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दशहरा 2018: हनुमान जो पर्वत लंका लेकर गए थे, आज भी श्रीलंका में वैसे ही रखा है

News18Hindi
Updated: October 18, 2018, 2:28 PM IST
दशहरा 2018: हनुमान जो पर्वत लंका लेकर गए थे, आज भी श्रीलंका में वैसे ही रखा है
श्रीलंका में रावण को माना जाता है महान राजा

आज भी श्रीलंका में उन जगहों के साक्ष्य मिलते हैं जहां रावण ने सीता को बनाकर रखा था बंधक और जहां लैंड करता था उसका पुष्पक विमान.

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  • Last Updated: October 18, 2018, 2:28 PM IST
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राम-रावण की कहानियों में जहां राम को अयोध्या का राजा बताया जाता है, रावण को लंका का राजा बताया जाता है. भारत में राम अच्छाई के प्रतीक हैं, वहीं रावण बुराई का. लेकिन श्रीलंका में ऐसा नहीं है. श्रीलंका की टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट कहती है कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार रावण दुनिया के सबसे बलशाली राजाओं में से एक था. साथ ही उसका संबंध श्रीलंका से जोड़ा जाता है. जहां उसने शासन किया. उसके अधीन केवल इंसान और राक्षस ही नहीं बल्कि देवता भी थे.

श्रीलंका में रावण को कैसे देखा जाता है यह जानना अपने-आप में मजेदार है. हम आपको बता रहे हैं कि भारत में बुराई के प्रतीक के तौर पर हर साल जलाए जाने वाले रावण को श्रीलंका कैसे देखता है? इसके लिए जानकारियां श्रीलंका की टूरिज्म की ऑफिशियल वेबसाइट से लिए गए हैं -

1. लंका को एक सुखी शहर के तौर पर पेश किया जाता है. जिसे खुद विश्वकर्मा ने बनाया था. यह कुबेर का घर था. जो कि देवताओं के कोषाध्यक्ष हुआ करते थे. रावण ने कुबेर से ही लंका की मांग की थी और कहा था कि अगर वे इसे रावण को नहीं देंगे तो वह बलपूर्वक इसे हथिया लेगा. हालांकि रावण ने लंका को छीना था लेकिन वह एक अच्छा और प्रभावी शासक था. लंका उसके शासन में एक संपन्न देश हुआ करता था. रावण ने इंसानों, देवताओं और राक्षसों पर अलग-अलग वक्त पर चढ़ाई की थी.

2. आख्यानों में कहा जाता है कि रामायण के वक्त से सैकड़ों साल पहले से रावण लंका पर शासन था.

3. हालांकि कुछ लोग रामायण की कहानी को आधी हकीकत, आधा फसाना मानते हैं. उनका मानना है कि रामायण में जिस लंका के राजा रावण का जिक्र आता है, उसने 2554 ईसापूर्व से 2517 ईसापूर्व तक शासन किया था. श्रीलंका में सुनाई जाने वाली रावण के शासनकाल में श्रीलंका ने विज्ञान और दवाओं के क्षेत्र में बहुत तरक्की की थी. रावण का पुष्पक विमान इसी का एक उदाहरण माना जाता है.

4. श्रीलंका में माना जाता है कि रावण का साम्राज्य देश के दक्षिणी तट से लेकर पूर्वी तट तक फैला हुआ था. जो वक्त के साथ धीरे-धीरे समुद्र में डूब गया.

5. वैसे श्रीलंका में कुछ लोग यह भी मानते हैं कि रावण बौद्ध राजा था. उसे श्रीलंका में बने प्राचीन बौद्ध मठों का निर्माता भी बताया जाता है. ये बौद्ध मठ हैं कुरागाला और रहालागाला आदि. श्रीलंका में ऐसी कई जगहें हैं जिन्हें रावण के साथ जोड़ा जाता है, जैसे नुमाराइलिसा में सीताइलिसा नाम की जगह. माना जाता है कि रानी सीता को यहीं पर एक जेल में रखा गया था. जबकि वारियापोला और हॉर्टन के मैदान ऐसी जगहें माने जाते हैं जहां रावण का पुष्पक विमान उतरता था.
आज भी इस रूमासाला पर्वत पर होती हैं दवाओं वाली जड़ी-बूटियां


6. रुमासाला, जो कि श्रीलंका के दक्षिणी ओर के समुद्र के पास एक पर्वत की चोटी है इसे भी रावण के साथ ही जो़ड़ा जाता है. और माना जाता है कि यह हिमालय पर्वत की चोटी का ही एक हिस्सा है. इस चोटी पर कई सारी जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं. और कथित तौर पर यह वही द्रोणगिरी पर्वत का हिस्सा है जिसे लक्ष्मण को शक्ति लगने के बाद हनुमान ले आए थे.

7. एडम्स ब्रिज के नाम से भी जाना जाने वाला एक चूने के तैरते पत्थरों का पुल रामेश्वरम से लेकर मन्नार द्वीप तक बना हुआ है. जबकि श्रीलंका के उत्तरी-पश्चिमी तट को रावण से जोड़ा जाता है. इसे रामसेतु या राम के पुल के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि इसे बंदरों की मदद से भारत और श्रीलंका के बीच बनाया गया था ताकि राम की सेना भारत और लंका के बीच के समुद्र को पार कर सके. इसपर इंडियन नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी ने एक जांच भी कराई थी, जिसके अनुसार जमीन से जुड़ी यह रचना 3.500 से 5,000 साल पहले इंसान की बनाई भी हो सकती है.

8. फिर भी श्रीलंका में जो लोग रावण को मानने वाले हैं, वे इस मान्यता से विरोधी विचार रखते हैं. श्रीलंका के इतिहासकार मानते हैं कि यह पुल रावण ने ही बनाया था और यह लंका को भारत से जोड़ता था.

9. उनके अनुसार यह पुल बाद में राम ने अपनी सेना को लंका में ले जाने के लिए प्रयोग किया. वे लंका में आ गए और रावण के मदद विभीषण की मदद से उसे मार दिया. इस घटना को वे लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर नहीं देखते बल्कि वे इसे एक सम्पन्न सभ्यता के खत्म हो जाने के तौर पर देखते हैं.

10. रावण को एक अच्छा वैद्य भी बताया जाता है. कहा जाता है कि उसने आयुर्वेद पर सात किताबें लिखी थीं. कहा जाता है कि रावण ने 'रावण संहिता' नाम की किताब भी लिखी थी. इस किताब में हिंदू ज्योतिष के बारे में जानकारियां थीं. इसके अलावा रावण को 'दसमुख' या 'दसग्रीवा' भी कहा जाता है, जिसके हिसाब से माना जाता है कि रावण के पास दस सिरों जितना ज्यादा और विस्तृत ज्ञान था.

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First published: October 18, 2018, 2:21 PM IST
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