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पृथ्वी पहुंच गई Black Hole के करीब, जानिए, क्या होगा अब

से पहले ब्लैकहोल (Black Hole) और पृथ्वी (Earth) की दूरी ज्यादा आंकी गई थी. (तस्वीर: @chandraxray)
से पहले ब्लैकहोल (Black Hole) और पृथ्वी (Earth) की दूरी ज्यादा आंकी गई थी. (तस्वीर: @chandraxray)

मिल्की वे (Milky Way) गैलेक्सी (Galaxy) के नए नक्शे (MaP) से पता चला है कि जितना पहले समझा गया था हमारी पृथ्वी (Earth) अपनी गैलेक्सी के केंद्र वाले ब्लैकहोल (Black) के पास है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 12:29 PM IST
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ब्रह्माण्ड (Universe) इतना विशाल है हमें बार बार इसके बारे में नई जानकारी मिलती रहती है. इतना ही नहीं पुरानी धारणाएं टूटने का सिलसिला भी कम नहीं है. हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि ब्रह्माण्ड में अब तक पृथ्वी (Earth) की जो स्थिति (Position) सोची या समझी गई थी वह गलत थी. इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने जब हमारी गैलेक्सी (Galaxy) मिल्की वे (Milky Way) का नया नक्शा बनाया तब उन्हें पता चला कि हमारे सौरमंडल (Solar System) की तो जगह ही कुछ और है.

ब्लैकहोल के पास
शोध में हमारी गैलेक्सी का कैटेलॉग पब्लिकेशन्स ऑफ द एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ जापान में प्रकाशित हुआ है. हमारा सौरमंडल अब हमारी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित ब्लैकहोल के ज्यादा पास है जबकि पहले यह थोड़ा दूर मापा गया था. हमारा सौरमंडल Sagittarius A* नाम के इस ब्लैकहोल की चक्कर भी तेजी से लगा रहा है.

क्या यह चिंता की बात है
लेकिन चूंकि हमारा सौरमंडल Sagittarius A* के अंदर की ओर नहीं जा रहा है इसलिए चिंता की बात नहीं है और इस बात से किसी तरह का खतरा नहीं है. इतना ही नहीं मिल्की वे का नक्शे में थोड़ा सुधार हुआ है और उसमें हमारी स्थिति और सटीकता से बताई गई है. यह सर्वे यह भी बताता है कि गैलेक्सी के अंतर होते हुए उसका त्रिआयामी नक्शा बनाना कितना मुश्किल काम होता है.



यह आ रही थी चुनौती
दरअसल मिल्की वे का सटीक नक्शा बनाने में यही सबसे बड़ी चुनौती है. इतना ही नही इससे  हमारी अंतरिक्ष को अच्छे समझने में भी समस्या आ रही थी.  दो आयामी (Two dimension) स्तर पर अंतरिक्ष के तारों और दूसरे पिंडों का नक्शा बनाना आसान है. लेकिन इन पिंडों के बीच की दूरी का अनुमान लगाना आसान नहीं है.

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गैलेक्सी (Galaxy) में स्थित तारों और पिंडों की सटीक दूरी ऐसे नक्शों (Map)के लिए अहम होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


दूरी पता करने की अहमियत
इन पिंडों के बीच की दूरी पता करना बहुत ज्यादा जरूरी होता है. इससे हमें पिडों के अंदर की चमक का सही अनुमान लगाने में मदद मिलती है.  इसका एक बढ़िया उदाहरण  विशाल लाल तारा बीटेल्जूज है जो पिछले मापनों की तुलना में पृथ्वी के ज्यादा पास निकला. इसका मतलब यह हुआ कि यह न तो इतना चमकीला था और ना ही इतना बड़ा था जितना कि इसे समझा जा रहा था.

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ऐसे विश्लेषण में भी करना होगा बदलाव
इसी तरह सीके वुल्पेक्यूले नाम का एक तारे में 350 साल पहले विस्फोट हुआ था. वास्तव में यह ज्यादा दूरी पर है जिसका मतलब यह हुआ कि विस्फोट चमकीला और अधिक ऊर्जावान था. अब इसकी नई व्याख्या की जरूरत है क्योंकि इससे पहले का इसका विश्लेषण इस मान्यता के आधार पर हुआ था कि इसकी ऊर्जा कम थी.

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आधुनिक तकनीक और उपकरणों से शोधकर्ता तारों (Stars) की सटीक दूरी नापने (measurement) में सफल रहे. . सांकेतिक फोटो: पीटीआई


कैसे नापी पिंडों की दूरियां
अब हमारे खगोलविदों के पास दूरियों की गणना करने के लिए बेहतर उपकरण और तकनीक हैं  जिससे एस्ट्रोमेट्री के जरिए सर्वे कर मिल्की वे का बेहतर त्रिआयामी नक्शा बना रहे हैं. ऐसा ही एक सर्वे जापान के वेरा VLBI एक्सप्लोरेशन रेडियो एस्ट्रोनॉमी सर्वे है. इसमें पूरे जापान में बहुत सारे रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग किया गया जिसस एक 2300 किलोमीटर के व्यास डिश के समतुल्य रिजोल्यूशन का एक टेलीस्कोप के जैसा काम लिया गया. इसी सिद्धांत के आधार पर इवेंट होराइजन टेलीस्कोप ने से ब्लैकहोल की छाया की पहली सीधी तस्वीर ली गई थी.

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साल 2000 में शुरू हुए इन सर्वे में पैरेलैक्स तकनीक से विभिन्न तारों की दूरियां नापी गई. इस धार पर 99 पिंडों का एक कैटेलॉग बनाया गया. इस नक्शे के आधार पर शोधकर्ताओं ने गैलेक्सी के केंद्र की स्थिति निकाली. 1985 यह दूरी 27,700 प्रकाश वर्ष निकाली गई थी जो पिछले साल 26,673 प्रकाशवर्ष आंकी गई थी जबकि वेरा की गणना के आधार पर यह दूरी केवल 25800 प्रकाशवर्ष है.
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