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ब्रह्माण्ड में कैसे बन गए लोहे से भारी तत्व, भारतीय खगोलविदों ने खोजा रहस्य

ब्रह्माण्ड में कैसे बन गए लोहे से भारी तत्व, भारतीय खगोलविदों ने खोजा रहस्य

वैज्ञानिकों ने पाया कि अभी जिन तारों में लोहे से भारी तत्व (Elements Heavy Than Iron) प्रचुर हैं, वे वहां पास के साथी तारे से आए थे. (तस्वीर: NASA ESA T. Brown S. Casertano and J. Anderson)

वैज्ञानिकों ने पाया कि अभी जिन तारों में लोहे से भारी तत्व (Elements Heavy Than Iron) प्रचुर हैं, वे वहां पास के साथी तारे से आए थे. (तस्वीर: NASA ESA T. Brown S. Casertano and J. Anderson)

अंतरिक्ष (Space) में लोहे से हलके तत्वों (Lighter Elements) का निर्माण कैसे होता है इसके बारे में वैज्ञानिकों को पहले से काफी कुछ मालूम है. लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों को यह पता नहीं लग पा रहा था कि लोहे से भारी तत्वों का निर्माण और विकास कैसे होता है. भारतीय खगोलविज्ञान संस्थान (IIA) के खगोलविदों ने इस रहस्य से पर्दा उठाने के काम किया है. उन्होंने अपने अवलोकनों में पाया है कि कार्बन एनहांस्ड मैटल पुअर में प्रचुर मात्रा में मौजूद ये तत्व कहां से आए थे.

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    ब्रह्माण्ड (Universe) में रासायनिक तत्वों (Chemical Elements) और उनके आइसोटोप का निर्माण और विकास कैसे हुए यह वैज्ञानिकों के लिए हमेशा एक बड़ा रहस्य रहा है. इस सवाल के जबाव के संकेत तारों के निर्माण से लेकर ब्रह्माण्ड के इतिहास तक में छिपे हुए हैं. भारतीय वैज्ञानिकों ने अब लोहे से भारी तत्वों (Heavy Elements) का निर्माण कैसे हुए, इस बारे में अहम मालूमात हासिल की है. उन्होंने पाया है कि इन भारी तत्वों के निर्माण में कम भार वाले कार्बन संपन्न तारों के साथी तारों का योगदान है. इसके लिए शोधकर्ताओं ने दुनिया बड़ी वेधशालाओं के टेलीस्कोप की मदद ली.

    कार्बन संपन्न तारों से
    शोधकर्ताओं का कहना है हि कि ये भारी तत्व वास्तव में कार्बन संपन्न तारों से चुराए गए थे. ऐसा नहीं है कि रासायनिक तत्वों की उत्पत्ति के बारे में हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानकों को बिलकुल भी जानकारी नहीं थी. तत्वों की उत्पत्ति के बारे में काफी जानकारी होने के बाद भी लोहे से भारी तत्वों की उत्पत्ति की जानकारी स्पष्ट रूप से पता नहीं थी.

    CEMP तारे
    भारत के बेंगलुरू स्थित भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) के खलोविदों ने खास तरह के तारों अध्ययन किया जिन्हें कार्बन एनहांस्ड मैटल पुअर (CEMP) तारे कहा जाता है.उन्होंने ऐसे बहुत से तारों की सतह की रासायनिक संरचना का विश्लेषण का और इस गुत्थी को सुलझाने के लिए काफी जरूरी जानकारी हासिल कर ली.

    चार अलग अलग प्रकार के तारे
    प्रोफेसल अरुणा गोस्वामी की अगुआई में उनकी छात्रा मीनाक्षी पी और शीजीलामल रे का यह अध्ययन दो शोधपत्रों के रूप में एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है. सीईएमपी तारों को भारी तत्वों की प्रचुरता के आधार पर चार प्रमुख समूह में वर्गीकृत किया गया है. इसमें ज्यादातर बौने तारे (Dwarf Stars), उपविशालकाय तारे (Sub giant stars) या विशालकाय तारे (Giant Stars) हैं.

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    अध्ययन में पाया गया है कि इन तत्वों (Elements) के निर्माण में साथी तारे की भूमिका ज्यादा थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    तारों की सतह पर प्रचुर मात्रा
    जो तारे इन आरंभिक अवस्थाओं में होते हैं वे लोहे से भारी तत्वों का निर्माण नहीं कर सकते है. प्रोफेसर गोस्वामी ने बताया, “आरंभिक अवस्थाओं में ये तारे भारी तत्व नहीं पैदा कर सकते हैं. लेकिन इन तारों की सतह की रासायनिक संरचना में भारी तत्वों की प्रचुर मात्रा होती है जो सूर्य की तुलना में सौ से हजार गुना ज्यादा होती है.”

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    दुनिया के तीन बड़े टेसीस्कोप के आंकड़े
    प्रो गोस्वामी ने बताया कि इसीलिए उनकी टीम ने यहीं पर रासायनिक प्रचुरता के संकेतों को देखना शुरू किया. टीम ने भारतीय खगोलविज्ञान वेधशाला,हेनले के दो मीटर बड़े हिमालय चंद्रा टेलीस्कोप, चिली के ला सिला की यूरोपियन साउदर्न वेधशाला के टेलीस्कोप और हवाई के माउनाकिया की चोटी पर रखा 8.2 मीटर लंबे SUBARU टेलीस्कोप का उपयोग किया.

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    जिन तारों में ऐसे तत्वों का निर्माण हुए वे सफेद बौने (White Dwarft) में बदल गए थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons_ ESO_L Calçada)

    तत्वों की प्रचुरता का अनुपात
    इन अवलोकनों से शोधकर्ताओं को तारों के उच्च गुणवत्ता और उच्च विभेदन स्पैक्ट्रा मिल सका है. शोधकर्ताओं ने कुछ तत्वों की प्रचुरता के अनुपात का उपयोग किया जिसमें कार्बन, मैग्नीशियम, स्ट्रोन्टियम, बेरियम, यूरोपियन, लैथेनियम जैसे तत्व शामिल हैं. इनमें उनकी उत्पत्ति के संकेत भी छिपे थे.

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    शोधकर्ताओं ने पाया कि CEMP तारों में अवलोकित किए गए भारी तत्व, उनके कम भार वाले  साथी तारों में पैदा हुए थे. ये उत्पत्ति विकास के एक खास चरण में हुई थी जिसे एसिम्पटोटिक जायंट ब्रांच कहते हैं. इसके बाद ये बहुत सारी भार स्थानांतरण प्रणालियों द्वारा CEMP तारों में स्थानांतरित हो गे थे. कम भार वाले ये साथी बाद में सफेद बौनों में विकसित हो गए और उन्हें पहचानना बहुत मुश्किल हो गया.

    Tags: Research, Science, Space

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