तानाशाह जिसने पत्नी के प्रेमी का सिर कटवाकर फ्रिज में रखा और हजारों भारतीयों को दिया देश-निकाला

इस तानाशाह के आदेश के बाद रातों रात हजारों भारतीयों का सबकुछ खत्म हो गया था. उन्हें खराब हाल में दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी थी.

News18Hindi
Updated: April 11, 2019, 4:15 PM IST
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युगांडा एक ऐसा देश है जो भारतीयों को तानाशाह ईदी अमीन की खौफनाक याद भी दिलाता है. अमीन 70 के दशक में जब सैन्य तख्तापलट के बाद युगांडा के शासक बने थे. तब उन्होंने कहर ढहा दिया था. एक आदेश पर उन्होंने हजारों भारतीय बाशिंदों को वहां से निकल जाने का आदेश दिया था. तब इसका असर वहां रह रहे 40 हजार भारतीयों पर पड़ा था. जो बिजनेस से लेकर नौकरियों तक में असरदार स्थितियों में थे.

ईदी अमीन के हटते ही बहुत से भारतीय मूल के लोग वापस युगांडा जाकर बस गए. वो अब वहां फिर बेहतर स्थितियों में हैं. युगांडा के शीर्ष दस धनी लोगों में तीन भारतीय हैं, उनका देश में खासा दबदबा है. वो वहां अपनी तमाम कंपनियों के जरिए हजारों लोगों को नौकरियां देते हैं.

भारतीयों को दो सूटकेस में जाने को कहा गया
ईदी अमीन का मानना था कि एशियाई लोग स्थानीय युगांडावासियों से अच्छा व्यवहार नहीं करते. साथ ही स्थानीय लोगों के पिछड़े होने की वजह एशियाई ही हैं. लिहाजा रातों-रात फरमान जारी हुआ कि सारे एशियाई देश छोड़कर चले जाएं. तब भारतीयों को संपत्तियां छोड़कर परिवार के साथ वहां से पलायन करना पड़ा.

अमीन ने जब एशियाइयों को वहां से जाने का आदेश दिया तो ये भी कहा कि निर्वासित होने वाले एशियाई अपने केवल दो सूटकेस और 55 पाउंड ही ले जा सकते हैं. करीब 50 हजार लोगों के पास ब्रिटिश पासपोर्ट थे जिसके आधार पर 30 हजार ब्रिटेन चले गए. बाक़ी ने अमेरिका कनाडा और भारत में शरण ली. हालांकि इसको लेकर इंग्लैंड में काफी विरोध भी हुआ. उनके वहां से जाते ही युगांडा की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई.

ईदी अमीन को दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में एक माना जाता है


बड़ी संख्या में गुजराती उद्योगपतियों पर गिरी थी गाज
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हालांकि एक साल पहले युगांडा के प्रेसिडेंट योवेरी मुसेवेनी ने कहा कि ईदी अमीन द्वारा भारतीयों को देश से निकालना बड़ी भूल थी. ईदी अमीन 1971 से 1979 तक युगांडा के तानाशाह थे. जो एशियाई युगांडा से निकाले गए, उनमें बड़ी संख्या में भारतीय, खासकर गुजराती उद्योगपति थे जो सौ साल से भी ज्यादा समय से वहां रह रहे थे.

भारतीयों के पास ब्रिटिश के साथ युूगांडा के पासपोर्ट होने की भी कहानी है. युगांडा 1962 में आजाद हुआ था, लिहाजा वहां से इससे पहले से रहने वाले एशियाइयों के पास युगांडा के साथ ब्रिटिश नागरिकता भी थी. जब अमीन शासनकाल में भारतीय मूल के लोगों को वहां से निष्कासित किया गया, तब भारत ने युगांडा से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिये.

ईदी अमीन को लेकर ये अटकलें भी थीं कि वो नरभक्षी है


रेलवे मजदूर बनकर युगांडा गए थे भारतीय
ज्यादातर भारतीय वहां युगांडा में 1896 से 1901 के बीच रेलवे के निर्माण के लिए मजदूर के रूप में वहां भेजे गए थे. इसमें से ज्यादातर लोगों ने फिर वहीं बसने का फैसला किया. वो भारत जाकर अपने परिवारों को वहां ले आए. ये लोग ज्यादातर गुजरात और पंजाब के थे. उन्होंने वहां धीरे धीरे अपनी स्थिति बेहतर कर ली थी.

कुछ समय बाद उन्होने चीनी, कॉफी और चाय उगाने में अपनी किस्मत आज़माई और उसके बाद फिर मैन्युफैक्चरिंग में. वे देश में नई तकनीक लाए, लोगों को प्रशिक्षण और काम दिया. धीरे धीरे वे समाज का अमीर तबका बन गए. लेकिन आमीन का कहना था उन्होने युगांडा और उसके लोगों का शोषण करना शुरू कर दिया.

ईदी अमीन ने सत्ता में आते ही उन भारतीयों को देश से निकल जाने का आदेश दिया, जो वहीं पैदा हुए थे, जिनके परिवार सौ सालों से वहां रह रहे थे


सैनिक के रूप में अमीन ने शुरू किया था करियर
इदी अमीन मामूली सैनिक के रूप में 1946 में ब्रिटिश औपनिवेशिक रेजिमेंट किंग्स अफ़्रीकां राइफल्स में शामिल हो हुआ था. फिर वो सेना में तरक्की करता गया. 25 जनवरी 1971 को जब सेना ने युगांडा में सैन्य तख्तापलट द्वारा प्रधानमंत्री मिल्टन ओबोटे को पद से हटाने के दौरान वो सेना में मेजर जनरल से कमांडर बन चुका था.

जब वो देश के प्रमुख पद पर आसीन हुआ तो उसने खुद को फील्ड मार्शल के रूप में प्रोमोट कर दिया. 1977 से 1979 तक अमीन ने खुद को कई पदवियों और पदों से नवाज़ा-जिसमें "महामहिम, आजीवन राष्ट्रपति, फील्ड मार्शल, अल हदजी डॉक्टर, ईदी अमीन दादा, वीसी, डीएसओ, एमसी,अफ्रीका व विशेष रूप से युगांडा में ब्रिटिश साम्राज्य का विजेता " की उपाधियां शामिल थीं.

ईदी अमीन ने एक साधारण सैनिक के रूप में करियर शुरू किया लेकिन वो तेजी से ऊपर चढ़ता गया


करीब पांच लाख हत्याएं कराईं
अमीन नौ सालों तक युगांडा की सत्ता पर काबिज रहा. इस दौरान देश में जमकर दमन, उत्पीड़न और गैरकानूनी हत्याएं हुईं. देश में मानवाधिकारों के दुरूपयोग के साथ भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन का भी जबरदस्त सिलसिला चला. माना जाता है कि अमीन के शासनकाल में देशभर में पांच लाख लोग मार डाले गए. अमीन को लीबिया के मुअम्मर अल-गद्दाफी के अलावा सोवियत संघ तथा पूर्वी जर्मनी का समर्थन हासिल था. लेकिन कई देशों ने अपने राजनयिक संबंध युगांडा से खत्म कर लिये.

हैवीवेट चैंपियन बॉक्सर था
अमीन के शासनकाल असंतोष लगातार पनपता रहा. हालांकि उसने इसे बलपूर्वक दबाने की भरसक कोशिश की लेकिन तंजानिया के खिलाफ युद्ध छेड़ना उसे भारी पड़ गया. उसे देश से भागना पड़ा. पहले लीबिया और फिर सऊदी अरब ने उसे राजनीतिक शरण दी. 16 अगस्त 2003 को उसकी मृत्यु हो गई.
उसका परिवार रोमन कैथोलिक ईसाई था. बाद परिवार ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था.

अपनी एक बीवी के जन्मदिन पर केक काटते हुए ईदी अमीन


जब ईदी अमीन छोटा था, तभी पिता ने उसे छोड़ दिया. ननिहाल में उसका पालन पोषण हुआ. चौथी क्लास तक पढाई के बाद उसने स्कूल छोड़ दिया था. सेना में भर्ती होने से पहले कई छोटे-मोटे काम किए. सेना में भर्ती होने के बाद उसने तेजी से तरक्की की. वो असाधारण तौर पर लंबा और ताकतवर शरीर वाला था. वो छह फीट चार इंच का था. हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन होने साथ अच्छा तैराक और रग्बी फॉरवर्ड था.

महारानी एलिजाबेथ को भेजा था प्रेम पत्र
1976 के अंत के पास, अमीन ने खुद को "स्कॉटलैंड का बेताज बादशाह" घोषित किया. वो स्कॉटिश किल्ट (एक प्रकार का परिधान) पहन कर मेहमानों और गणमान्य लोगों का स्वागत करने लगा. उसने रानी एलिजाबेथ द्वितीय को लिखा, ​​"मैं चाहता हूं कि आप मेरे लिए स्कॉटलैंड, आयरलैंड तथा वेल्स की यात्राओं का प्रबंध करें ताकि मैं उन क्रांतिकारी आंदोलनों के प्रमुख लोगों से मिलूं जिन्होंने आपके साम्राज्यवादी उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ी है". कथित रूप से उसने ब्रिटेन की महारानी को ये संदेश भी भेजा, "प्रिय लिज़, यदि तुम असली मर्द के बारे में जानना चाहती हो, तो कंपाला आओ."

हेलीकॉप्टर में बैठकर भागा था तानाशाह अमीन
इस तरह की अफवाहें भी फैलीं कि वो नरभक्षी था.विदेशी मीडिया अक्सर उसे अजीबोगरीब शख्स के तौर पर दिखाता था. 1977 में टाइम पत्रिका के एक लेख में उसे "हत्यारा व जोकर, बड़े दिल वाला विदूषक और एक सैन्य अनुशासन में रहने वाले एक अकडू" के रूप में बताया गया. हालांकि 1978 से अमीन के समर्थकों और सहयोगियों की संख्या में कमी आने लगी. उसके खास लोग वहां से भागकर निर्वासित जीवन जीने लगे. इसी दौरान जब एक युगांडा में विद्रोहियों ने तंजानिया की शरण ली तो अमीन ने तंजानिया पर हमला बोला. हालांकि ये भारी साबित हुआ. तंजानिया के जवाबी हमले के बाद उसे हेलीकॉप्टर पर बैठकर देश से भागना पड़ा.

अपनी बीवियों के साथ ईदी अमीन, जब वो युगांडा का राष्ट्रपति था (फाइल फोटो)


ईदी अमीन 1980 तक लीबिया में रहा, फिर वो सऊदी अरब में बस गया. हालांकि उसके लिए उसने अच्छा खासा भुगतान किया. हालांकि उसने अपने शासन के तौर-तरीकों पर कभी पछतावा जाहिर नहीं किया. उसने एक बार युगांडा वापस लौटने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया.

छह बीवियां, कई रखैल और 45 बच्चे
ईदी अमीन ने कम से कम छह महिलाओं से विवाह किया. तीन को तलाक दे दिया. माना जाता है कि उसकी सभी बीवियां खूबसूरत थीं. कहा जाता है कि उसने अपनी एक पत्नी की हत्या करा दी तो एक अन्य पत्नी के पूर्व प्रेमी को गायब करा दिया. उसके एक नौकर ने एक बार युगांडा में भारतीय उच्चायुक्त को बताया था कि वह उस प्रेमी के कटे सिर को एक खूफिया कमरे में फ्रिज में रखता था. जब उसकी पत्नी के अपने प्रेमी के कटे सिर को देखा तो वह बेहोश हो गई थी. जब वो लीबिया में निर्वासित हुआ तो उसने आभार स्वरूप मुअम्मर अल-गद्दाफी की बेटी आयशा से शादी की लेकिन बाद में तलाक हो गया. 1993 तक अमीन अपने आखिरी नौ बच्चों और एक पत्नी मामा ए चुमारू के साथ रह रहा था.

माना जाता है कि उसके 30 से 45 बच्चे थे. उसके कुछ बच्चे युगांडा में काफी अच्छी स्थिति और पदों पर हैं. द मॉनिटर के अनुसार, 2003 में अपनी मौत से कुछ महीने पहले ही अमीन ने एक और शादी की थी. ये भी कहा जाता है कि शादी के अलावा उसके कई रखैल भी थीं.

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