जन्मदिन विशेष: दुनिया को वैक्सीन देकर चेचक से राहत दिलाई थी एडवर्ड जेनर ने

एडवर्ड जेनर को प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology) का पिता कहा जाता है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

एडवर्ड जेनर को प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology) का पिता कहा जाता है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

कोरोनाकाल में दुनिया को पहली वैक्सीन (Vaccine) देने वाले एडवर्ड जेनर (Edward Jenner) को याद करने बहुत जरूरत है जिनकी वैक्सीन ने संसार से चेचक (Small Pox) को मिटा कर रख दिया.

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कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर ने वैक्सीन के महत्व को रेखांकित किया है. दुनिया भर के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोविड-19 का अब एकमात्र इलाज तेजी से व्यापक पैमाने पर टीकाकरण ही है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वैक्सीन (Vaccine) की अवधारणा दुनिया में कैसे आई. 17 मई को दुनिया की पहली वैक्सीन बनाने वाले एडवर्ड जेनर (Edward Jenner) को याद करने का दिन है. जेनर ने ही दुनिया को चेचक की वैक्सीन बना दी थी जिससे दुनिया का नामोनिशान मिट गया था.

चेचक से मुक्ति

अंग्रेज चिकित्सक एडवर्ड जेनर को वैक्सीन का पिता कहा जाता है. उन्हें ही दुनिया की पहली वैक्सीन बनाने का श्रेय दिया गया है. चेचक दुनिया की पहली बीमारी थी जिसके टीके की खोज हुई थी. साल 1976 में जेनर ने ही इसका टीका खोजा था. उस समय चेचक एक बहुत ही गंभीर और जानलेवा बीमारी थी जिसमें संक्रमित बच्चों में मृत्यु दर 80 फीसदी थी. टीकाकरण के कारण ही इस बीमारी का दुनिया से नामोनिशान मिट गया.

बचपन में ही चेचक का संक्रमण?
जेनर का जन्म 17 मई 1749 में इंग्लैंड के ग्लूसेस्टरशायर के बर्केले में हुआ था. स्कूल के दिनों में ही उन्हें चेचक का संक्रमण दिया गया था. इसका आजीवन उनके स्वास्थ्य पर असर हुआ. बचपन से ही अच्छी शिक्षा के चलते 21 साल की उम्र में ही वे लंदन में सर्जन बन गए थे और जल्दी ही वे मशहूर पारिवारिक चिकित्सक बन गए और बर्केले में प्रैक्टिस करने लगे.

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एडवर्ड जेनर की चेचक की वैक्सीन (Vaccine) दुनिया की पहली वैक्सीन मानी जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

ग्वालों में होने वाली काउपॉक्स से निकली राह



उस जमाने में प्रतिरक्षा बढ़ाने के ले कई पद्धतियों का उपयोग हुआ करता था जिसमें संक्रमण देकर लोगों में प्रतिरक्षा मजबूत करने का जोखिम भरा तरीका भी शामिल था. खुद जेनर पर यह तरीका आजमाया गया था. लेकिन इसकी सफलता बहुत अधिक नहीं थी. 1770 के दशक और उसके बाद बहुत से वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्वालों को होने वाली काउपॉक्स बीमारी और चेचक के बीच संबंध है और काउपॉक्स चेचक रोधक है. जेनर भी उनमें से एक थे.

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गाय के जरिए टीका

जेनर ने 1796 में जेम्स पिप्स नाम के 13 साल के एक लड़के पर काऊपॉक्‍स को लेकर शोध किया. उन्‍होंने उसके हाथ में कट लगाकर उसे काऊपॉक्‍स से संक्रमित किया. फिर ये साबित किया कि ये संक्रमण स्‍मॉलपॉक्‍स नहीं है बल्कि एक चेचक को रोकने का तरीका देने वाला संक्रमण हो सकता है. इसके बाद उन्‍होंने चेचक का टीका बनाया जो दुनिया का पहला टीका माना जाता है.

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कोविड (Covid-19) काल में एडवर्ड जेनर का योगदान बहुत अहमियत रखता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

दुनिया भर में ख्याति

19वीं सदी की शुरुआत से ही जेनर विश्व विख्यात हो गए. उनकी खोज की कहानी जल्द ही यूरोप में फैल गई. इसके बाद अमेरिका, चीन, फिलीपींस, और अन्य देशों में भी जेनर का टीका पहुंचाया जाने लगा और सभी अभियान पूरी तरह से सफल रहे. इस बीच वे ब्रिटेन से दूर भी रहे और साल 1811 में वापस ब्रिटेन लौटे और उन्हें वहां टीका लगने के बाद भी होने वाली बीमारी का अध्ययन भी किया.

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नेपोलियन से भी मिला मेडल

1821 में जेनर किंग जॉर्ज चुतर्थ के विशेष चिकित्सक बना दिए थे.  उन्हें बर्केले का मेयर भी बनाया गया. यहां तक कि नेपोलियन जिनका अंग्रेजों से युद्ध चल रहा था, ने अपने सभी सैनिकों को टीका लगवाया और जेनर को मेडल से सम्मानित भी किया. 1841 में ब्रिटिश सरकार ने चेचक के टीके को मुफ्त कर दिया.

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