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सबसे ताकतवर सुपरनोवा से निकली 200 खरब गीगाटन टीएनटी क्षमता के धमाके के बराबर एनर्जी

अब तक के सबसे ताकतवर सुपरनोवा से निकली सामान्‍य सुपरनोवा के मुकाबले 500 गुना ज्‍यादा रोशनी.

अब तक के सबसे ताकतवर सुपरनोवा से निकली सामान्‍य सुपरनोवा के मुकाबले 500 गुना ज्‍यादा रोशनी.

हाल में ब्रिटेन (Britain) और अमेरिका (US) के वैज्ञानिकों ने अब तक के सबसे ताकतवर सुपरनोवा (Supernova) का पता लगाया था. अब उनका कहना है कि इसमें खरबों गीगाटन टीएनटी क्षमता के धमाके के बराबर ऊर्जा निकली. साथ ही अब कहा जा रहा है कि ये धमाका दो विशालकाय तारों के टकराने से हुआ था.

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    खगोल विज्ञानियों ने कुछ दिन पहले अब तक के सबसे बड़े सुपरनोवा यानि तारों के विस्फोट (Supernova) का पता लगाया था. उनका कहना था कि यह किसी आम सुपरनोवा से कई गुना अधिक शक्तिशाली है. अब सुपरनोवा SN2016aps की खोज करने वाली ब्रिटेन (Britain) की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी और अमेरिका (America) के हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स की टीम ने अनुमान लगाया है कि सुपरनोवा में 200 खरब गीगाटन टीएनटी क्षमता के विस्‍फोट के बराबर ऊर्जा (Energy) निकली थी.

    साथ ही इसमें सामान्‍य सुपरनोवा के मुकाबले 500 गुना ज्‍यादा रोशनी (Light) भी निकली थी. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुपरनोवा दो विशाल तारों के आपस में टकरा कर एक हो जाने के दौरान बना है. नेचर एस्ट्रोनॉमी नाम के पीयर रिव्यू जर्नल में प्रकाशित अपने रिसर्च पेपर में शोध के सहलेखक इडो बर्गर ने इसे इसके आकार, ऊर्जा और चमक के अलावा भी कई मायनों में बेहद खास बताया है.

    दो तारों के आपस में मिल जाने के कारण हुआ धमाका
    इडो बर्ग ने कहा कि इस तरह की असामान्य ऊर्जा वाले सुपरनोवा के आसपास के बादल में हाइड्रोजन की बहुत अधिक मात्रा होने का पता चला है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसका मतलब है कि यह सुपरनोवा जरूर हमारे सूर्य जैसे दो तारों के आपस में मिल जाने के कारण बना होगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटना का जिक्र अब तक केवल सैद्धांतिक तौर पर होता आया था, लेकिन पहली बार ऐसा कुछ होने का प्रमाण मिला है.

    वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि बहुत पहले हमारा ब्रह्मांड और उसका माहौल कैसा था.


    वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे इससे मिलते-जुलते कई सुपरनोवा का पता चलेगा. इनसे यह जानने में मदद मिलेगी कि बहुत पहले हमारा ब्रह्मांड और उसका माहौल कैसा था. बता दें कि किसी पुराने तारे के टूटने से पैदा होने वाली ऊर्जा को ही सुपरनोवा कहते हैं. कई बार एक तारे के टूटने पर निकलने वाली ऊर्जा सूर्य के पूरे जीवनकाल में निकलने वाली ऊर्जा से भी ज्यादा होती है.

    कई हफ्ते फीकी रह सकती है धरती की आकाशगंगा
    सुपरनोवा की ऊर्जा इतनी शक्तिशाली होती है कि उसके सामने धरती की आकाशगंगा कई हफ्तों तक फीकी पड़ सकती है. आमतौर पर सुपरनोवा के निर्माण में व्हाइट ड्वार्फ की अहम भूमिका होती है, जिसके एक चम्मच द्रव्य का वजन भी करीब 10 टन तक हो सकता है. ज्यादातर व्हाइट ड्वार्फ गर्म होते-होते अचानक गायब हो जाते हैं. कुछ गिने चुने व्हाइट ड्वार्फ दूसरे तारों से मिलकर सुपरनोवा का निर्माण करते हैं.

    इस बार दिखे सुपरनोवा में व्हाइट ड्वार्फ तारे से नहीं टकराया बल्कि दो तारे ही आपस में टकराए हैं और अंतरिक्ष विज्ञान के आज तक के इतिहास का सबसे बड़ा सुपरनोवा पैदा कर गए हैं. इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मैट निकोल ने कहा था कि किसी भी सुपरनोवा को दो तरह से मापा जा सकता है. पहला विस्फोट की पूरी ऊर्जा से और दूसरे उससे निकले प्रकाश या विकिरण की ऊर्जा से.

    साफ हो गया है कि ये सुपरनोवा दो विशालकाय तारों के आपस में टकराने की वजह से बना था.


    सिर्फ 100 टन टीएनटी का विस्‍फोट मचा सकता है तबाही
    डॉ. निकोल के मुताबिक, आमतौर पर सुपरनोवा में विकिरण कुल ऊर्जा का एक प्रतिशत से भी कम होता है. हालांकि, इस सुपरनावा का विकिरण आम सुपरनोवा से 500 गुना ज्यादा था. यह अब तक के देखे गए सुपरनोवा में सबसे चमकदार है. उन्‍होंने कहा था कि ज्यादा चमकदार होने के लिए विस्फोट में बहुत ज्यादा ऊर्जा होनी चाहिए. तात्‍कालिक तौर पर लाइट स्पैक्ट्रम का मुआयना करने के बाद कहा गया था कि विस्फोट सुपरनोवा और बरसों पहले एक अन्य तारे से छूटे एक बहुत विशालकाय गैस के गोले के बीच हुई टकराहट से हुआ था. इसी वजह से यह इतना ज्यादा शक्तिशाली हो पाया होगा.

    अब यह साफ हो गया है कि ये सुपरनोवा दो विशालकाय तारों के आपस में टकराने की वजह से बना था. इस प्रक्रिया में दोनों तारे टकराकर एक होने का अनुमान लगाया जा रहा है. बता दें कि सिर्फ 100 टन टीएनटी क्षमता का विस्फोट 600 मीटर के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति को मार सकता है. ऐसे विस्फोट में सैकड़ों लोग मर सकते हैं और हजारों घायल हो सकते हैं.

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