ग्रीनलैंड में मिली 3.7 अरब साल पुरानी चट्टानें, जानिए क्या पता चलेगा इनसे

3.7 अरब साल पहले मैग्मा के महासागरों (Magma Oceans) के ठोस होकर बनी चट्टानें सुरक्षित मिली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

3.7 अरब साल पहले मैग्मा के महासागरों (Magma Oceans) के ठोस होकर बनी चट्टानें सुरक्षित मिली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ग्रीनलैंड (Greenland) में ऐसे चट्टानें खोजी गई हैं जो 3.7 अरब साल पुरानी हैं जब पृथ्वी (Earth) की सतह मैग्मा के महासागरों (Magma Oceans) से ढकी हुई थी. वैज्ञानिकों को इनसे काफी जानकारी मिलने की उम्मीद है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 1:26 PM IST
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पृथ्वी (Earth) पर हमेशा ही जीवन के अनुकूल हालात (conditions for life) नहीं रहे थे. इसका निर्माण 5 अरब साल पहले हुआ था. इसके पहले 5 करोड़ साल बाद यहां की सतह पर मैग्मा के महासागर (Magma Oceans) छाए हुए थे जिनमें पृथ्वी के अंदर की भीषण गर्मी उस मैग्मा में उबाल ला रही थी. इसके बाद मैग्मा ठंडे होने की प्रक्रिया के साथ चट्टानों (Rocks) का बनना भी शुरू हुआ. हाल ही में वैज्ञानिकों ने ग्रीनलैंड (Greenland) में 3.7 अरब साल पुरानी इन चट्टानों को खोज निकाला है. उन्हें इन चट्टानों से पृथ्वी के इतिहास की बहुत सारी जानकारी मिलने की उम्मीद है.

शुरुआती हालातों के संकेत हो सकते हैं इनमें

जब इस मैग्मा का महासागर ठंडा होना शुरू हुआ तभी पृथ्वी की संरचना, सतह के रसायन और वायुमंडल के निर्माण की निर्धारण करने वाली अवस्था बन गई थी. इस तरह अति पुरातन चट्टानों में पृथ्वी के जीवन के अनुकूल बनने के संकेत छिपे हो सकते हैं जिससे वैज्ञानिकों को काफी कुछ पता चल सकता है.

तो नीचे नहीं गईं थी सभी चट्टानें
अभी तक माना जाता था कि ऐसी चट्टानें पृथ्वी की टैक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियों की वजह से नीचे चली गई होंगी. लेकिन अब शोधकर्ताओं ने दक्षिणी ग्रीनलैंड में 3.7 अरब साल पुराने मैग्मा महासागरों के रासायनिक अवशेष खोजे हैं. जो उस समय पृथ्वी की पिघली हुई अवस्था को बारे में काफी कुछ खुलासा  कर सकते हैं.

चंद्रमा के निर्माण के समय की बात

उस समय के हालात बहुत अच्छे नहीं थे, उस समय पृथ्वी और दूसरे पिंडों में काफी टकराव भी हुआ करता था. माना जाता है कि उस समय पृथ्वी का निर्माण एक मंगल ग्रह के आकार वाले ग्रह से टकराव से बना था जिससे पृथ्वी के चंद्रमा का भी निर्माण हुआ था. यह घटना 4.5 अरब साल पहले की है.



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3.7 अरब साल पहले के समय पूरी पृथ्वी मैग्मा के महासागरों (Magma Oceans) से ढकी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


तब पिघल जाती थीं चट्टानें

माना जाता है कि उन खगोलीय टकरावों से इतनी ऊर्जा निकलती थी कि वह पृथ्वी की पर्पटी और लगभग पूरे मैंटल तक को पिघला देती थी. इससे विशाल मात्रा में चट्टानें पिघल जाती थीं और मैग्मा के महासागर बन जाया करते थे जिनकी गहराई सैकड़ों किलोमीटर तक की होती थी. वहीं आज पृथ्वी की पर्पटी पूरी तरह से ठोस प्लेटों से बनी है और मैंटल प्लास्टिक की तरह ही ठोस माना जाता है. इसी वजह से भूगर्भीय गतिविधियां होते हैं.

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पृथ्वी ले रही थी आकार

उस दौर में जब पृथ्वी से बाहरी पिंड टकरा रहे थे, गहरे मैग्मा महासागर धीरे धीरे ठंडे होकर क्रिस्टल और ठोस में बदल रहे थे.  जिससे पृथ्वी के मुकम्मल ग्रह बनने का सफर शुरू हुआ. वहीं मैग्मा में से बुलबुलों के जरिए बाहर आई ज्वालामुखी गैसों से हमारे वायुमंडल का निर्माण शुरू हुआ जिन्हें बाद में जीवन की प्रक्रियाओं को सहयोग देना था.

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उस दौर में पृथ्वी (Earth)की ऊपरी सतहें आज की तरह ठोस नहीं थीं. (फाइल फोटो)


क्या नष्ट होते गए सभी प्रमाण

पृथ्वी की पुरातन पिघली हुई अवस्था के भूगर्भीय प्रमाण जुटाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल  था. क्योंकि उस समय की अधिकांश चट्टानें टेक्टोनिक प्लेट्स की रीसाइकलिंग में नीचे चली गई होंगी. लेकिन उनके रासायनिक प्रमाण पृथ्वी की गहराइयों में होंगे. वहीं मैग्मा के महासागर में ठंडी हुई चट्टानें मैंटल तक डूब गई होंगी. वैज्ञानिकों को विश्वास है कि ये खनिज अवशेष मैंटल-पर्पटी सीमा पर जम गए  होंगे. तब भी ये हमारी पहुंच से दूर ही होंगे, नहीं तो ये पिघलने और ठोस होने की प्रक्रिया में खो गए होंगे.

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अवशेषों में लोहा?

ऐसे में वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि उस समय के प्रमाण केवल ज्वालामुखी चट्टानों में रह गए होंगे जिनसे पृथ्वी की पर्पटी बनी है. दक्षिण-पश्चिम ग्रीनलैंड की इसुआ सुप्राक्रस्टल पट्टी में ये चट्टानें मिली हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि ये 3.7 से 3.8 अरब साल पुरानी हैं. शोधकर्ताओं को इसमें खास लोहे के आइसोटोप मिले हैं जो बहुत ही ज्यादा दबाव में बने थे.

इन चट्टानों में क्रिस्टल अवस्था वाले मैग्मा महासागर के अवशेष मौजूद हैं. अब शोधकर्ता यह जानना चाहते हैं कि क्या दुनिया में कहीं और भी इसतरह की चट्टानें हैं जो पृथ्वी पर सतह पर  आ गईं थी या फिर ऐसे केवल ग्रीनलैंड में ही हो सका था.
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