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Ellenabad By Election Result: नतीजे से तय होगा किसान आंदोलन का भविष्य! पढ़िये ये विश्लेषण

Ellenabad By Election Result: नतीजे से तय होगा किसान आंदोलन का भविष्य! पढ़िये ये विश्लेषण

हरियाणा के ऐलनाबाद विधानभा उप चुनाव किसान आंदोलन के लिए एक रायशुमारी हो सकती है.

हरियाणा के ऐलनाबाद विधानभा उप चुनाव किसान आंदोलन के लिए एक रायशुमारी हो सकती है.

Ellenabad Chunav Result Live Update: हरियाणा की इस एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे का प्रभाव देशव्यापी किसान आंदोलन पर पड़ने की उम्मीद है.

    Ellenabad Chunav Result Live Update: हरियाणा के ऐलनाबाद विधानसभा उप चुनाव की चर्चा दूर-दूर तक है. यहां 30 अक्टूबर यानी शनिवार को वोट डाले गए थे. आज मतों की गिनती हो रही है. दोपहर तक नतीजे आने की उम्मीद है. दरअसल, मौजूदा वक्त में ऐलनाबाद उपचुनाव महज एक विधानसभा चुनाव नहीं रह गया है. बल्कि इसके नतीजे उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक की राजनीति और किसान आंदोलन के भविष्य को प्रभावित करेंगे. मजेदार बात यह है कि इस चुनाव में कोई किसान नेता उम्मीदवार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद किसानों के सभी बड़े नेता यहां प्रचार में लगे हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत खुद यहां प्रचार करने पहुंच रहे हैं. ऐसे में यह चुनाव किसी भी पार्टी की जीत से अधिक किसान आंदोलन के मसले पर एक रायशुमारी में तब्दील हो गया है.

    क्यों अहम हो गया है ऐलनाबाद उप चुनाव
    ऐलनाबाद में उपचुनाव इनेलो के नेता अभय चौटाला के इस्तीफा देने का कारण करवाया जा रहा है. अभय चौटाला पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से विजयी हुए. वह अपनी पार्टी के एक मात्र विधायक थे. लेकिन इस साल जनवरी में उन्होंने किसानों के समर्थन में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इस बार के उपचुनाव में वह एक बार फिर अपनी पार्टी के उम्मीदवार हैं.

    उनके इस्तीफे को किसानों का समर्थन हासिल करने के एक कदम के रूप में देखा गया. उन्होंने अब इस उपचुनाव को किसानों के मसले पर एक रायशुमारी के रूप में पेश किया है. ऐलनाबाद एक ग्रामीण इलाका है और यहां के अधिकतर वोटर खेती-किसानी पर निर्भर हैं.

    कांग्रेस ने यहां से भाजपा से बगावत कर आए नेता पवन बेनिवाल को उम्मीदवार बनाया है जबकि भाजपा ने यहां से हरियाणा लोकहित पार्टी के विधायक गोपाल कांडा के भाई गोविंद कांडा को उम्मीदवार बनाया है. कांडा को भाजपा की सहयोगी जननायक जनता पार्टी का समर्थन प्राप्त है.

    किसानों के लिए क्यों अहम है यह उपचुनाव
    दरअसल, देशव्यापी किसान आंदोलन का केंद्र हरियाणा, पंजाब और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके हैं. बीते 11 महीने से इस मसले पर किसानों का आंदोलन चल रहा है. इन 11 महीनों में हरियाणा के किसी विधानसभा सीट पर यह पहला चुनाव है. इस चुनाव में किसान आंदोलन से जुड़े नेता खुलकर भाजपा के विरोध में वोट करने के लिए अभियान चला रहे हैं. हालांकि वे किसी खास पार्टी को वोट देने की अपील नहीं कर रहे हैं.

    ऐसे में यह उपचुनाव एक रायशुमारी का शक्ल ले लिया है. किसानों का कहना है कि अगर इस चुनाव में वे भाजपा को भारी मतों के अंतर से हराने में सफल हो जाते हैं तो इससे किसान आंदोलन के भविष्य पर काफी असर पड़ेगा.

    दूसरी तरह यह चुनाव पंजाब और अगले साल के शुरू में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ ही माह पहले हो रहा है. ऐसे में इसके नतीजे इन दोनों राज्यों पर असर डालेंगे क्योंकि इन दोनों राज्यों में किसान आंदोलन का प्रभाव काफी व्यापक माना जाता है.

    किसान क्यों कर रहे हैं भाजपा को वोट न देने की अपील
    दरअसल, किसानों का विरोध केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर है. इस मसले पर केंद्र की भाजपा सरकार के साथ तमाम दौर की बातचीत विफल हो चुकी है. दूसरी तरफ हरियाणा और केंद्रीय स्तर के तमाम भाजपा नेता यह कह चुके हैं कि यह आंदोलन कुछ मुट्ठीभर किसानों का है. इससे व्यापक और निचले तबके के किसानों को कुछ लेनादेना नहीं है.

    ऐसे में यह उपचुनाव किसानों के लिए एक मौका है कि वह यह साबित करें कि आंदोलन को समूचा किसान तबका समर्थन कर रहा है.

    चौटाला जीते तो क्या होगा?
    ऐलनाबाद सीट पर हमेशा से चौटाला परिवार का प्रभाव रहा है. यहां से अभय चौटाल फिर मैदान में हैं. वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद लगातार किसानों के आंदोलन में शामिल होते रहे हैं. उनके पिता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी लगातार किसानों के आंदोलन में शरीक होते रहे हैं. अगर अभय चौटाला यहां से फिर से जीतते हैं तो वह इस नतीजे को किसानों के आंदोलन पर एक रायशुमारी के रूप पेश कर सकते हैं.

    वहीं कांग्रेस के पवन बेनिवाल की जीत भी कुछ ऐसा ही संदेश देगी. उनकी जीत पर भी किसान यह दावा कर सकते हैं कि जनता ने भाजपा को खारिज कर दिया है.

    अगर भाजपा जीतती है तो क्या होगा
    भाजपा किसान आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बताती रही है. वह कहती रही है कि इसके पीछे कांग्रेस और कम्युनिस्टों का हाथ है. पार्टी ने यहां तक दावा किया है कि आंदोलन कर रहे किसानों के पास कोई जनाधार नहीं है. ऐसे में यहां से भाजपा की जीत पार्टी को नई ऊर्जा देगी और किसान आंदोलन के लिए एक झटका साबित होगी.

    चौटाला परिवार और ऐलनाबाद
    हरियाणा में चौटाला परिवार को राज्य की राजनीति की फर्स्ट फैमिली कहा जाता है. इस परिवार का सिरसा जिले पर व्यापक प्रभाव है. इसी जिले में ऐलनाबाद आता है. यहां से अधिकतर बार परिवार का कोई सदस्य या फिर उसके पसंद का कोई व्यक्ति ही विधायक चुना जाता है. लेकिन इस बार मामला थोड़ा उलझा हुआ है. खुद चौटाला परिवार कई धड़ों और दलों में बंटा हुआ है.

    यहां से इलेनो के उम्मीदवार अभय चौटाल के भाई अजय चौटाला की पार्टी जेजेपी, भाजपा के साथ है और वह भाजपा उम्मीदवार को समर्थन दे रही है. अजय के बेटे दुश्यंत चौटाल राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं. वहीं ओम प्रकाश चौटाला के छोटे भाई रंजीत सिंह पड़ोस की रानिया सीट से 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते थे और वह खट्टर सरकार में बिजली मंत्री हैं. वह भी भाजपा उम्मीदवार कुंडा के लिए वोट मांग रहे हैं.

    Tags: Assembly bypoll, Elections, Farmers Agitation, Haryana news

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