जानिए कितनी खतरनाक है ई-सिगरेट और क्यों लगा बैन

जानिए कितनी खतरनाक है ई-सिगरेट और क्यों लगा बैन
ई-सिगरेट पर सरकार ने बैन लगा दिया है

ई-सिगरेट (e-cigarette) पर बैन लगा दिया गया है. ई-सिगरेट को लेकर कई तरह के शोध (research) हुए हैं. हाल में जो शोध हुए हैं इससे पता चलता है कि ये सेहत के लिए कितना खतरनाक है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2019, 4:42 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक ने ई सिगरेट (E-Cigarette) पर बैन लगाने का फैसला किया है. कैबिनेट के फैसले के बाद अब ई-सिगरेट के इंपोर्ट, प्रोडक्शन और बिक्री पर रोक लगा दी गई है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार ने लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया है. कैबिनेट के फैसले के बाद अब ई सिगरेट रखना भी अपराध के दायरे में आ गया है.

क्या होती है ई-सिगरेट

ई-सिगरेट या इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक प्रकार का सिगरेट ही है लेकिन इसमें पारंपरिक सिगरेट की तरह तंबाकू सीधे तौर पर नहीं जलता है. ई-सिगरेट में निकोटीन लिक्विड तौर पर मौजूद रहता है. इसमें इलेक्ट्रिक फिलामेंट को जलाकर लिक्विड निकोटीन को वेपराइज किया जाता है. वेपर को इनहेल करने से सिगरेट का मजा मिलता है.



कैसे बाजार में आया ई-सिगरेट
ई-सिगरेट को बाजार में ये कहकर उतारा गया था कि इससे पारंपरिक सिगरेट से कम खतरा होता है. इसे सिगरेट छोड़ने वालों के लिए मददगार माना गया था. कई तरह के रिसर्च का हवाला देकर कहा गया था कि ई-सिगरेट पारंपरिक सिगरेट से 95 फीसदी तक कम हानिकारक होता है.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ई-सिगरेट से हर साल तकरीबन 20 हजार लोग सिगरेट छोड़ रहे हैं. भारत के बाजार में इसी का हवाला देकर ई-सिगरेट उतारा गया था. हालांकि भारत में इसे लाइसेंस नहीं मिला था.

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ई-सिगरेट भी पारंपरिक सिगरेट की तरह खतरनाक है


हमारे यहां भी ई-सिगरेट ने इसी दम पर मार्केट पकड़ा कि ये पारंपरिक सिगरेट से कम खतरनाक है. ई-सिगरेट की बिक्री को सपोर्ट करने वालों का कहना था कि जो लोग तंबाकू वाला सिगरेट पीते हैं वो धुएं के साथ 7 हजार घटक अंदर ले जाते हैं. इसमें 70 से ज्य़ादा तत्व ऐसे होते हैं, जिन्हें कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है. ई सिगरेट में ये तत्व या तो कम होते हैं या बिल्कुल भी नहीं होते हैं.

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिगरेट के आदी लोगों को ई-सिगरेट पीने की सलाह देनी चाहिए. डॉक्टर अपने मरीजों को इस तरह की सलाह दें. यहां तक की अस्पतालों को भी ई-सिगरेट बेचने की इजाजत दी जानी चाहिए.

ई-सिगरेट पर क्यों लगा बैन?

पहले जिस तरह की रिपोर्ट ई-सिगरेट को अनुमति देने के लिए आ रही थी. बाद में वैसी ही रिपोर्ट इसे बैन करने की मांग को लेकर आने लगी. ई-सिगरेट को पहले जितना सेफ माना जा रहा था बाद में उसे भी उतना ही खतरनाक माना जाने लगा. एक शोध से पता चला कि ई सिगरेट में इस्तेमाल होने वाला फ्लेवरिंग लिक्विड दिल को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे सिर्फ कैंसर ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक का खतरा भी रहता है.

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ई-सिगरेट पीने वालों में डिप्रेशन की संभावना बढ़ जाती है


अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने एक जर्नल छापी. उसमें लिखा गया था कि अगर ई-सिगरेट में निकोटीन नहीं हो तो भी ये खतरनाक है. इसमें मौजूद फ्लेवरिंग ब्लड वेसल के काम करने की क्षमता प्रभावित करते हैं. इससे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. इसमें दालचीनी और मेंथॉल फ्लेवर सबसे खतरनाक माने गए.

इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ कंस की एक स्टडी सामने आई. इस नए शोध से पता चला कि ई-सिगरेट से लोगों में डिप्रेशन की संभावना दोगुनी हो जाती है. रिसर्चर ने अमेरिका के 96,467 ई-सिगरेट पीने वाले लोगों पर रिसर्च किया. शोध में पता चला है कि ई-सिगरेट पीने से हार्ट अटैक का खतरा 56 फीसदी तक बढ़ जाता है. लंबे वक्त तक इसके सेवन से ब्लड क्लॉट में समस्या पैदा हो जाती है.

पहले बताया गया था कि ई-सिगरेच में टॉक्सिक कंपाउंड कम होते हैं. लेकिन बाद के शोध में पता चला कि इससे भी खतरनाक और जहरीले तत्व निकलते हैं, जो सेहत के लिए काफी खतरनाक हैं. मुंबई में एक रिसर्च हुई. उससे पता चला कि सिगरेट नहीं पीने वाले युवा भी शौकिया और स्टाइल दिखाने के लिए ई-सिगरेट पीने लगे थे. लोगों को ये भ्रम था कि ये उनकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचा रही है. लेकिन हकीकत इसके उलट थी.

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