जानिए दो तारों की एक घटना का क्या है आइंस्टीन की थ्योरी और GPS से संबंध

जीपीएस सिस्टम (GPS Suystem) की सटीकता पर आइंस्टीन के सापेक्षता के ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट (Gravitational Redshift) का असर होने के संकेत मिले हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जीपीएस सिस्टम (GPS Suystem) की सटीकता पर आइंस्टीन के सापेक्षता के ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट (Gravitational Redshift) का असर होने के संकेत मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दो तारों का सिस्टम (System of Star) आइंस्टीन के ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट Gravitational Redshift) के लक्षण दिखा रहा है जो हमारी पृथ्वी के GPS सिस्टम को की गणना में भी त्रुटियां ला सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 1:25 PM IST
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क्या सुदूर होने वाली घटना का मानव जीवन पर कोई गहरा प्रभाव पड़ता है? इस सवाल का जवाब आमतौर पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ना ही मिलेगा, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने अरबों किलोमीटर दूर के दो तारों (Stars) की एक घटना का असर पृथ्वी (Earth) के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, जिसे हमें GPS कहते हैं, पर होना तय माना जा रहा है. इतना ही नहीं इसका संबंध महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन (Albert Einsien) से भी है.

ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट
आइंस्टीन का सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत में ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट का प्रभाव का जिक्र है जहां स्पैक्ट्रम में प्रकाश का लाल रंग की ओर जाना गुरुत्व के कारण होता है. नासा की चंद्रा एक्स रे ऑबजर्वेटरी का उपयोग कर खगोलविदों ने दो तारों में इस घटना का अवलोकन किया है.  ये तारे हमारी पृथ्वी से 29000 प्रकाश वर्ष दूर हैं.

पृथ्वी पर कैसा असर
वैसे तो ये तारे पृथ्वी से बहुत दूर हैं, लेकिन इस  घटना का वहां होना पृथ्वी पर कई बदलाव ला सकता है. अब पृथ्वी के वैज्ञानिक और इंजीनियिरों को इसकी वजह से जीपीएस की सटीक स्थितियों का आंकलन करने के लिए ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट को अपनी गणना की प्रक्रिया में शामिल करना पड़ेगा जिसका वे जीपीएस में उपयोग करते हैं.



यह प्रभाव हमारे सौरमंडल में भी 
वैज्ञानिकों ने हमारे सौरमंडल में भी ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट के अकाट्य प्रमाण पाए हैं, लेकिन इन्हें अंतरिक्ष में सुदूर तारों के बीच अवलोकित करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था. अब चंद्रा ऑबजर्वेटरी से नए प्रमाण हासिल हुए हैं कि ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट का प्रभाव नई कॉस्मिक स्थितियों में भूमिका निभाता है.



क्या है यह सिस्टम
इस अजीब सिस्टम का नाम 4U 1916-053 है जिसमें दो तारे बहुत ही नजदीकी कक्षा में एक दूसरे का चक्कर लगा रहे हैं. इस सिस्टम में एक तारा केंद्र में है जो सूर्य से कहीं ज्यादा घना है. केंद्र का तारा न्यूट्रॉन तारा है जो किसी विशाल तारे के सिमटने के बाद हुए सुपरनोवा बनने के बाद बनता है. ये दो घने तारे एक दूसरे से केवल 215 हजार मील दूर हैं. यह करीबन पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी होती है. लेकिन पास का तारा न्यूट्ऱॉन तारे का एक चक्कर केवल 50 मिनट में ही पूरा कर लेता है.

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स्पैक्ट्रम में पता चला प्रभाव
शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम का एक्स रे स्पैक्ट्रम का विश्लेषण किया. उन्होंने स्पैक्ट्रम में लोहे और सिलिकॉन द्वारा अवशोषित एक्स रे प्रकाश के संकेत पाए. तीन अलग अवलोकन में आंकड़ों ने बताया की जहां स्पैक्ट्रम में लोहे या सिल्कॉन को एक्स रे अवलोकित करनी चाहिए थीं वहां एक्स रे किरणों की मात्रा कम हो गई हैं और वे लाल रंग की वेवलेंथ की किरणों की ओर जा रही हैं. शोधकर्ताओं ने  निष्कर्ष निकाला कि यह ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट के कारण हो रहा है.

जीपीएस पर असर?
आइंस्टीन के सिद्धांत ने अनुमान लगाया गया था कि ताकतवर गुरुत्व के प्रभाव में  घड़ियां सुदूर इलके के कमजोर गुरूत्व की तुलना में धीमी गति से चलती हैं इसका मतलब यह हुआ कि पृथ्वी का चक्कर लगा रहे उपग्रहों से अवलोकित की जाने वाले पृथ्वी की घड़ियां धीमी गति से चलती दिखेंगी. इसका मतलब यह हुआ कि जीपीएस के अवलोकन भी उतने सटीक नहीं होंगे इनमें ज्यादा सटीकता के लिए इस प्रभाव को जीपीएस की गणना में शामिल करना होगा. नहीं तो समय में थोड़ा सा अंतर जगहों का स्थिति का गलत आंकलन करवा देगा.

Earth GPS, Gravitational Redshift
ग्रैविटेशनल रेडशिफ्ट (Gravitational Redshift) के कारण जीपीएस में बदलाव करने होंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


प्रकाश भी अछूता नहीें इस प्रभाव से
इसी तरह एक्स रे सहित सभी तरह के प्रकाश भी गुरूत्व के प्रभाव में होते हैं.  यह वैसा ही है जैसे कई आदमी नीचे जाते एस्केलेटर पर चढ़ने की कोशिश कर रहा हो. ऐसा करते हुए वह व्यक्ति अधिक ऊर्जा गंवाएगा बजाय एस्केलेटर स्थिर हो या फिर ऊपर जा रहा हो. गुरुत्व का प्रकाश पर भी कुछ ऐसा ही प्रभाव पड़ता है, जहां ऊर्जा के नुकसान होने पर कम आवृत्ति मिलती है.

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चूंकि निर्वात में प्रकाश एक ही गति से चलता है, ऊर्जा का गंवाना और कम आवृति का मतलब होता है कि प्रकाश लंबी वेवलेंथ की ओर जा रहा है. इस मामले में यह इस तरह का पहला प्रमाण है. इससे पहले सफेद ड्वार्फ तारों में ऐसा देखने को मिला था. अब शोधकर्ता इस सिस्टम का अवलोकन करने के लिए और अधिक समय चाहते हैं.
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