अगर महिला या लड़कियों के लिए एंट्री या एग्जिट पर कोई बाधक गेट नहीं लगाया जाता तो इसके लिए पूरी दिल्ली मेट्रो के इंफ्रास्टकर में बदलाव करना होगा. इसके आलवा दूसरा ऑप्शन के बारे में द न्यू इंडियन एक्सप्रेस कहता है कि अगर दिल्ली मेट्रो महिलाओं के ‌अलग से कार्ड जारी करना शुरू करता है इसमें करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा. जबकि इस पूरी प्रणाली को लागू करने में करीब 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा.



30 फीसदी यात्री होती हैं महिलाएं
डीएमआरसी के एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली मेट्रो अब बहुत बड़ी सेवा बन चुकी है. इसमें प्रतिदिन करीब 30 लाख लोग यात्रा करते हैं. इन 30 लाख लोगों में करीब 30 फीसदी महिलाएं या लड़कियां होती हैं. ऐसे में इतनी भारी संख्या में महिलाएं को फ्री पास देने की व्यवस्‍था को लागू करने में समय लग सकता है.
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दिल्ली सरकार के अधिकारी ने भी माना ऐसी कोई तकनीकी नहीं
दिल्ली सरकार के अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इं‌डिया को बताया कि दिल्ली मेट्रो के पास फिलहाल किसी भी शख्स को फ्री यात्रा के लिए पास अथवा टिकट देने की कोई व्यवस्‍था नहीं है. ऐसे में अगर दिल्ली सरकार के फैसले को लागू करना होगा तो सबसे पहले दिल्ली मेट्रो में तकनीकी स्तर पर कई बदलाव करने होंगे. क्योंकि फ्री में यात्रा करने वाला महिला ही है इसके लिए भी अलग से निगरानी की जरूरत पड़ेगी.

इतना ही नहीं पूरे मामले पर फिलहाल डीटीसी बस सेवा के अधिकारियों ने किसी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया है. ऐसे में दिल्ली सीएम केजरीवाल के फैसले को लेकर फिलहाल संदेह की स्थिति बनी हुई है.

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First published: June 3, 2019, 1:41 PM IST
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