पृथ्वी के आकार के बाह्यग्रह ने पहले गंवाया, फिर दूसरी बार पाया वायुमंडल

शोधकर्ताओं ने पाया कि वर्तमान वायुमंडल (Atmosphere) इस बाह्यग्रह का मूल वायुमंडल नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शोधकर्ताओं ने पाया कि वर्तमान वायुमंडल (Atmosphere) इस बाह्यग्रह का मूल वायुमंडल नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

नासा (NASA) के हबल टेलीस्कोप से किए गए अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी से मिलते जुलते GJ 1132 b बाह्यग्रह का पहले वायुमंडल (Atmosphere) खो गया और फिर उसके बाद वहां दूसरा वायुमंडल बन गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 6:12 PM IST
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नासा (NASA) के वैज्ञानिक हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) के जरिए पृथ्वी (Earth) से 41 प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक पथरीले बाह्यग्रह (Exoplaent) का अध्ययन कर रहे थे. लाल बौने तारे GJ 1132 का चक्कर लगाते हुए इस GJ 1132 b ग्रह के बारे में उन्हें अनोखी बात का पता चला. उन्होंने पाया कि इस ग्रह में हमारी पृथ्वी के साथ कुछ समानता तो है , लेकिन कुछ मामलों में यह बहुत ही अलग है. इसमें सबसे अनोखी बात जो उन्होंने पाई वह यह कि GJ 1132 b में इस समय का वायुमंडल (Atomsphere) इस ग्रह का मूल वायुमंडल नहीं है.

कैसा है GJ 1132 b का वायुमंडल

GJ 1132 b और पृथ्वी में एक बहुत बड़ा अंतर यह पाया गया कि GJ 1132 b में वायुमंडल बहुत ही स्मॉग भरा, धुंधला वायुमंडल है जिसमें हाइड्रोजन, मीथेन और हाइड्रोजन साइनायड का जहरीला मिश्रण है. हबल टेलीस्कोप का उपयग करते हुए शोधकर्ताओं ने इस बात के स्पष्ट प्रमाण पाए कि यह GJ 1132 b का मूल वायुमंडल की संरचना नहीं है.

कैसे गायब हुआ पहला वायुमंडल
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि GJ 1132 b का मूल वायुमंडल तीव्र विकिरण के प्रभाव से उड़ गया था.  यह विकिरण इस ग्रह के पास के तारे से ही आया था. इस तथाकथित द्वितीयक वायुमंडल के बारे में माना जा रहा है कि इसका निर्माण ग्रह की सतह के नीचे ज्वालामुखी दरारों से लावा के बाहर आने के साथ निकली गैसों से बना है. इन दरारों से निकलने वाली गैसे लगातार वायुमंडल को लगातार फिर से भरने का काम करती रहीं.  नहीं तो यह वायुमंडल पास के तारे के विकिरणों की वजह से कब का खत्म हो गया था. यह पहली बार है कि हमारे सौरमंडल के बाहर किसी ग्रह में द्वितीयक वायुमंडल पाया गया है.

पहले पृथ्वी से कई गुना बड़ा था ये

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस ग्रह में पहला वायुमंडल खो गया होगा लेकिन बाद में ज्वालामुखी गतिविधि के कारण दूसरा वायुमंडल आया. GJ 1132 b बारे में माना जा रहा है कि इसकी शुरुआत के वायुमंडल में हाइड्रोजन की गैसीय परत हुआ करती थी. शुरुआत में इसका व्यास पृथ्वी से कई गुना ज्यादा था.



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पृथ्वी (Earth) से इस ग्रह की बहुत ज्यादा समानताएं भी पाई गई हैं. (तस्वीर: NASA)


नहीं सिकुड़ पाया यह ग्रह

इस ‘सब नेप्च्यून’ ग्रह के बारे में माना जाता है कि इसने जल्दी ही अपनी पुरातन हाइड्रोजन और हीलियम को खो दिया जिसकी वजह उसका युवा गर्म तारा था जिसका वह चक्कर लगाता है. बहुत ही कम समय में ऐसे ग्रह पृथ्वी की क्रोड़ के आकार के हो जाते हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि GJ 1132 b के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ.

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कैसा है दूसरा वायुमंडल

शोधकर्ताओं का मुताबिक हबल से अभी जो GJ 1132 b का वायुमंडल देखा गया वह इसका द्वितीयक वायुमंडल था. सीधे अवलोकन और कम्प्यूटर मॉडलिंग के नतीजों के जरिए शोधकर्ताओं ने बताया कि GJ 1132 b के वायुमंडल में हाइड्रोजन अणु, हाइड्रोजन साइनायड, मीथेन, और ऐरसॉल धुंध की मौजूदगी है. मॉडलिंग से पता चला है कि यह ऐरोसॉल धुंध पृथ्वी के फोटोकैमिकल स्मॉग की ही तरह बनी थी जो हाइड्रोकार्बन से पैदा होता है.

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शोधकर्ताओं ने पाया यह भी पाया कि दोनों ग्रहों (Planets) का सतही वायुमडंलीय दाब एक सा है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कैसे बना संतुलन

वैज्ञानिकों का मानना है कि GJ 1132 b के आज के वायुमंडल जो हाइड्रोजन है वह मूल वायुमंडल की हाइड्रोजन है, जो ग्रह के पिघले हुए मैंटल के मैग्मा ने अवशोषित की थी और अब धीरे धीरे ज्वालामुखी प्रक्रियाओं से नए वायुमंडल में आ रही है. इस तरह वायुमंडल में संतुलन आया. यह पड़ताल दूसरे  बाह्यग्रहों के अध्ययन में भी काम आएगी.

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द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में GJ 1132 b और पृथ्वी की समानता भी पता की गई हैं. दोनों के आकार, धनत्व और उम्र  एक सी हैं. दोनों के शुरुआती वायुमंडल में हाइड्रोजन की बहुतायत थी. दोनों ही पहले गर्म थे फिर ठंडे हुए. यहां तक कि दनों की सतह का वायुमंडलीय दाब भी एक सा है.
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