जानिए कैसे पता लगा पृथ्वी के निकटतम तारा समूह के फटने का कारण

तारा समूह (Star Cluster) का फटना कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी.  (फाइल फोटो)

तारा समूह (Star Cluster) का फटना कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी. (फाइल फोटो)

पृथ्वी (Earth) के सबसे पास के तारा समूह (Star Cluster) को फटने की घटना के पीछे की वजह जब खगोलविदों ने जानने का प्रयास किया तो उन्हें अजीब बात का पता चला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 7:26 PM IST
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हमारे ब्रह्माण्ड (Universe) मे बहुत से अजीब पिंड और घटनाएं भरी पड़ी हैं. लेकिन इनके लिए हमारी गैलेक्सी मिल्की वे में भी कम हैरान करने वाली चीजें नहीं हैं. यूरोपीस स्पेस एजेंसी (ESA)  के गीगा सैटेलाइट के आकंड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि हमारे सौरमंडल के सबसे नजदीकी तारा समूह (Star Cluster) फिलहाल फट रहा है. हैरानी की बात यह भी है कि यह ना केवल समान्य प्रक्रिया से हो रहा है, बल्कि एक अदृश्य विशालकाय पिंड के गुरुत्व के खिंचाव के कारण हो रहा है.

तय था तारा समूह का फटना

यह घटना पास के डार्क मैटर की मौजूदगी की वजह से हो सकती है. जिसकी वजह से उसके पास पहुंचने वाली किसी भी वस्तु का यह हाल हो रहा होगा. वास्तव में तारों के समूह के फटने की घटना अटल थी. तारा समूह में बहुत सारे तारे बहुत घनी अवस्था में पास पास होते हैं और उनमें एक दूसरे के गुरुत्व तक का प्रभाव होता है.

ज्वार धारा का बनना
आंतरिक अंतरक्रियाओं और बाहरी गैलेक्टिक टाइडल बल- जो कि दो गैलेक्सी के बीच में लगता है, की वजह से तारा समूह फट कर तारों की नदी में बदल जाता है जिसे टाइडल स्ट्रीम या ज्वार धारा कहते हैं. इन धाराओं अंतरिक्ष में देखा नहीं जा सकता. इसके बीच की दूरी पता करना बहुत ही मुश्किल होता है.

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तारा समूह (Star Cluster) के आकंड़ों का अध्ययन करने उसमें उम्मीद से कहीं ज्यादा तारे मिले. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


एक नक्शे पर हो रहा है काम



गीगा सैटेलाइड मिल्की वे गैलेक्सी का त्रिआयामी नक्शा बनाने पर काम कर रहा है. इसके लिए विस्तार और उच्च सटीकता का ध्यान रखा जा रहा है. इसमें सबसे सटीक स्थिति और गति के आंकड़ों का उपयोग किया जा रहा है. चूंकि तारा समूह से खिंचे तारे समूह की गति से ही अलग हो रहे होते हैं, गीगा के आंकड़ों से खगोलविदों को बहुत सी पुरानी अज्ञात ज्वार धाराएं  पहचाने को मौका मिल गया. इनमें टाइडल टेल या ज्वार पूंछ भी शामिल थीं जो तारों की डोर होती है और आगे और पीछे दोनों ही जगह से ढीली होती है.

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गीगा के आंकड़ों ने खींचा ध्यान

साल 2019 में खगोलविदों ने खुलासा किया था कि उन्होंने दूसरे गीगा आंकड़ों के जारी होने पर उन्हें 153 प्रकाश वर्ष दूर पृथ्वी के सबसे पास के हियाडेस नाम के तारा समूह ज्वार पूंछ की धाराओं के होने के प्रमाण मिले थे. इसने यूरोपीय स्पेस एजेंसी और यूरोपीय साउदर्न ऑबजर्वेटरी की तेरेजदा जेराब्कोवा नाम की खगोलविद और उसके साथियों का ध्यान खींचा.

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तारा समूह (Star Cluster) की ज्वार पूंछ से बहुत सारे तारों की मौजूदगी का पता चला. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


विशाल तारा समूह से बड़ी पूंछ

जब गीगा आंकड़ों का 2.5 संस्करण (DR2.5)  और DR3 संस्करण उपलब्ध हुआ तब शोधकर्ताओं ने अपने शोध का दायरा बढ़ा दिया. इससे शोधकरताओं का उन तारों को भी शामिल करने का मौका मिला जो पिछले आंकड़ों में छूट गए थे. उन्होंने सैकड़ों की तादात में हेयाडेस के तारे मिले.  इसमें केंद्रीय तारा समूह 60 प्रकाश वर्ष चौड़ा है. इसकी ज्वार पूंछ हजारों प्रकाश वर्ष लंबी हैं.

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शोधकर्ताओं ने जब क्लस्ट के फटने का सिम्यूलेशन किया तो पाया कि इसमें तो और ज्यादा तारे हैं जो वास्तविक तारा समूह में नहीं पाए गए हैं. उन्होंने और ज्यादा सिम्यूलेशन किए तो पाया कि इसकी वजह किसी विशालकाय वस्तु से अंतरक्रिया होने के कारण ऐसा हो रहा है जो हमारे सूर्स से 1 करोड़ गुना बड़ा है, लेकिन दिख नहीं रहा है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह विशालकाय पिंड डार्क मैटर हो सकता है.
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