क्या है तिरुमंगलम फॉर्मूला, जिससे पक्की हो जाती है तमिलनाडु में कैंडिडेट की जीत

तिरुमंगलम फॉर्मूले के हिसाब से तमिलनाडू में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी के पास 12 करोड़ रुपए और लोकसभा चुनाव जीतने के लिए 60 करोड़ रुपए होने चाहिए.

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Updated: April 17, 2019, 8:35 PM IST
क्या है तिरुमंगलम फॉर्मूला, जिससे पक्की हो जाती है तमिलनाडु में कैंडिडेट की जीत
प्रतीकात्मक तस्वीर (चुनाव)
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Updated: April 17, 2019, 8:35 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण की वोटिंग 18 अप्रेल को होनी तय हुई. इसी चरण में तमिलनाडु के वेल्लोर क्षेत्र में भी चुनाव होने तय थे. लेकिन निर्वाचन आयोग ने वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र के चुनाव रद्द कर दिए हैं. चुनाव रद्द करने की वजह वेल्लोर लोकसभा से भारी मात्रा में नकदी बरामद होना है.

पिछले महीने आयकर विभाग और चुनाव आयोग के अधिकारियों ने डीएमके के उम्मीदवार के कार्यालय पर छापा मार बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया था. निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी थी. इसी सिफारिश पर राष्ट्रपति ने फैसला लिया.

बता दें कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति जारी करता है. चुनाव रद्द करना भी राष्ट्रपति के ही अधिकार क्षेत्र में आता है.

कैश फॉर वोट

वेल्लोर सीट पर 'चुनाव में कैश फॉर वोट' की वजह से चुनाव रद्द हुए हैं. यहां करीब 11 करोड़ रुपये कैश बरामद होने की खबर है. वेल्लोर सीट से कथिर आनंद डीएमके प्रत्याशी हैं. इनपर कैश फॉर वोट का आरोप लगा है. कथिर आनंद, डीएमके के कोषाध्यक्ष दुरईमुर्गन के बेटे हैं. बता दें कि तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में पैसों के आधार पर चुनाव जीतना आम है. वहां तिरुमंगलम फॉर्मूले के चलते कैंडिडेट की जीत तय की जाती है.



अप्रैल 2016 में भी अरावाकुरुची में चुनाव रद्द हुए थे. तब AIADMK से जुड़े लोगों के पास से कैश बरामद हुआ था. जो कि 100 करोड़ रुपए था. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक तिरुमंगलम फॉर्मूले के हिसाब से तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी के पास 12 करोड़ रुपए और लोकसभा चुनाव जीतने के लिए 60 करोड़ रुपए होने चाहिए.
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कहा जाता है कि ये रकम वहां के मतदाताओं को बांटी जाती है. मतदाताओं को पैसे बांटने के तरीके को ही तिरूमंगलम फॉर्मूला कहा जाता है.



क्या है तिरुमंगलम फॉर्मूला
तिरुमंगलम फॉर्मूले के तहत मतदाताओं को 5 हजार रुपए प्रति व्यक्ति कैश मिलते हैं. उम्मीदवारों की ओर से ये पैसा मतदाताओं को सुबह के अखबार के साथ लिफाफे में रखकर, पार्टी के चिन्ह के साथ भेज दिया जाता है.

ये पैसा बांटने वाला व्यक्ति सीध तौर पर कौन है, पता लगाना मुश्किल होता है. ये कैश बांटने को सीधे तौर पर पकड़ना मुमकिन नहीं. पैसे किसने दिए, इस बात का भी कोई सबूत नहीं होता. क्योंकि पैसा कोई व्यक्ति नहीं, लोकल डिस्ट्रिब्यूटर के द्वारा बांटा जाता है.

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