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    पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों को पलटने में लगा था कितना समय, जापानी शोध ने बताया

    पृथ्वी (Earth) के मैग्नेटिक पोल्स (mangnetic poles) वैसे तो दो से तीन लाख साल में पलटते है कि लेकिन इस बार यह 7.5 लाख सालों से नहीं बदले हैं.  (तस्वीर:  ULCA/ EPSS/NASA)
    पृथ्वी (Earth) के मैग्नेटिक पोल्स (mangnetic poles) वैसे तो दो से तीन लाख साल में पलटते है कि लेकिन इस बार यह 7.5 लाख सालों से नहीं बदले हैं. (तस्वीर: ULCA/ EPSS/NASA)

    जापानी (Japanese) शोधकर्ताओं ने अवसाद निक्षेपणों (Sediment deposits) का अध्ययन कर पता लगाया है कि लाखों साल पहले पृथ्वी के चंबकीय ध्रुवों (Magnetic Poles Reverse) को पलटने की प्रक्रिया कैसे हुई थी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 5, 2020, 8:23 PM IST
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    हर दो से तीन लाख सालों में पृथ्वी (Earth) के चुंबकीय ध्रुव (Magnetic Poles) पलट (Reversal) जाते है. यानि कि जो कभी उत्तरी ध्रुव (North Pole) था वह दक्षिणी ध्रुव ( South Pole) हो जाता है और दक्षिणी ध्रुव उत्तरी ध्रुव में. अब इसके फिर से बदलने का समय आ गया है. ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों के पलटने या बदलाव की इस प्रक्रिया में कितना समय लगा था.

    कितने साल पहले हुआ था यह बदलाव
    पिछली बार दिखाई न देने वाली प्रक्रिया असामान्य थी क्योंकि यह बहुत सालों पहले हुई थी. किसी वजह से हमारे चुंबकीय ध्रुव साढ़े सात लाख सालों से उसी स्थिति में इस शोध ने इस बदलाव पर काफी जानकारी हासिल की है.

    इस बदलाव का रिकॉर्ड?
    पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अध्ययन को पेलेयोमैग्नेटिज्म कहा जाता है. इसमें चट्टानों और अवसादों से लेकर पुरातन पदार्थों का अध्ययन होता है. पिघली चट्टानें पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड की रिकॉर्ड तब सहेज लेती हैं जब वे ठोस में बदलती हैं. इसी से संबंधित एक और क्षेत्र है मैग्नेटोस्ट्रौटिग्राफी जो जियोमैग्नेटिक बदलाव (Reversal) का रिकॉर्ड का अध्ययन करता है जो उन चट्टानों में रखा होता है.



    चट्टानों की सहायता
    इन चट्टानों का समय जानकर शोधकर्ता पृथ्वी के बदलाव की टाइमलाइन बना सकते हैं. पिछली बार जो बदलाव हुआ था उसका नाम माटूयामा ब्रून्हेस जियोमैग्नेटिक रिवर्सल था जो इसके खोजकर्ताओं फ्रेंच जियोफिसिजिस्ट बर्नार्ड ब्रू और जापानी जियोफिजिसिस्ट मटोनोरी मायुयामा के  नाम पर रखा गया है. इस खोज के बाद से सालों तक शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की है कि वास्तम में यह कब हुआ और इसके होने में कितना समय लगा.

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    पृथ्वी (Earth) के चुंबकीय ध्रुवों (mangnetic poles) पिछले कुछ सालों में अपनी जगह थोड़ी से बदली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    समय पता लगाने की समस्या
    नए अध्ययन में प्रमुख शोधकर्ता और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पोलर रिसर्च यूकी हानेडा भी यही प्रयास किया गया है. यह शोध प्रोग्रेस इन अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेस में प्रकाशित हुआ है. लावा के बहाव पृथ्वी की मैग्नेटिक ध्रुवों की अनुस्थिति के बारे में विश्वस्नीय संकेतक की तरह होते हैं. लेकिन वे इनकी टाइमलाइन के बारे में नहीं बता सकते. ये किसी समय खीचीं गई तस्वीर की तरह होते हैं, लेकिन यह नहीं बता सकते कि यह तस्वीर कब खींची गई या कितनी पुरानी है.

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    अवसाद निक्षेपणों से उम्मीद
    लावा का बहाव उनके जमने के समय पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड के बारे में समझने के बारे में काफी मददगार होते हैं. हानेदा का कहना है कि लावा का क्रम सतत पेलेयोमैग्नेटिक रिकॉर्ड के बारे में जानकारी नहीं दे सकते हैं. इससे बेहतर रिकॉर्ड कुछ अवसाद निक्षेपणों में मिल सकते हैं जो लंबे समय मे बनते हैं. इनमें से एक निक्षेपण को चिबा कम्पोजिट सेक्शन (Chiba composite section) कहते हैं. यह इलाका जापान में है. जियोफिजिसिस्ट इस जगह को माटुयामा-ब्रुनहेस रिवर्सल का बहुत अहम रिकॉर्ड मानते हैं.

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    चुंबकीय ध्रुवों (mangnetic poles) के पलटने के असर के बारे में तरह तरह के मत लेकिन इस बारे में कुछ स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है. (तस्वीैर नासा)


    यूं किया विश्लेषण
    शोधकर्ताओं ने इस इलाके से नए नमूने जमा किए और इनका पुरातन और चट्टानों का मैग्नेटिक विश्लेषण किया. यह इलाक मध्य जापान में स्थित है.  इन नमूनों के जरिए उन्होंने माटुयामा-ब्रुनहेस रिवर्सल के क्रम का पता करने की कोशिश की. यह इलाका बहुत से समुद्री अवसादों से भरा माना जाता है.

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    शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में जो पाया वह अन्य अध्ययनों की पड़ताल से काफी कुछ अलग था, खासतौर पर इस मामले में की इस रिवर्सल में कितना समय लगा था. कुछ अध्ययनों का मानना है कि यह कई हजार सालों तक चला वहीं कुछ का मानना था कि यह केवल एक इंसानी जीवन में ही हो गया था. लेकिन इस अध्ययन से शोधकर्ताओं को पता चला कि इस बदलाव में 20 हजार साल लगे और उसके बाद अस्थायित्व का काल दस हजार साल का था.
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