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धरती पर पानी कहां से आया, इसमें क्या थी सूर्य की भूमिका

धरती पर पानी कहां से आया, इसमें क्या थी सूर्य की भूमिका

पृथ्वी (Earth) पर सबसे पहले पानी लाने में सूर्य का प्रमुख भूमिका रही थी.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी (Earth) पर सबसे पहले पानी लाने में सूर्य का प्रमुख भूमिका रही थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी (Earth) अभी इकलौता ऐसा ग्रह है जहां तरल पानी (Water) प्रचुर मात्रा में है. यह पानी धरती पर कहां से आया इस पर कई मत हैं. लेकिन हालिया अध्ययन से पता चला है कि इसमें हमारे सूर्य (Sun) का भी योगदान है. इस शोध में शोधकर्ता साल 2010 में जापाने के हायासुबा अभियान में जमा किए गए पुराने क्षुद्रग्रह का अध्ययन कर अपने नतीजों पर पहुंचे हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस जानकारी से भावी अंतरिक्ष अभियानों को मदद मिलेगी.

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    पृथ्वी पर पानी (Water on Earth)  कहां से आया इस विषय पर कई शोध हो चुके हैं.  इसमें मजेदार बात यह है कि कभी यह बताया गया कि धरती पर पानी अंतरिक्ष से आए क्षुद्रग्रहों और उलकापिंडों से आए तो कभी यह भी कहा गया कि पृथ्वी पर ही पानी बना और यहां पर शुरू से बना रहा. इन शोधों में अधिकांश शोध पृथ्वी पर गिरे उल्कापिंड और क्षुद्रग्रहों के टुकड़ों पर किए गए हैं. नए अध्ययन में जापान के 2010 के हायाबुसा अभियान (Hayabusa Mission) से हासिल किए गए पुरातन क्षुद्रग्रह के नमूने का विश्लेषण किया गया. इस अध्ययन से पता चला है कि  पृथ्वी पर पानी अंतरिक्ष के धूल के कणों (Dust Particles) से आया था जिनसे ग्रहों का निर्माण हुआ था.

    सौर पवन की भूमिका
    यूके, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि धूल के कणों में पानी तब बना था जब सूर्य के आने वाले सौर पवन कहलाने वाले आवेशित कणों ने अंतरिक्ष में मौजूद धूल के कणों की रासायनिक संरचना बदल दी जिससे इनमें पानी के अणु पैदा हो सके.

    महासागरों में इतना पानी
    इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक स्पेस वेदरिंग कहते हैं. नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पृथ्वी की महासागरों में पानी की सरंचना पैदा करना क्षुद्रग्रह जैसे स्रोतों के पदार्थों के मिश्रण से बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है. लेकिन सौर पवनें इस सवाल का जवाब दे सकती हैं.

    ये कारण बताए गए हैं अब तक
    ग्रह विज्ञानी लंबे समय से इस बात को जानना चाह रहे हैं कि आखिर पृथ्वी के महासागरों में इतना पानी कैसे आया था. कुछ सिद्धांतों ने सुझाया है कि ऐसा पानी वाले क्षुद्रग्रहों की बारिश के कारण हुआ होगा जो 4.6 अरब साल पहले पृथ्वी पर हुई थी. शोधकर्ताओं का मानना है कि पृथ्वी पर कुछ पानी ‘सी’  प्रकार के क्षुद्रग्रह से आया था.

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    अंतरिक्ष में धूल के कणों में पानी बनाने का काम सौर पवनों (Solar Wind) ने कियाथा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    बहुत उपयोगी होगी यह पड़ताल
    शोधकर्ताओं का यह भी मानना रहा कि इसके साथ ही पृथ्वी पर पानी एक और हलके आइसोटोपिक स्रोत से आया होगा जो सौरमंडल में कहीं और था. नई पड़ताल से पृथ्वी पर पानी पहुंचने और बड़ी तादाद में सतह को घेरने लायक मात्रा में होने के आसपास के कई रहस्यों का भी खुलासा हो सकेगा. वैज्ञानिक यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि इस अध्ययन के नतीजे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में वायु रहित ग्रहों  पर पानी खोजने में मददगार हो सकेंगे.

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    अंतरिक्ष की चट्टान के नमूनों का अध्ययन
    ग्लासगो यूनिवर्सीट के वैज्ञानिकों की अगुआई में अंतरराष्ट्रीय टीम ने एटम प्रोब टोमोग्राफी के जरिए अलग-अलग प्रकार के अंतरिक्ष की चट्टानों के नमूनों का अध्ययन किया. ये चट्टानें  एस प्रकार के क्षुद्रग्रह कहलाती हैं जो सी प्रकार के क्षुद्रग्रहों की तुलना में सूर्य के ज्यादा पास रहकर उसका चक्कर लगाते हैं.

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    पुरातन क्षुद्रग्रह (Asteroids) की सतह पर भी सौर पवनो ने प्रभाव छोड़ा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

    नमूनों में पानी के अणु
    ये नमूने इटोकावा क्षुद्रग्रह के थे और इनके विश्लेषण किया. जब वैज्ञानिकों ने एक बार में एक परमाणु की आणविक संरचना का अध्ययन किया से पता चला कि उनमें पानी के अणुओं की उपस्थिति है. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ ल्यूक डाले ने बताया कि पानी के ये अणु इनमें कैसे पहुंचे या बने.

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    डॉ डाले ने बताया कि सूर्य से आने वाले हाइड्रोजन आयन किसी बिना हवा वाले क्षुद्रग्रह के साथ अंतरिक्ष में मौजूद धूल से टकराए और पादर्थ के अंदर जाकर उनकी रासायनिक संरचना को प्रभावित किया. इससे धीरे धीरे हाइड्रोजन आयन ऑक्सीजन अणुओं से प्रतिक्रिया कर चट्टान और धूल के अंदर ही पानी के अणु बनाने लगे जो क्षुद्रग्रहों के खनिजों में छिपे रह गए. यही धूल पृथ्वी पर सौर पवनों और क्षुद्रग्रहों के साथ आ गई होगी और पानी ले आई होगी.

    Tags: Asteroid, Earth, Research, Science, Space, Sun, Water

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